अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए बनी समिति में डॉ. सुरेश हावरे की नियुक्ति की घोषणा सोमवार को हुई। इस खबर ने राम मंदिर को लेकर चिंतित भारतीयों को बड़ी राहत दी है।
मुंबई के प्रसिद्ध बिल्डर और परमाणु वैज्ञानिक के रूप में पूरे देश में पहचाने जाने वाले डॉ. हावरे शिर्डी के साईं संस्थान के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उनका कार्यकाल बेहद शानदार रहा। साईं समाधी शताब्दी वर्ष उन्हीं के कार्यकाल में संपन्न हुआ। उनके कुशल नेतृत्व, सृजनात्मक योजना और शानदार आयोजन के कारण यह आयोजन न केवल देश में बल्कि विश्वभर में सराहा गया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी इस आयोजन के दौरान शिर्डी जाकर डॉ. हावरे की योजना क्षमता और शिर्डी में चलाई गई विभिन्न योजनाओं की प्रशंसा की थी।
स्वच्छ और पारदर्शी कार्यशैली डॉ. हावरे की एक और विशेषता है। शिर्डी में रोजाना दर्शन के लिए आने वाले औसतन 80 हज़ार श्रद्धालुओं की बेहतरीन व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ उन्होंने संस्थान के प्रसादालय, अत्याधुनिक अस्पताल, शिक्षा परिसर, आधुनिक दर्शन कतार, लगभग 20 हज़ार लोगों की सुविधा वाली आवास व्यवस्था, रक्तदान अभियान, भक्तों को मंदिर में सेवा का अवसर देने वाली योजना, आकाशवाणी, एफ.एम. रेडियो, हवाई अड्डे का विकास, स्वच्छ शिर्डी अभियान, विश्वभर के साईं भक्तों को एकजुट करने की योजना जैसे अनेक कार्यक्रम चलाए और उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया।
विदर्भ के एक गाँव से मुंबई आए सुरेश हावरे भाभा परमाणु ऊर्जा केंद्र में 27 वर्षों तक शोधकर्ता रहे। इसके बाद उन्होंने निर्माण क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
एक बार वे शिर्डी दर्शन के लिए गए थे, तब वहाँ की अव्यवस्था और गुंडागर्दी देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि अब शिर्डी में कभी नहीं आएंगे। लेकिन अचानक तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का फोन आया और उनके निर्देशानुसार डॉ. हावरे ने संस्थान के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और उसे बेहद सफलतापूर्वक निभाया।
मंदिर विषय पर डॉ. हावरे की विशेष पकड़ है। ‘मंदिर प्रबंधन’ विषय पर उन्होंने गहन अध्ययनपूर्ण पुस्तक लिखी है। मंदिरों में देश को चैतन्य देने वाली ऊर्जा तो है ही, साथ ही इन मंदिरों में अपार रोजगार के अवसर भी हैं।
प्रबंधन की 5M के नाम से जानी जाने वाली man, machine, material, market और money- ये सभी पाँचों सिद्धांत मंदिर प्रबंधन पर भी लागू होते हैं। इसके अनुसार भारत के मंदिर स्वच्छ, भ्रष्टाचार मुक्त, भक्त-केंद्रित और समाजोपयोगी होने चाहिए, यह डॉ. हावरे का मानना है। उनकी यह पुस्तक कई विश्वविद्यालयों ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल की है। वे इस विषय पर एम.बी.ए. पाठ्यक्रम शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं।
मंदिरों में रुचि रखने वाले और हिंदुत्व पर असीम श्रद्धा रखने वाले एक संवेदनशील वैज्ञानिक का इस समिति में आना निश्चित ही खुशी की बात है। अमरनाथ मंदिर के प्रबंधन मंडल में भी वे कार्यरत हैं।
मेरे लिए खुशी की बात यह है कि मुझे डॉ. हावरे का कई वर्षों तक सान्निध्य मिला है। वे शिर्डी संस्थान के अध्यक्ष थे, तभी उन्होंने मुझे संस्थान की ‘साईंलीला’ पत्रिका के लिए कार्यकारी संपादक नियुक्त किया था। श्री साईं की कृपा से मैं आज भी यह जिम्मेदारी निभा रहा हूँ।
डॉ. हावरे की ‘Temple Management’, ‘In Service of Sai’, ‘BARC Days’, ‘Sai Way’, ‘शिदोरी’, ‘उद्योग संपदा’, ‘उद्योग तुमचा पैसा दुस-याचा’- ये पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। संयोग से, इनमें से हर पुस्तक के लिए अनुवाद या संपादन सहायता करने का अवसर मुझे मिला है।
डॉ. हावरे के कारण सभी रामभक्तों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
![]() |
जय श्री राम 🚩
– भगवान दातार


