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Gen Z को आखिर कौन बताएगा कि भारत पहले कैसा था…?

Gen Z को आखिर कौन बताएगा कि भारत पहले कैसा था…?

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, युवा
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1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी को Gen Z कहा जाता है। अर्थात यह वह पीढ़ी है जो मिलेनियल्स (Gen Y) के बाद और Gen Alpha से पहले आती है।

अब एक रोचक तथ्य पर ध्यान दीजिए….

नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला…

उस समय Gen Z का सबसे बड़ा सदस्य लगभग 17 वर्ष का था और सबसे छोटा केवल 2 वर्ष का. आज 2026 में यही पीढ़ी 14 से 29 वर्ष की आयु के बीच है.

यानी जिस उम्र में कोई युवा राजनीति, शासन और देश के विकास को समझना शुरू करता है, उस समय से लेकर आज तक उसने लगभग केवल मोदी सरकार का ही दौर देखा है, उससे पहले का भारत उसके लिए किताबों, समाचारों और दूसरों के अनुभवों तक सीमित है, उसने उस भारत को अपनी आँखों से कभी नहीं देखा.

यही कारण है कि जब कोई Gen Z का युवा पूछता है— “मोदी ने हमारे लिए क्या किया?” तो उसके प्रश्न के पीछे हमेशा दुर्भावना नहीं होती. अक्सर उसके पीछे जानकारी का अभाव होता है.

आख़िर उसे बताएगा कौन कि 2014 से पहले भारत कैसा था….?

क्या हमने कभी उसे बताया कि स्वतंत्रता से लेकर 2014 तक देश में गिने-चुने एम्स थे, जबकि बाद के वर्षों में बड़ी संख्या में नए एम्स स्वीकृत किए गए….?

क्या हमने उसे बताया कि 2014 तक देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या सीमित थी, जबकि उसके बाद सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित या स्वीकृत हुए….?

क्या हमने बताया कि एमबीबीएस और पीजी मेडिकल सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि हुई, जिससे लाखों छात्रों के लिए डॉक्टर बनने के अवसर बढ़े….?

क्या हमने बताया कि नए IIT, IIM, विश्वविद्यालय और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए गए, ताकि उच्च शिक्षा का विस्तार केवल कुछ महानगरों तक सीमित न रहे….?

क्या हमने समझाया कि राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क अभूतपूर्व गति से बढ़ा, ग्रामीण सड़कों ने लाखों गाँवों को जोड़ा, एक्सप्रेसवे बने, सुरंगें बनीं, पुल बने, और जिन इलाकों तक पहुँचना कभी कठिन था, वहाँ आज यात्रा कहीं अधिक आसान हो चुकी है.

लेकिन इन आँकड़ों से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण एक सवाल है….

क्या Gen Z को पता है कि कभी भारतीय रेल के डिब्बों से मानव मल सीधे पटरियों पर गिरता था….?

आज के युवाओं को यह सुनकर शायद विश्वास भी न हो क्योंकि उन्होंने तो वही रेलवे देखी है जहाँ जैव-शौचालय हैं, आधुनिक स्टेशन हैं, ऑनलाइन टिकट है, मोबाइल पर सीट की जानकारी है और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें देश की पहचान बन चुकी हैं.

क्या किसी ने उन्हें बताया कि एक समय रेलवे टिकट के लिए घंटों लाइन लगती थी. दलालों का बोलबाला था और यात्रा का अनुभव आज जैसा नहीं था.

अब डिजिटल भारत की बात करते हैं….

आज भारत में एक छोटा दुकानदार हो, सब्ज़ी वाला हो, चाय वाला हो या रिक्शा चालक— हर किसी के पास QR कोड दिखाई देता है. ₹10 की चाय से लेकर लाखों रुपये तक का भुगतान मोबाइल से हो जाता है.

लेकिन जब डिजिटल भुगतान की बात शुरू हुई थी, तब उसका मज़ाक उड़ाया गया था.

सवाल पूछा गया था— गाँवों में इंटरनेट कहाँ है…. किसान डिजिटल भुगतान कैसे करेगा…. सब्ज़ी वाला मशीन कहाँ से लाएगा…. चाय वाला मोबाइल से भुगतान कैसे लेगा….?

आज वही भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उदाहरण बन चुका है.

UPI, DigiLocker, Direct Benefit Transfer, आधार आधारित सेवाएँ, ऑनलाइन बिल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, यह सब आज की पीढ़ी को सामान्य लगता है,

लेकिन यह हमेशा से सामान्य नहीं था.

क्या Gen Z को पता है कि कभी करोड़ों परिवारों के पास शौचालय तक नहीं था….?

क्या उसे पता है कि करोड़ों महिलाएँ धुएँ से भरे चूल्हों पर खाना बनाती थीं….?

क्या उसे पता है कि करोड़ों लोगों के बैंक खाते नहीं थे….?

क्या उसे बताया गया कि जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जन औषधि केंद्र, हर घर जल, मुफ्त राशन और किसानों के खातों में सीधे सहायता राशि भेजने जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों के जीवन को प्रभावित किया….?

शायद नहीं…

क्योंकि उसने केवल परिणाम देखे हैं, संघर्ष नहीं…

उसे यह भी शायद नहीं बताया गया कि….

अनुच्छेद 370 हटाया गया….

तीन तलाक कानून लागू हुआ….

काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास हुआ….

केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण हुआ….

अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ….

कर्तव्य पथ विकसित हुआ….

चिनाब पुल जैसे इंजीनियरिंग चमत्कार बने….

भूपेन हजारिका सेतु जैसे विशाल पुल देश को मिले….

वंदे भारत ट्रेनें शुरू हुईं….

रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण हुआ….

रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण और विद्युतीकरण तेज़ हुआ….

भारतमाला परियोजना आगे बढ़ी….

FASTag ने टोल प्लाज़ा की लंबी कतारों को कम किया….

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने घरेलू विनिर्माण को नई दिशा देने का प्रयास किया….

मोबाइल फोन निर्माण से लेकर रक्षा उत्पादन तक भारत ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए….

ड्रोन तकनीक को बढ़ावा मिला….

तेजस जैसे स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म पर ज़ोर दिया गया….

क्या Gen Z को यह भी पता है कि एक समय भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चर्चा का सबसे बड़ा विषय हुआ करता था….?

2G….

कॉमनवेल्थ गेम्स….

कोयला आवंटन….

अगस्ता वेस्टलैंड….

आदर्श….

नेशनल हेराल्ड….

ऐसे अनेक मामले वर्षों तक सुर्खियों में रहे….

आज की पीढ़ी ने इनमें से अधिकांश घटनाएँ केवल सोशल मीडिया पोस्टों में पढ़ी हैं…. उन्होंने वह समय नहीं जिया….

क्या उन्हें यह भी याद दिलाया गया कि एक दौर ऐसा था जब देश के अलग-अलग शहरों में सिलसिलेवार बम धमाकों की खबरें बार-बार आती थीं….?

दिल्ली…. मुंबई…. जयपुर…. हैदराबाद…. वाराणसी…. बेंगलुरु…. असम ….. इन शहरों के नाम केवल पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि आतंकी हमलों के कारण भी सुर्खियों में आते थे !

26/11 का मुंबई हमला केवल एक घटना नहीं था, वह पूरे देश की चेतना को झकझोर देने वाला क्षण था!

नई पीढ़ी ने वह डर महसूस नहीं किया और यह अच्छी बात है.

समस्या यह है कि Gen Z को मोदी सिर्फ राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाते और “जय श्री राम” का जाप करते हुए ही दिखते हैं।

अगर हम उन्हें समझाएं कि यह देश पहले कैसा था और इस मुकाम तक कैसे पहुंचा, तो वे समझ जाएंगे। हमने इसे समझाने का प्रयास नहीं किया है, इसीलिए प्रदर्शनकारी और धार्मिक कट्टरपंथी उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं… वे सत्ता खोने के बाद निराश विपक्ष का रोना सुन रहे हैं। हमने न सिर्फ उन्हें यह नहीं बताया कि वे नेता कितने धोखेबाज और अक्षम हैं, बल्कि हमने अपनी उपलब्धियों के बारे में भी उन्हें बताने की जहमत नहीं उठाई। अब इसमें बदलाव होना चाहिए।

जब वे पूछते हैं, “मोदी ने हमारे लिए क्या किया है?”, तो उन्हें इन चीज़ों की कोई जानकारी नहीं होती:

1. गैस सिलेंडर
2. ऑनलाइन बिल भुगतान
3. यूपीआई भुगतान
4. डिजीलॉकर
5. जन औषधि केंद्र
6. आयुष्मान कार्ड
7. नया संसद भवन
8. मुफ्त टीकाकरण
9. प्रधानमंत्री जन धन योजना
10. सर्जिकल स्ट्राइक
11. ऑपरेशन सिंदूर
12. तीन तलाक विधेयक
13. आधार लिंकिंग
14. फास्टैग
15. चिनाब पुल
16. जम्मू सुरंग
17. गंगा एक्सप्रेसवे
18. काशी कॉरिडोर
19. विश्वनाथ कॉरिडोर
20. केदारनाथ पुनर्निर्माण
21. श्री राम मंदिर निर्माण
22. सुकन्या समृद्धि योजना
23. शौचालयों का निर्माण
24. रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण
25. रेलवे स्टेशनों का विकास
26. टिकट बुकिंग के दिनों में कमी
27. टिकट रद्द करने की सुविधा
28. स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना
29. भारतमाला परियोजना
30. 18 एम्स का निर्माण
31. एसआईआर
32. महात्मा गांधी सेतु का पुनर्निर्माण
33. भूपेन हजारिका सेतु
34. रक्षा आधुनिकीकरण
35. मेक इन इंडिया
36. ड्रोन क्रांति
37. किसानों के खातों में सीधे धन हस्तांतरण
38. राशन का डिजिटलीकरण
39. मुफ्त राशन
40. कन्या सुमंगला योजना
41. जीएसटी का कार्यान्वयन
42. जीएसटी में बड़ी रियायतें
43. सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
44. तालाबों/जल निकायों का निर्माण
45. हर घर नल से जल
46. 22 घंटे का अवकाश बिजली
47. अभूतपूर्व आयकर राहत
48. अनुच्छेद 370 का निरसन
49. 553 नए रेलवे स्टेशन
50. 1500 से अधिक नए ओवरब्रिज
51. 200 से अधिक अप्रचलित कानूनों को हटाना
52. भ्रष्ट व्यक्तियों के खिलाफ ईडी की रिकॉर्ड तोड़ छापेमारी
53. फास्टैग पर ₹3,000 की 3 साल की छूट
54. ईवीएम में वीवीपीएटी का कार्यान्वयन
55. कर्तव्य पथ का मार्ग
56. करेंसी नोटों पर सांस्कृतिक विरासत के चित्र
57. नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण
58. तेजस का स्वदेशी उत्पादन
59. मोबाइल फोन निर्माण में आत्मनिर्भरता
60. मुद्रा योजना
61. उज्ज्वला योजना
62. सुरक्षा बीमा
63. 390 नए विश्वविद्यालय
64. 7 नए आईआईटी
65. 7 नए आईआईएम
66. 16 नए तृतीय स्तरीय विश्वविद्यालय (आईआईटी)
67. 300 नए मेडिकल कॉलेज
68. पंबन पुल का निर्माण
69. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना
70. उत्तराखंड चार धाम सड़क निर्माण
71. ब्रह्मोस निर्माण कारखाना
72. अमेठी में असॉल्ट राइफल निर्माण
73. वंदे भारत की आधुनिक ट्रेनें
74. वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से संबंधित कानून
75. रेलवे में जैव-शौचालन
76. श्रमिक कल्याण के लिए श्रम कानूनों का कार्यान्वयन
77. ग्राम जी योजना का कार्यान्वयन
78. सड़क निर्माण में भारत का चीन से आगे निकलना
79. 12 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान करना
80. 8 लाख से अधिक वाणिज्यिक लाइसेंस जारी करना
81. 80,000 नए पेट्रोल पंप
82. शौर्य स्थल का निर्माण
83. रेलवे बजट का आम बजट में विलय
84. 9,000 से अधिक नए स्कूल
85. अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई
86. अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बाड़ लगाना
87. आतंकवाद के खिलाफ सशस्त्र बलों को खुली छूट
88. विकास कौशल योजना
89. नोटबंदी
90. टोल गेट पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने वाली फास्टैग सुविधा
91. चंद्रयान
92. मंगलयान (मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला मिशन)
93. बहु-उपग्रह स्थिरता
94. बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कमी
95. कतारों का अंत
96. स्मार्ट सिटी विकास
97. किसानों के लिए नीम लेपित यूरिया
98. पीएफ निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना
99. निजी और घरेलू क्षेत्रों में 5 करोड़ से अधिक नए रोजगारों का सृजन

उसे यह महसूस ही नहीं होता कि इन व्यवस्थाओं तक पहुँचने में वर्षों की नीतियाँ, फैसले और प्रशासनिक परिवर्तन लगे हैं.

यही कारण है कि आज आवश्यकता केवल सरकार की उपलब्धियाँ गिनाने की नहीं है बल्कि नई पीढ़ी को भारत की यात्रा समझाने की है.

उसे यह बताना होगा कि विकास केवल एक दिन में नहीं होता, वह दशकों की चुनौतियों, निर्णयों और निरंतर प्रयासों का परिणाम होता है.

उसे यह भी जानना चाहिए कि लोकतंत्र में किसी भी सरकार की आलोचना करना उसका अधिकार है, लेकिन किसी भी सरकार का मूल्यांकन करते समय उसे यह भी पता होना चाहिए कि वह देश किस स्थिति से चलकर आज यहाँ तक पहुँचा है.

यदि नई पीढ़ी को केवल वर्तमान दिखेगा और अतीत नहीं तो वह परिवर्तन की वास्तविक गति को कभी नहीं समझ पाएगी.

आज का भारत वही भारत नहीं है जिसे 2014 से पहले की पीढ़ी ने देखा था….

इसीलिए Gen Z के सामने केवल एक प्रश्न नहीं होना चाहिए कि “आज क्या है?”

उसे यह भी पूछना चाहिए….

“पहले क्या था…. और आज यहाँ तक पहुँचने का सफ़र कैसे तय हुआ….?”

क्योंकि जब इतिहास का संदर्भ समझ में आता है, तभी वर्तमान का मूल्य भी समझ आता है…

– पारुल सहगल ‘साथी’

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