ढोल-नगाड़ों की धुन पर थानाधिकारी से लेकर अन्य पुलिसकर्मी रविवार शाम को मीराबाई के सुंदरवास स्थित निवास पर पहुंचे। इस दौरान पुलिसकर्मी साफा पहने पारंपरिक अंदाज में नजर आए। उदयपुर शहर के प्रतापनगर थाने में पुलिसकर्मियों को भोजन बनाने वाली महिला के बेटे की शादी में पुलिस थाने की ओर से 1.11 लाख रुपए का मायरा भरा।
![]()
उनके हाथों में नोटों और कपड़ों से सजे थाल थे। मीराबाई की तरफ से जोरदार स्वागत-सत्कार किया गया। थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित ने मीराबाई को चुनरी ओढ़ाकर सम्मान दिया। इसके बाद पुलिस टीम की ओर से 1.11 लाख रुपए की राशि फैरावणी के साथ भेंट की गई।
थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित ने मीराबाई को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया. इसके बाद थाने के स्टाफ की ओर से ढोल-नगाड़ों की थाप पर 1.11 लाख रुपए की राशि भेंट की गई. यह सम्मान और अपनापन देखकर मीराबाई भावुक हो गईं. सब इंस्पेक्टर रेणू खोईवाल ने बताया कि मीराबाई सिर्फ थाने में भोजन बनाने वाली महिला नहीं हैं, बल्कि पूरे स्टाफ के लिए मां जैसी हैं.

मीराबाई के तीन भाई हैं जिनमें से दो भाई पारिवारिक नाराजगी की वजह से नहीं आए। मीराबाई ने बताया कि शादी के एक साल बाद ही उनके पति का रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया था। उस वक्त बेटा मुकेश गायरी 6 माह पेट में था।
आसपास घरों में झाड़ू-पौछा लगाकर बच्चे पालकर बढ़ा किया। फिर घनश्याम जी थानाधिकारी के घर खाना बनाने लगी थी। बाद में उन्होंने ही मुझे प्रतापनगर थाने में भोजन बनाने का काम दिया। 3 हजार रुपए वेतन में काम शुरू किया था। आज 11000 रुपए वेतन हैं।

मीराबाई के तीन भाई हैं, जिनमें से दो भाई किसी पारिवारिक विवाद के चलते नाराजगी रखते हैं। ऐसे में वे शादी में शामिल नहीं हुए। यह बात थाने की एसआई रेणु खोईवाल को चता चली तो आहत हो गई। उन्होंने उसी समय कह दिया था कि ‘मीरा, चिंता मत करो, तुम्हारे भाई आएंगे और ऐसा मायरा लाएंगे कि तुम भी याद रखोगी’।

