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क्यों और कितनी जरूरी है नींद 

क्यों और कितनी जरूरी है नींद 

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, स्वास्थ्य
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नींद केवल आराम नहीं, बल्कि हमारे मस्तिष्क और शरीर की गहन पुनर्स्थापन प्रक्रिया है। जीवन का लगभग एक-तिहाई समय इसमें व्यतीत होता है, जो हमारी स्मृति, मनोदशा और प्रतिरक्षा से गहराई से जुड़ा है। अधश्चेतक और सुपरकियाज़मैटिक न्यूक्लियस जैसे मस्तिष्क केंद्र हमारी जैविक घड़ी को नियंत्रित करते हैं। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद ही स्वस्थ जीवन की सुदृढ़ नींव है।

नींद आपकी दिनचर्या का एक अहम घटक है। आप इसमें अपने जीवन का एक तिहाई समय बिताते हैं। भोजन और पानी की तरह सही समय पर पर्याप्त ‘उत्तम नींद‘ जीवन के लिए बेहद जरूरी है। नींद के बिना हमारे मस्तिष्क न तो अपने को और न स्मृति से जुड़ी अपनी व्यवस्थाओं को संभाल पाता है। फलस्वरूप, इसकी सभी क्षमताएं क्षीण होने लगती हैं।

नींद तंत्रिकाओं द्वारा परस्पर किए जाने वाले संचार सहित मस्तिष्क के बहुत से प्रक्रमों के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह तथ्य भी महत्त्वपूर्ण है कि नींद के दौरान हमारा शरीर और मस्तिष्क जरूरत के मुताबिक़ सक्रिय रहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नींद हमारे मस्तिष्क में जागते रहने के दौरान बने ऐसे नुकसानदेह रसायनों से मुक्त करती है जिनका एक सीमा से अधिक जमाव हमें नुकसान पहुंचा सकता है।

Things you didn't know affected your sleep - HEALTHIANS ...

यद्यपि नींद सभी के लिए जरूरी है लेकिन इसका जैविक प्रक्रम अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है। नींद लगभग शरीर के सभी ऊतकों और प्रणालियों को प्रभावित करती है। मस्तिष्क, हृदय, और फेफड़ों से लेकर चयापचय, प्रतिरक्षा प्रक्रम, मनोदशा, और रोग प्रतिरोध क्षमता – इन सभी से नींद का संबंध पाया गया है। अनुसंधानों में यह देखने में आया है कि नींद अथवा इसकी गुणवत्ता में कमी के चलते शरीर कई तरह की व्याधियों का शिकार हो सकता है जिनमें उच्च रक्तदाब, हृदवाहिका रोग, मधुमेह, अवसाद और मोटापा शामिल हैं।

नींद एक जटिल और गत्यात्मक़ प्रक्रिया है जिससे जुड़े अनेक तथ्यों को अब वैज्ञानिक समझने लगे हैं।अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार हमारे मस्तिष्क के कई हिस्से नींद की प्रक्रिया से जुड़े हैं। हमारे मस्तिष्क के भीतर मौजूद मूँगफली के आकार के एक हिस्से अधश्चतेक ( हाइपोथैलेमस ) में मौजूद तंत्रिकाओं के समूह नींद और जागरण की प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। अधश्चेतक के भीतर हजारों तंत्रिका समूहों से निर्मित सुपरकियाज़मैटिक न्यूक्लियस (Suprachiasmatic Nucleus, SCN)  तक निरंतर आँखों के माध्यम से प्रकाश की तीव्रता की सूचना पहुंचती रहती है जिससे तदनुसार हमारा सामान्य व्यवहार तय होता है अथवा प्रभावित होता है।

जिन लोगों का यह न्यूक्लियस क्षतिग्रस्त हो जाता है, उनकी नींद पर प्रकाश का कोई असर नहीं पड़ता है और उनकी दिवसीय लय का दिन – रात के चक्र से संबंध टूट जाता है।यहां यह तथ्य उल्लेखनीय है कि अधिकांश अंधे व्यक्ति प्रकाश को महसूस करने संबंधी कुछ योग्यता रखते हैं और उनका नींद और जागरण का चक्र तदनुसार संशोधित होता रहता है।

मस्तिष्क के आधार से जुड़ा मस्तिष्क स्तंभ जागने और नींद की प्रक्रियाओं के बीच के बदलावों को नियंत्रित करने हेतु अधश्चेतक से संपर्क बनाए रखता है। मस्तिष्क स्तंभ यानी मस्तिष्क का तने के समान भाग जो प्रमस्तिष्क गोलार्द्धों को सुषुम्ना रज्जु से जो़ड़ता है (इसमें पोंस, मेडुला और मध्य मस्तिष्क आते हैं)। अधश्चेतक की नींद को बढ़ावा देने वाली कोशिकायें और मस्तिष्क स्तंभ गाबा (गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड) नामक एक रसायन बनाते हैं जो मस्तिष्क के इन दो हिस्सों में मौजूद जागरण केन्द्रों की सक्रियता को कम करता है। मस्तिष्क स्तंभ (विशेष रूप से पोंस और मेड़ुला) रेम स्लीप यानी  रैपिड आई मूवमेंट स्लीप (तीव्र नेत्रगोलक संचलन नींद) में भी एक विशिष्ट भूमिका निभाता है। यह शारीरिक मुद्रा और अंगों की गतिशीलता से ताल्लुक रखने वाली पेशियों के शिथिलन के लिए संकेत भेजता है ताकि हम अपने सपनों में बने रहें।

चेतक (थैलेमस) इंद्रियों से प्राप्त होने वाली सूचनाओं को प्रमस्तिष्‍क प्रान्तस्था (सेरेब्रल कॉर्टेक्स) तक पहुंचाने के लिए एक पुनः प्रसारण केंद्र की तरह कार्य करता है। नींद की दूसरी  अवस्थाओं के दौरान तो चेतक शांत रहता है ताकि हमारा बाहरी दुनिया से संपर्क टूट जाए किंतु रेम स्लीप यानी  रैपिड आई मूवमेंट स्लीप (तीव्र नेत्रगोलक संचलन नींद) के दौरान यह सक्रिय रहता है और कॉर्टेक्स को चित्र, ध्वनियां और ऐसी सूचनाएं भेजता है जो हमारे स्वप्न दृश्यों को तय करते हैं।

     मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों में अवस्थित्त पीनियल ग्रंथि 

सुपरकियाज़मैटिक न्यूक्लियस (SCN) से मिले संकेतों के अनुसार मेलाटोनिन हॉर्मोन स्रावित करती है। अंधेरे में इस हॉर्मोन का स्राव अधिक होता है और यह हॉर्मोन हमें सोने के लिए विवश करता है। जो लोग किसी वजह से जन्म के बाद अपनी आँखों की रोशनी खो देते हैं यानी अंधे हो जाते हैं, वे अपने निद्रा चक्र को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन अपने सोने के समय पर चिकित्सकों की सलाह से मेलाटोनिन का उपयुक्त मात्रा में सेवन कर सकते हैं।

लेखक – सुभाष चंद्र लखेड़ा

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Tags: #SleepEssentials #HealthySleep #RestForSuccess #SleepWellLiveWell #SleepMatters

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