मंदिर, जिहाद और मतांतरण के विरुद्ध ‘वार रूम’ के रूप में कार्य करें – सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, प्रांत मंत्री, विश्व हिन्दू परिषद (इन्द्रप्रस्थ प्रांत)
नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप), इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) प्रांत के ‘मंदिर अर्चक आयाम’ द्वारा राजधानी में चलाए जा रहे वर्षव्यापी ‘मंदिर संपर्क अभियान’ ने अब व्यापक गति पकड़ ली है। इस अभियान के प्रथम चरण में दिल्ली के लगभग 30 मंदिरों में महत्वपूर्ण बैठकें सफलतापूर्वक सम्पन्न हो चुकी हैं। इन बैठकों में मंदिर समितियों के अध्यक्ष, महामंत्री, अर्चक, पुजारी एवं अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया।
विहिप के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस महाभियान का मुख्य लक्ष्य दिल्ली के लगभग 1500 मंदिरों, गुरुद्वारों, जैन स्थानकों एवं आर्य समाज मंदिरों से सीधा संपर्क स्थापित कर, उन्हें समाज के एक सक्रिय और ऊर्जावान केंद्र के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि इन बैठकों में मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया जा रहा है:
1. मंदिरों के समक्ष उपस्थित वर्तमान समस्याएं, प्रशासनिक चुनौतियां एवं उनका स्थायी समाधान।
2. हिन्दू समाज के सम्मुख खड़ी चुनौतियों का डटकर सामना करने में मंदिरों की सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका।

मंदिरों की प्रमुख समस्याएं एवं विहिप का संकल्प:
बैठकों के दौरान विभिन्न मंदिर समितियों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर श्री गुप्ता ने विहिप का स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया:
* व्यावसायिक बिजली दरों का कड़ा विरोध: मंदिर कोई व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना के पावन केंद्र हैं। अतः इन पर व्यावसायिक बिजली दरें थोपना सर्वथा अन्यायपूर्ण है। विहिप रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने हेतु सरकार और प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा पूरी प्रमुखता से उठाएगी।
* पुजारियों हेतु सम्मानजनक मानदेय: छोटे मंदिरों में सीमित आय के कारण अर्चकों को पर्याप्त मानदेय नहीं मिल पाता। हिन्दू समाज की आध्यात्मिक चेतना के संवाहक पुजारियों के आर्थिक एवं सामाजिक स्थायित्व के लिए विहिप, प्रशासन और समाज के सहयोग से एक ठोस समाधान सुनिश्चित करेगी।
* प्रशासनिक नोटिस व वैधानिक सुरक्षा: मंदिरों को मिलने वाले अनावश्यक प्रशासनिक नोटिसों और कानूनी अड़चनों के विरुद्ध विहिप एक मजबूत ढाल बनकर खड़ी होगी और प्रशासन से सीधा संवाद कर इनका स्थायी समाधान निकालेगी।
हिन्दू समाज के सशक्तीकरण में मंदिरों की बहुआयामी भूमिका
प्रांत मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि मंदिरों की भूमिका केवल आरती और पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, अपितु इन्हें समाज के हर आयु वर्ग के जीवन से गहराई से जोड़ा जाना चाहिए:
* बालकों के लिए: मंदिरों को ‘संस्कार केंद्र’ के रूप में विकसित किया जाए, जहां मुंडन, यज्ञोपवीत व बाल संस्कार जैसे आयोजन सुगमता से हों।
* युवाओं के लिए: मंदिरों के सानिध्य व देखरेख में वाचनालय (पुस्तकालय), करियर परामर्श केंद्र, व्यायामशाला और सुरक्षा प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जाएं।
* महिलाओं व किशोरियों के लिए: मातृशक्ति के सशक्तीकरण हेतु मंदिरों के माध्यम से मेहंदी व सौंदर्य प्रशिक्षण केंद्र, किशोरी साधना केंद्र और आत्मरक्षा प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
* समाज व पर्यावरण के लिए: मंदिर परिसरों के माध्यम से नवविवाहित दंपत्ति सम्मेलन, नैतिक शिक्षा, सामाजिक समरसता के कार्यक्रम आयोजित हों तथा गौमाता के संरक्षण हेतु गौशालाओं का सक्रिय संचालन किया जाए।
‘घर-वापसी’ और धर्म जागरण का केंद्र बनें मंदिर
वर्तमान परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि जो बंधु किन्हीं कारणोंवश अपने मूल सनातन धर्म और सांस्कृतिक जीवन-मूल्यों से दूर हो गए हैं, अब उन्हें ससम्मान वापस लाने का समय आ गया है। मंदिरों को प्रेम, आत्मीयता और सामाजिक समरसता के माध्यम से ‘घर-वापसी’ एवं ‘धर्म जागरण’ के पुनीत कार्यों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
आह्वान:
भारतीय इतिहास में मंदिर सदैव शिक्षा, सेवा, संस्कार और सामाजिक संगठन की धुरी रहे हैं। विहिप ने दिल्ली के समस्त धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, मंदिर समितियों तथा संपूर्ण हिन्दू समाज से इस युगांतरकारी अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया है, ताकि हम सब मिलकर वर्तमान चुनौतियों का दृढ़ता से सामना कर सकें।
– संजीव कुमार
