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रामनवमी, रामोत्सव व विश्व हिंदू परिषद

रामनवमी, रामोत्सव व विश्व हिंदू परिषद

by हिंदी विवेक
in जीवन
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विश्व हिंदू परिषद देशभर में रामनवमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें शोभायात्राएं, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ, मंदिरों में विशेष पूजन और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ प्रमुख होते हैं।

भारत की सनातन संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन अत्यंत पावन, शुभ और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण दिवस माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का प्रारम्भ किया। वही वसंत ऋतु के इस कालखंड में प्रकृति भी नवजीवन धारण करती है। वृक्षों में नई कोंपलें, खेतों में नई फसलें और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी दिन से जगत जननी मां जगदम्बा के पूजन की पावन नवरात्र का भी शुभारम्भ होता है। हम हिंदू इसी दिन को हिंदू नववर्ष के रूप में मनाते हैं, जिसे नवसंवत्सर कहा जाता है।

सम्पूर्ण भारत में इस दिवस को गुढ़ी पड़वा, उगादी, नवरेह आदि नामों से भी मनाया जाता है। यह हमारे सांस्कृतिक एकत्व का भी प्रतीक है। इसी भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य विश्व हिंदू परिषद निरंतर करता आ रहा है। परिषद भारतीय समाज का भारतीय मूल्य, मान्यताओं, संस्कृति, परम्पराओं और धार्मिक चेतना को आधार मानकर हिंदू समाज का संगठन हो, इसके लिए वर्षों से कार्यरत है।

चैत्र मास का विशेष महत्व इस कारण भी है क्योंकि इसी पावन अवधि में ‘रामनवमी’ का पर्व भी आता है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। विश्व हिंदू परिषद इसे रामोत्सव के रूप में मानता है। यह पर्व धर्म, मर्यादा, आदर्श और राष्ट्रधर्म के प्रतीक भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करता है।

People Gather Large Numbers Attend Rally Editorial Stock Photo - Stock  Image | Shutterstock Editorial

विश्व हिंदू परिषद देशभर में रामनवमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें शोभायात्राएं, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ, मंदिरों में विशेष पूजन और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ प्रमुख होते हैं। भारत की अस्मिता और प्रभु राम एक ही हैं। भारत का समाज रामत्व में विश्वास रखने वाला समाज है। यही रामत्व जो हमें तुलसीदास जी की वाणी में दिखता है। जहां वे प्रभु राम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहते हैं कि बेरिऊ राम बड़ाई करहीं, बोलनि मिलनि बिनय मन हरहिं। इसका अर्थ है कि शत्रु भी प्रभु राम जी की प्रशंसा करते हैं, बोलचाल, मिलने के ढंग और विनय से मन को वे हर लेते हैं।

भगवान राम का चरित्र और भारत की दृष्टि में कोई भिन्नता नहीं है, बल्कि यह एक ही है। भारत ने विश्व शांति और सह-अस्तित्व के विचार को प्रसारित और प्रचारित किया है। प्रभु राम ने भी सदैव शांति मित्रता का विचार दिया, वही शठे शाठ्यं समाचरेत् इसका अर्थ है दुष्ट के साथ दुष्टता (जैसा व्यवहार) करनी चाहिए। इसी को प्रभु राम ने भी बताया है। बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।

बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥ अर्थात् श्रीराम को समुद्र से रास्ता मांगने के लिए अनुनय-विनय करते हुए तीन दिन बीत चुके थे, लेकिन जड़ समुद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। तब श्री राम न कहा कि बिना भय के प्रेम या आदर नहीं होता। वही प्रभु राम ने अपने जीवन में शुचिता, त्याग, समर्पण, करुणा और सामाजिक समरसता का विचार जन-जन को दिया।

अपने मर्यादित जीवन के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया। विश्व हिंदू परिषद प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामोत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। वर्ष प्रतिपदा यानी की पहले नवरात्र से प्रारम्भ हो रहे रामोत्सव का उद्देश्य है प्रभु राम के चरित्र, उनके जीवन मूल्य के आदर्शों से लागों का परिचय कराना। इसलिए 19 मार्च से 2 अप्रैल तक होने वाले रामोत्सव में प्रभु राम के जीवन के विभिन्न आयामों को जन मानस के सामने रखना है।

Slogans raised to demolish Jama Masjid in VHP's Ram Mandir rally |  SabrangIndia

इन आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में एकता, संगठन और सांस्कृतिक गौरव की भावना को सुदृढ़ करना है। हम देखें प्रभु राम के जीवन के विभिन्न पक्ष हैं जिनका चिंतन-मनन प्रत्येक व्यक्ति को करना ही चाहिए। प्रभु राम समता और ममता का अहम संदेश देते हैं। केवट के साथ प्रभु राम का सम्बंध और केवट का प्रभु राम के प्रति भाव रामायण में देखने लायक है। जिस प्रकार प्रभु राम ने समाज की संकल्पना को बताया है कि सहोदर भाव से ही समाज का जन्म होता है। वैसे ही केवट ने प्रभु राम और अपने को एक ही बिरादरी का बताया है।

VHP struggle for Ram Mandir in Ayodhya didn't begin in 1983. It started 19  years earlier

जिसमे वह कहता है की नाई से नाई, दर्जी से दर्जी कभी पैसे नहीं लेते वैसे ही आप और मैं दोनों तारने का काम करते है, मैं गंगा जी की तैराई कराता हूं वही आप तो भवसागर को पार लगाने वाले हैं। प्रभु राम ने समाज में समता और समरस होने के भाव को व्यक्त किया है। वही माता शबरी के जूठे बेरों का खाना यह सामाजिक समरसता का अहम संदेश प्रभु राम ने दिया इसी तत्व विचार को विश्व हिंदू परिषद मानता है। इसी का परिणाम है कि परिषद कहता है हिन्दव: सोदरा सर्वे, न हिन्दू पतितों भवेत। मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र समानता॥ अर्थात् सभी हिंदू भाई हैं, सब हिंदू आपस में सहोदर हैं।

Headlines: Hindutva leaders at VHP rally press for Ram temple in Ayodhya,  and other top news

कोई यहां पतित नहीं, कोई निमन्न नहीं, कोई उच्च नहीं। हम सब एक पूर्वज की संतान हैं, हम सब हिंदू हैं। मेरी दीक्षा धर्म की रक्षा करना है और मेरा मंत्र समानता है। इसी प्रकार प्रभु राम जी के द्वारा उत्तर और दक्षिण को जोड़ने का भी काम किया गया, सम्पूर्ण राष्ट्र का एक विचार का एकत्व भाव के आधार पर संगठन प्रभु राम के जीवन में हमें दिखता है। वही प्रभु राम ने संघ शक्ति कलयुगे का अहम संदेश दिया। सुग्रीव-हनुमान जी की मित्रता और किस प्रकार साधारण से दिखने वाले लोगों में राष्ट्रत्व का विचार जागृत कर, उन्हें प्रशिक्षण दे, रावण जैसे योद्धा से संघर्ष की प्रेरणा फिर विजय के लिए प्रेरित करना कोई साधारण बात नहीं है।

यह हिंदू समाज को समझना चाहिए। राजा को समाज में किसी भी व्यक्ति की बात को महत्व देना और लोकमत को महत्व देना यह भी प्रेरणा का संदेश है। वही राम राज्य की संकल्पना में विदित है कि भारत के जनमानस में कहीं भी शासन के सर्वोच्च मापदंडों की बात की जाती है तो रामराज की बात की जाती है। हम अपने परिवारों में, समाज में इस रामराज की संकल्पना को वर्षों से सुनते आ रहे हैं, यह भी यथार्थ है। हम देखें कि रामचरित मानस की चौपाई रामराज के अर्थ को भलीभांति परिभाषित करती है।

-डॉे. प्रवेश कुमार

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Tags: #RamNavami #Ramotsav #JaiShriRam #SanatanDharma #LordRam #RamRajya #HinduFestival #IndianCulture #SpiritualIndia #VHP#ramnavmi

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