सच तो यह है कि धर्मेंद्र प्रधान 6 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे हैं। यह जनादेश हर उस आवाज को जवाब देने के लिए काफी है, जो अब उनके इस्तीफे की भीख मांग रही है। जो लोग इस्तीफा मांग रहे हैं, उनकी संख्या मुश्किल से कुछ हजार है— यानी जिनके पास जनता का कोई समर्थन नहीं, वे ही सबसे ज्यादा शोर मचा रहे हैं।
अगर सच में विपक्षी दलों और इन चमचों में सीधे चुनावी मैदान में उतरने की औकात है, तो वे चुनाव लड़कर दिखाएं। लेकिन नहीं, इन्हें तो दरवाजे के पीछे बैठकर साजिशें रचना और जनादेश को चुनौती देना ही आता है। इनकी हरकतें साफ बताती हैं कि ये अपनी हार स्वीकार नहीं कर सकते।
पेपर लीक का बहाना या इतिहास बदलने की जलन?
NEET और NET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले आए हैं, यह सच है । लेकिन क्या पूरा विरोध सिर्फ इसी वजह से है? नहीं- वास्तविक कारण कहीं और है। सरकार का मानना है कि आंदोलन की क्रेडिबिलिटी खुद ही कमजोर है और इसका राजनीतिकरण हो चुका है।

बात यह है कि धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री रहते हुए NCERT के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव किए हैं— मुगलों और वामपंथी इतिहास को हटाकर भारत के गौरवशाली इतिहास को जगह दी गई है। इस बदलाव से वामपंथी विचारधारा और कांग्रेस-सपा जैसे दल बुरी तरह जल रहे हैं।
जिनसे जनता ने मुंह मोड़ा, वे ही सबसे ज्यादा चिल्ला रहे हैं
जिनके पास जनाधार नहीं, वे ही गालियों और नौटंकी का सहारा लेते हैं। यह कोई जनआंदोलन नहीं, बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक विफलता का आईना है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस संसदीय क्षेत्र से प्रधान चुने गए हैं, वहां के वोटर चुप हैं— इस्तीफा तो एक पागल भीड़ मांग रही है। जनता अपने नेता के साथ है, भले ही मुट्ठीभर दलाल कितना ही शोर क्यों न मचाएं।
खुला चैलेंज
हिम्मत है तो जनता के फैसले को चुनावी मैदान में चुनौती दिखाओ और अपनी औकात दिखाओ। कमेंट बॉक्स खुला है— यहां आकर अपने प्रोपोगेंडा का खंडन करने की कोशिश करो। नहीं तो चुपचाप अपनी गुलामी की दुकान समेट लो।
– मुकेश गुप्ता


Sab ka sab jhoot agar esa hota to aaj desh me kai hjaro scooolo pr tala nhi lgta or rhi baat fir se chunav ki to agar etni himmat h to de do stifa fir vapis jit jana aapni hi janta se vot lekar pr Dharmendra prdhan kayr h vo nhi dega kyoki use pta h ki mere paks me koi nhi h modi ke aalava agar hota to aaj samne aata kha h vo log jo unke sath or agar h to chup kyo h ye protest to tb hi rukegi jb Dharmendra pardhan stifa dega