जब अस्थमा की बात आती है, तो आपको तरह-तरह की सलाह सुनने को मिल सकती है: “यह करें, वह न करें”, “ यह जीवनभर रहता है”, या “ इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल न करें।” लेकिन इनमें से कई बातें वास्तव में गलतफहमियां हैं और इन पर विश्वास करने से सही इलाज में देरी हो सकती है। इतना ही नहीं, ऐसी गलतफहमियों की वजह से लक्षणों पर नियंत्रण खराब हो सकता है या जटिलताएं भी हो सकती हैं।
आइए हम दमा के उपचार से जुड़ी ऐसी गलतफहमियों के विषय में समय रहते जान लें, ताकि दमा के उपचार में हम कोई ऐसी गलती न कर बैठें, जिससे रोग के उपचार में कोई दिक्कत हो।

भारत में लगभग 343 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। यह इस बात को रेखांकित करता है कि आपके फेफड़ों की रोजाना लगातार देखभाल कितनी महत्वपूर्ण है। क्यों न हम अपनी सांसों को वह सहारा दें जिसकी वे हकदार हैं।
अस्थमा से जुड़ी 5 गलतफहमियां, जिन्हें आपको तुरंत जानना चाहिए।
गलतफहमी 1: इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल करने से इसकी लत लग जाती है।
यह सच नहीं है। इनहेलर की कोई लत नहीं लगती हैं। वे दवा को सीधे वायुमार्गों तक पहुंचाते हैं, जिससे बेहतर नियंत्रण मिलता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर का नियमित उपयोग दमा के दौरों को रोकने और लक्षणों को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
गलतफहमी 2: अस्थमा केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है।
अस्थमा मुख्य रूप से वायुमार्गों को प्रभावित करता है, लेकिन यह नींद, ऊर्जा के स्तर और जीवन की समग्र गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है। अगर अस्थमा ठीक से नियंत्रित न हो, तो यह दैनिक गतिविधियों और सामान्य स्वास्थ्य में बाधा डाल सकता है।
जब सांस लेना मुश्किल हो जाता है, तो केवल फेफड़े ही जोखिम में नहीं होते। गंभीर अस्थमा के दौरों के दौरान संकुचित वायुमार्ग शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को सीमित कर सकते हैं। यदि ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाए, तो यह मस्तिष्क, हृदय और गुर्दों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय पर इलाज बहुत ज़रूरी है। लक्षणों के बिगड़ने का इंतज़ार न करें। गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें और किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
गलतफहमी 3: “ अस्थमा का इलाज केवल दौरों के समय ही जरूरी है।”
अस्थमा एक दीर्घकालिक समस्या है, जिसकी केवल दौरों के समय नहीं, बल्कि लगातार प्रबंधन की आवश्यकता होती है। रोज़ाना ली जाने वाली दमा नियंत्रक दवाएं सूजन को कम करने और भविष्य के दौरों को रोकने में मदद कर सकती हैं।
अपनी अस्थमा की दवा कभी खत्म न होने दें। अपने केमिस्ट से भरोसेमंद और समय पर डिलीवरी के सदैव सचेत रहें।
गलतफहमी 4: एलर्जी और अस्थमा पूरी तरह अलग-अलग स्थितियां हैं।
एलर्जी और अस्थमा का आपस में गहरा संबंध है। अस्थमा से पीड़ित कई लोगों में धूल, परागकण, पालतू जानवरों की रूसी या अन्य एलर्जेन्स जैसे एलर्जिक ट्रिगर्स (allergic triggers) होते हैं। इन एलर्जीज को नियंत्रित करने से दौरे कम हो सकते हैं और अस्थमा पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
एलर्जी पैनल टेस्ट करवाने से आपके सटीक ट्रिगर्स (exact triggers) की पहचान हो सकती है, जिससे अस्थमा का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना आसान हो जाता है। गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिज़ीज (GERD) भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है। जीईआरडी में पेट का एसिड वापस फूड पाइप में आ जाता है, जिससे हार्टबर्न या मुंह में खट्टा स्वाद जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह एसिड वायुमार्गों को उत्तेजित कर सकता है और अस्थमा को बिगाड़ सकता है।
आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि जीईआरडी (GERD) को मैनेज करने से अस्थमा के नियंत्रण में सुधार हो सकता है।
गलतफहमी 5: अस्थमा के रोगियों को एक्सरसाइज यानी व्यायाम से बचना चाहिए।
यदि अस्थमा ठीक से नियंत्रित न हो, तो कठिन शारीरिक व्यायाम इसके लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है। बहरहाल, सही उपचार और उपयुक्त व्यायाम के बारे में मार्गदर्शन के साथ, अस्थमा से पीड़ित अधिकांश लोग सुरक्षित रूप से सक्रिय रह सकते हैं।
– सुभाष चंद्र लखेड़ा

