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चंद्रनाथ हत्याकांड

चंद्रनाथ हत्याकांड

क्या बंगाल को दूसरा मणिपुर बनाने की साजिश?

by हिंदी विवेक
in राजनीति, विशेष
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बंगाल में सिर्फ शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव की हत्या नहीं हुयी है, बल्कि Deep State का एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षात्मक ऑपरेशन चल रहा है? जो तस्वीर धीरे धीरे सामने आ रही है, वह यह नहीं कहती कि यह “बस किसी गुंडे ने गुस्से में गोली चला दी”, बल्कि यह कहती है कि यह एक ठंडे दिमाग से बैठाई गई रणनीति का हिस्सा हो सकता है— जिसमें राजनीति, अपराध और शायद विदेशी दखल सभी के धागे उलझे हों।

Suvendu Adhikari PA Murder:गाड़ी रुकवाकर बरसाईं गोलियां...बंगाल में शुभेंदु  अधिकारी के PA की हत्या | Moneycontrol Hindi

चंद्रनाथ का वाहन दोहारिया इलाके से गुजर रहा था, तभी सामने से एक सफेद कार आकर रुकी। कार से कई लोग उतरे, कुछ मोटरसाइकिलों पर सवार हुए और करीब 16 राउंड फायरिंग करके वहां से फरार हो गए।

फायरिंग के बाद उन्होंने वही सफेद कार मौके पर छोड़ दी, जिस पर WB74AK2270 नंबर प्लेट लगी थी। पुलिस ने जब रजिस्ट्रेशन चेक किया, तो वाहन सिलिगुड़ी ARTO में दर्ज मिला और मालिक का नाम विलियम जोसेफ निकला।

लेकिन जब पुलिस ने मालिक से संपर्क किया, तो उसने कहा कि “मेरी गाड़ी तो अभी भी मेरे पास है।” यानी, नंबर प्लेट फर्जी थी, या कार चोरी/किराए पर ली गई थी।

हम इस घटना की निंदा करते हैं... सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या पर TMC |  TMC Condemns Murder of Suvendu Adhikari PA chandranath rath

यह बिंदु अहम है— ऐसा नहीं होता कि कोई साधारण गुंडा इस तरह फर्जी नंबर, फर्जी वाहन और बाइक आधारित एस्केप रूट तैयार कर ले। यह उस तरह की तकनीक है जो आमतौर पर किसी बड़े नेटवर्क, शस्त्र माफिया या किसी टारगेटेड ऑपरेशन से जुड़ी गैंगों का काम होता है।

क्या यह सिर्फ “TMC गुंडे” हैं?

यह एक ऐसा मिश्रण है, जिसमें:

● राजनीति ने हिंसा को नर्मालाइज़ कर दिया है
● अपराधी नेटवर्क ने उसे टूल बना लिया है
● और विदेशी दखल ने इस राज्य को एक ऐसा फील्ड बनाने की दिशा ले ली है, जहां हर घटना से अंतरराष्ट्रीय छवि खराब हो और देश की सुरक्षा कमज़ोर पड़े।

नंबर प्लेट फर्जी करना, वाहन जानबूझकर छोड़ना, राउंड काउंट और बाइक आधारित एस्केप रूट— ये सब एक ऑपरेशन लाइक तरीका है, न कि बेतरतीब हिंसा। यह तर्क बिल्कुल युक्तियुक्त है कि यह एक पेड, प्रोफेशनल हिट जॉब हो सकता है, जिसे बाहर से फंड या तैयारी दी गई हो और स्थानीय/राजनैतिक सहयोग।

हालांकि यह भी नहीं कहा जा सकता कि राजनीतिक भूमिका ज़ीरो है। घटना चुनावी माहौल के बीच हुई है और राज्य की स्थिति ऐसी है कि आरोप प्रत्यारोप, याचिका जवाब और राजनीतिक बयानबाज़ी खुद एक तरह से हिंसा को बढ़ावा देने वाली है।

यानी राजनीति और अपराध दोनों एक दूसरे पर छाप छोड़ रहे हैं— कहीं राजनीति अपराधीकरण की तरफ, तो कहीं अपराध राजनीतिकरण की तरफ।
विदेशी दखल और “मणिपुर मॉडल” की ओर इशारा करते हैं।

बंगाल की भौगोलिक स्थिति, नेपाल, बांग्लादेश और भारत के पूर्वी भाग से जुड़ाव के कारण यह राज्य किसी भी विदेशी रणनीति के लिए बहुत अहम है।

और पूर्वोत्तर से लेकर बांग्लादेश, म्यांमार तक अमेरीकी डीपस्टेट पहले से active है। म्यांमार और बांग्लादेश तो अमेरिका, चीन, रूस की खुफिया एजेंसियों के बीच अखाड़ा बने हुये हैं।

अगर वहां की तरह निरंतर आपराधिक और “राजनीतिक” हिंसा को फीड करते रहा जाए, तो यह आसानी से एक ऐसा ज़ोन बन सकता है जहां असली लक्ष्य सिर्फ राजनेता या दल न हों, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय इमेज हो।

मणिपुर में जो हुआ, उसका दृश्य यह दिखाता है कि कैसे जातीय और राजनीतिक तनाव को बाहर से फीड कर लगातार हिंसा का चक्र बनाया जा सकता है। अगर बंगाल में भी ऐसा ही दृश्य बनाने की कोशिश की जा रही हो, तो यह बिल्कुल असंभव नहीं है।

विदेशी दखल यहां दो तरह से हो सकता है— एक तो डायरेक्ट फंडिंग और गुप्त नेटवर्क के ज़रिए और दूसरा राजनीतिक नेक्सस के ज़रिए जो राज्य की छवि खराब कर घुटन का माहौल बना दे।

इस तरह के मामले में राज्य पुलिस या सिर्फ CBI की जांच काफी नहीं है। यहां जरूरत है एक ऐसी जांच की जो इन सब धागों को अलग अलग भी खींच सके—

फर्जी नंबर प्लेट और वाहन तस्करी
शस्त्र नेटवर्क और गोली सप्लाई चेन
विदेशी फाइनेंशियल या लॉजिस्टिक कनेक्शन।

इसीलिए NIA और CBI— दोनों की तत्काल, समन्वित जांच की आवश्यकता है। बिना देरी के दोनों एजेंसियों को मामले में तैनात किया जाना चाहिए, ताकि न तो राजनीतिक दबाव जांच को डेफ्लेक्ट करे और न ही अपराधी नेटवर्क या विदेशी जुड़ाव चुपके से अपने रास्ते बदल ले।

– मनोज कुमार मिश्रा

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Tags: #Bengal #WestBengal #BengalViolence #BreakingNews #PoliticalViolence #ShubhenduAdhikari #BJP #TMC #CBI #NIA #DeepState #ManipurElection Violence 2026Shubhendu Adhikari PA Murder

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