| राष्ट्र प्रथम के विचार पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का आग्रह इतना अधिक था कि भारतीय जनसंघ की स्थापना के मात्र डेढ़ वर्ष बाद ही धारा 370 लगाकर जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से अलग करने के नेहरु जी की घातक मंशा के खिलाफ उन्होंने आंदोलन कर उसे समाप्त करने का निर्णय लिया था| |
भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष हैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी | भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए 1977 में भारतीय जनसंघ ने अपना विलय जनता पार्टी में कर चुनाव लड़ा और इंदिरा-कांग्रेस को करारी शिकस्त दी| लेकिन दोहरी सदस्यता के नाम पर जब जनता पार्टी के नेताओं ने भारतीय जनसंघ के नेताओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से नाता तोड़ने की कुटिल चाल चली तो 1980 में अटल बिहारी बाजपेई की अध्यक्षता में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ | आज भारतीय जनता पार्टी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का गौरव प्राप्त है | इतना ही नहीं तो न केवल गत 12 वर्ष से प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सतत् सरकार चल रही है वरन 22 राज्यों में भी भाजपा अथवा NDA की सरकार चल रही हैं |
भारत के राजनीतिक क्षेत्र में यह एक बड़ी उपलब्धि है | रविवार, 21 जून को प्रधान मंत्री जी दिल्ली में आयोजित R भारत के कॉन्लेव में मुख्य अतिथि थे | अपने संबोधन में मोदी जी ने अपनी विशिष्ट शैली में 12 वर्ष में सरकार की उपलब्धियों और सरकार के समक्ष आई चुनौतियों की चर्चा की | मंत्रमुग्ध श्रोताओं को हर फ्रंट पर मिली सफलता का रहस्य उजागर करते हुए उन्होंने बताया कि इस सब के मूल में है भारतीय जनता पार्टी का ‘राष्ट्र प्रथम’ का विचार, जो भाजपा की नीति भी है और मंत्र भी है |

जब हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर दृष्टि डालते हैं तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सम्पूर्ण जीवन ‘राष्ट्र प्रथम’ विचार का मूर्तिमंत प्रतीक नज़र आता है | वे मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के वाइस चांसलर बन गए थे | यदि वे चाहते तो शेष सम्पूर्ण जीवन पूर्ण ऐश्वर्य एवं शानोशौकत के साथ पूर्ण कर सकते थे | परंतु उन्होंने राष्ट्र प्रथम के विचार को प्रमुखता दी और शेष जीवन भारतमाता की सेवा में होम कर दिया |
वह हिन्दू महासभा से जुड़ गये | 1942 में बंगाल में प्रजा किसान पार्टी के फजलुल हक के नेतृत्व में सरकार बनी जिसमें हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग भी शामिल थी और हिन्दू महासभा के नेता के नाते डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उस सरकार में केबिनेट मंत्री थे | इसी बहाने कांग्रेस और उसका इको सिस्टम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाने का कुत्सित आरोप लगाते हैं | यह जानबूझकर गढ़ा गया कुतर्क के अतिरिक्त कुछ नहीं है क्योंकि स्वयं सुभाषचन्द्र बोस ने गांधी जी को बताया था कि बंगाल में प्रजा किसान पार्टी की सरकार बनाने के लिए मुस्लिम लीग की जरूरत ही नहीं थी| मगर मौलाना आजाद ने गांधी जी की मान-मनौव्वल करके मुस्लिम लीग को सरकार में शामिल कराया था | मगर कांग्रेस और उसके इको सिस्टम को तथ्यों से क्या लेना-देना |
दूसरे, गांधी जी द्वारा 9 अगस्त 1942 से शुरू किए गए ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आह्वान के बाद प्रदर्शनकारियों और कांग्रेसियों पर अंग्रेजों द्वारा ढाए जा रहे जुल्मों के खिलाफ 12 अगस्त 1942 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लार्ड वायसरॉय को पत्र लिखा था | जब उस पत्र का कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया तो 16 मई 1942 को उन्होंने सरकार से त्यागपत्र दे दिया था अर्थात ‘राष्ट्र प्रथम’ का विचार |
भारत विभाजन के बाद 15 अगस्त 1947 को जब नेहरु जी के प्रधानमंत्रित्व में भारत की पहली राष्ट्रीय सरकार का गठन हुआ तो गांधी जी के आग्रह पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी राष्ट्रीय सरकार में शामिल किया गया था | मगर जब नेहरु जी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के साथ कुख्यात नेहरु-लियाक़त समझौता किया गया जिसमें भारत के हितों की पूर्णतः अनदेखी की गई थी तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत सरकार से त्यागपत्र देने में देर नहीं लगाई अर्थात फिर वही विचार- ‘राष्ट्र प्रथम’|
राष्ट्र प्रथम के विचार पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का आग्रह इतना अधिक था कि भारतीय जनसंघ की स्थापना के मात्र डेढ़ वर्ष बाद ही धारा 370 लगाकर जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से अलग करने के नेहरु जी की घातक मंशा के खिलाफ उन्होंने आंदोलन कर उसे समाप्त करने का निर्णय लिया था| हालांकि शुभचिंतकों द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरु जी की बदनीयती से आगाह कर दिया गया था लेकिन उन्होंने सबको अनसुना करते हुए बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश का अपना निश्चय नहीं बदला और अंततः भारत राष्ट्र की संप्रभुता के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया|
यद्यपि प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत एक शक्तिशाली एवं समृद्ध राष्ट्र के रूप में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है मगर रोज़ नई-नई चुनौतियों का भी सामना कर रहा है| चुनौतियां बाहर से भी हैं और अंदर से भी| कोढ़ में खाज ये कि भारत का विपक्ष भारत विरोधी विदेशी ताकतों के टूलकिट पर काम करता नज़र आ रहा है| दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी जी ने कमर कस रखी है आने वाले 1000 वर्ष तक मजबूत भारत की पुख्ता नींव रखने की| उनका पक्का विश्वास है कि जब भारत का हर नागरिक ‘राष्ट्र प्रथम’ का विचार लेकर पूर्ण निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाना प्रारंभ कर देगा तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुमकिन है| इसी को आधार बना कर मोदी जी खुद को खपा रहे हैं जिसके परिणाम भी दिखने लगे हैं| डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्य तिथि पर यही सच्ची श्रद्धांजलि है|

