हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
जेन-जी को भड़काने का षड्यंत्र

जेन-जी को भड़काने का षड्यंत्र

by हिंदी विवेक
in जुलाई 2026, युवा
0

कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस के राहुल गांधी छात्र आंदोलन की आड़ में जेन-जी को भड़काकर देश में हिंसा, अस्थिरता और अराजकता फैलाना चाहते हैं। इसलिए नेपाल-बांग्लादेश की तरह क्रांति से सत्ता परिवर्तन का प्रयोग भारत में भी करने का प्रयास कर रहे हैं।

वर्तमान समय में जो संघर्ष दिखाई दे रहा है, वह केवल राजनीतिक दलों का संघर्ष नहीं है। यह धर्म और अधर्म, व्यवस्था और अराजकता, सभ्यता और विघटन के बीच चल रहा गहरा वैचारिक युद्ध है। इस युद्ध की सबसे घातक बात यह है कि अधर्मी शक्तियां अब प्रत्यक्ष रूप में सामने नहीं आतीं। वे नए-नए मुखौटे पहनकर आती हैं। कभी सामाजिक न्याय के नाम पर, कभी छात्र आंदोलन के नाम पर, कभी फेमिनिस्ट आंदोलन बनकर, कभी पर्यावरण एक्टिविज्म बनकर, कभी सेकुलरिज्म के नाम पर, कभी डिजिटल क्रांति बनकर और कभी युवा आक्रोश का चेहरा बनकर। आज इसी आधुनिक स्वरूप को समझना आवश्यक है, जिसे मैं नव कम्युनिस्ट कॉकरोच इकोसिस्टम कहता हूं।

कॉकरोच जनता पार्टी' का एक्स अकाउंट भारत में हुआ बैन

कॉकरोच इसलिए क्योंकि यह तंत्र कभी समाप्त नहीं होता। यह हर परिस्थिति में नया चेहरा, नया नैरेटिव और नया मंच लेकर वापस आ जाता है। यदि एक आंदोलन विफल हो जाए तो दूसरा खड़ा कर दिया जाता है। यदि एक चेहरा बेनकाब हो जाए तो नया इन्फ्लुएंसर सामने आ जाता है। यदि एक नैरेटिव टूट जाए तो नया ट्रेंड शुरू हो जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। यह विचारधारा से अधिक सर्वाइवल नेटवर्क की तरह काम करता है।

क्या AAP का 'सीक्रेट प्रोजेक्ट' है कॉकरोच जनता पार्टी? पूर्व नौकरशाह आशीष  जोशी ने उठाए सवाल, वापस लिया समर्थन - cockroach janta party aap link  controversy abhijeet ...

पुराने कम्युनिस्ट वर्ग संघर्ष की बात करते थे। मजदूर बनाम पूंजीपति, पर आधुनिक नव कम्युनिस्ट कॉकरोच मॉडल उससे कहीं अधिक घातक है। कॉकरोच जनता पार्टी का अचानक उभार भी इसी पैटर्न का हिस्सा दिखाई देता है। पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले वक्तव्य को सोशल मीडिया पर उछाला गया। बाद में स्वयं चीफ जस्टिस को सफाई देनी पड़ी कि उनका वक्तव्य युवाओं के लिए नहीं बल्कि फर्जी डिग्री और जालसाजी करने वालों के संदर्भ में था, पर तब तक डिजिटल नैरेटिव बनाया जा चुका था कि सिस्टम युवाओं का अपमान कर रहा है। फिर अचानक इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोवर्स का वातावरण खड़ा किया गया। ऐसा प्रचारित किया गया मानो भारत की पूरी युवा पीढ़ी कॉकरोच जनता पार्टी के साथ खड़ी हो।

कॉकरोच जनता पार्टी' का पंजाब में हल्लाबोल: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की  मांग को लेकर अमृतसर में होगा प्रदर्शन

बाद में सोशल मीडिया पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और विदेशी बॉट नेटवर्क से जुड़े अकाउंट्स की चर्चा सामने आने लगी। विकिपीडिया सम्पादन में भी संदिग्ध साउथ एशिया प्रोफाइल वाले खातों की भूमिका पर प्रश्न उठे। यही नव कम्युनिस्ट कॉकरोच मॉडल है- पहले कृत्रिम जनसमर्थन दिखाओ, फिर युवाओं को विश्वास दिलाओ कि देश बदलने वाला आंदोलन शुरू हो चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके का सम्बंध पहले आम आदमी पार्टी के डिजिटल प्रचार मॉडल से जुड़ा रहा है। कई रिपोर्टों में उन्हें एएपी (आप) के सोशल मीडिया और मीम नेटवर्क से जुड़ा बताया गया।

अब वही मॉडल युवा क्रांति के रूप में पैकेजिंग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। 6 जून का प्रदर्शन वैसा जनसमर्थन नहीं जुटा पाया, जैसी उसके आयोजकों को अपेक्षा थी, किंतु इसके बाद यह प्रयास समाप्त नहीं हुआ। इसे देशव्यापी स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई। पुणे के सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, लखनऊ के इको गार्डन, अमृतसर, हैदराबाद के धरना चौक, बेंगलुरु और जयपुर सहित कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित करने की योजनाएं सामने आने लगीं। इससे यह संकेत मिला कि यह केवल एक दिन का विरोध नहीं बल्कि चरणबद्ध ढंग से चलाया जाने वाला अभियान है।

इन्हीं घटनाक्रमों के बीच एक पॉडकास्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि देश के लोकतंत्र और सभ्यता को बचाना है तो लोगों को सड़कों पर आना होगा, लाठियां खानी पड़ें, जेल जाना पड़े या गोलियां भी खानी पड़ें। यह वक्तव्य पश्चिम बंगाल में 4 मई 2026 को भाजपा की प्रचंड जीत के बाद और काकरोच जनता पार्टी के उदय से लगभग 15-20 दिन पहले आया था। उन्होंने यह भी कहा कि केवल चुनावों से परिवर्तन सम्भव नहीं है, लोगों को सड़कों पर उतरकर क्रांति करनी होगी। ऐसे वक्तव्य यह प्रश्न खड़ा करते हैं कि क्या लोकतांत्रिक असहमति की आड़ में देश को लम्बे समय तक अस्थिर करने की भूमिका तैयार की जा रही है।

Up:राहुल गांधी पर याचिकाएं लगाने वाले भाजपा कार्यकर्ता को मिलेगी जेड प्लस  सुरक्षा, गृह मंत्रालय कर रहा विचार - Up: Bjp Worker Who Filed Several  Petitions Against ...

इसी कड़ी में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी छात्र आंदोलन करने की बात कही है। इससे स्पष्ट होता है कि शाहीन बाग आंदोलन और किसान आंदोलन के बाद छात्र आंदोलन का प्रयोग होने की सम्भावना है। कॉकरोच जनता पार्टी का यह प्रदर्शन भी उसी व्यापक परिदृश्य का एक हिस्सा प्रतीत होता है। कांग्रेस, इंडी गठबंधन के कुछ घटक दल, वामपंथी समूह, इस्लामी कट्टरपंथी तत्व, ईसाई मिशनरी नेटवर्क और ग्लोबल मार्केट फोर्सेज का यह कॉकटेल अलग-अलग मुद्दों के सहारे युवाओं को संगठित करने का प्रयास करता दिखाई देता है।

भारतीय समाज को जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर लड़ाने के बाद अब वैश्विक इकोसिस्टम ने एक नई रणनीति का सहारा लिया है जनरेशन वॉर अर्थात पीढ़ियों के बीच संघर्ष की राजनीति। बेबी बूमर्स (1946-1964), जेनरेशन एक्स (1965-1980), मिलेनियल्स या जेनरेशन वाई (1981-1996), जेनरेशन जेड (1997-2012), जेनरेशन अल्फा (2013-2024) और जेनरेशन बीटा (2025-2039) जैसी पीढ़ीगत श्रेणियों के बीच वैचारिक टकराव को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज को दीमक की भांति भीतर से खोखला करना और उसकी मूल इकाई परिवार व्यवस्था को ध्वस्त करना है।

इस जनरेशन वॉर की कहानी नेपाल में हुई हिंसक घटनाओं से आरम्भ होती है, जिसकी पृष्ठभूमि 8 सितम्बर 2025 से बनती दिखाई देती है। यह पूरा घटनाक्रम किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं लगता। नेपाल में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया गया था। सार्वजनिक रूप से इसका कारण भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को बताया गया, परंतु बाद में अनेक मीडिया रिपोर्टों में यह सामने आया कि यह केवल स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश नहीं था बल्कि एक सुनियोजित रिजीम चेंज ऑपरेशन का हिस्सा था। इन रिपोर्टों में अमेरिकी डीप स्टेट और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की भूमिका की ओर भी संकेत किया गया था।

Nepal ‘Gen Z’ protest death toll climbs, parliament stormed

नेपाल की इन घटनाओं के बाद भारत में भी कुछ राजनीतिक नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों में यह कहा जाने लगा कि नेपाल की तरह भारत की जेन-जी को भी सड़कों पर उतरना चाहिए और केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी सरकार को हटाने के लिए व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाना चाहिए। भारत को अस्थिर करने की ऐसी आकांक्षाओं के पीछे इस्लामी कट्टरपंथ, वामपंथ, ईसाई मिशनरी नेटवर्क, कांग्रेस, इंडी गठबंधन के कुछ घटक दल तथा डीप स्टेट का एक वैचारिक कॉकटेल सक्रिय दिखाई देता है, जो अलग-अलग मुद्दों के माध्यम से असंतोष को संगठित कर उसे व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप देने का प्रयास करता है।

अब इस जनरेशन वॉर की कालक्रमिक पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है। इस विषय को समझने के लिए सभ्यताओं के इस संघर्ष के पैटर्न को भी समझना होगा। यह संघर्ष पश्चिम की ‘हम’ और ‘वे’ की विभाजनकारी मानसिकता पर आधारित सभ्यता और धर्मरूपी कॉस्मिक ऑर्डर तथा सृष्टि-संतुलन की स्थापना करने वाली हिंदू सभ्यता के मध्य का संघर्ष है। इसलिए इस संघर्ष को धर्म और अधर्म के मध्य होने वाले युद्ध के रूप में भी समझा जा सकता है। भारत को भीतर से खंडित करने के उद्देश्य से विभिन्न मत-आधारित और वैचारिक शक्तियां अनेक प्रकार के प्रकल्प संचालित कर रही हैं। उनमें से एक प्रकल्प भारतीय राष्ट्र को अनेक टुकड़ों में विभाजित करने का प्रयास भी है। इसके लिए जनरेशन वॉर जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से युवाओं को भारतीय राष्ट्र की मूल चेतना के विरुद्ध खड़ा करने का प्रयास किया जाता है।

इस रणनीति में जेनरेशन जेड को अपेक्षाकृत सरल लक्ष्य माना जाता है। इसके लिए पेपर लीक, नीट जैसी परीक्षाओं की खामियां, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं जैसे वास्तविक मुद्दों को असंतोष के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन मुद्दों को आधार बनाकर युवाओं में व्यापक असंतोष उत्पन्न किया जाता है, जबकि लक्ष्य भारत को भीतर से दुर्बल बनाकर उसे विखंडन की दिशा में धकेलना है।

दीपक कुमार द्विवेदी

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0