भारत की संस्कृति में सावन मास अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह भगवान शिव की आराधना का महीना है। इस समय प्रकृति भी नई होती है। बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है और शरीर की पाचन शक्ति कुछ कमजोर पड़ जाती है। इसलिए सावन में आहार की थाली को सात्विक, हल्का और शुद्ध रखना बहुत जरूरी है। सही आहार न केवल स्वास्थ्य की रक्षा करता है बल्कि आध्यात्मिक साधना में भी मदद करता है।
सावन की थाली का मूल सिद्धांत सात्विकता है। सात्विक भोजन वह होता है जो मन को शांत, शरीर को हल्का और आत्मा को शुद्ध रखे। इस माह में मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और बहुत अधिक मसाले वाले भोजन से परहेज करना चाहिए। ये सभी तामसी या राजसी गुण वाले माने जाते हैं जो मन में अशांति और शरीर में भारीपन पैदा करते हैं। इसके स्थान पर दूध, दही, घी, फल, सब्जियां, अनाज और दालों पर आधारित थाली रखनी चाहिए।

सावन की आदर्श थाली में मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें शामिल हो सकती हैं। सुबह के नाश्ते में फल, दूध या छाछ लेना अच्छा रहता है। केला, सेब, पपीता, अनार और मौसमी फल शरीर को आवश्यक विटामिन देते हैं। दोपहर के भोजन में रोटी या चावल, मूंग या अरहर की दाल, लौकी, तोरई, भिंडी या पालक जैसी हल्की सब्जी और थोड़ा सा दही होना चाहिए। रात का भोजन और भी हल्का रखें। फल या दूध-सेब का सेवन पर्याप्त होता है। सोमवार के व्रत के दिन कई लोग केवल फल, दूध या साबूदाना, सिंहारे के आटे की चीजें खाते हैं।
मानसून के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए भोजन हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए। कच्चा पानी न पिएं। उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही उपयोग करें। हरी पत्तेदार सब्जियां अच्छी तरह धोकर ही पकाएं। बाहर का भोजन पूरी तरह बंद कर दें क्योंकि स्वच्छता का ध्यान रखना मुश्किल होता है। घी का सीमित उपयोग करें। बहुत अधिक तला-भुना भोजन पाचन को बिगाड़ सकता है।
सावन में उपवास रखने की परंपरा भी है। उपवास शरीर की सफाई करता है और मन को एकाग्र बनाता है। लेकिन उपवास के नाम पर शरीर को कमजोर नहीं करना चाहिए। फलाहार या दूध-फल का सेवन करके ऊर्जा बनाए रखें। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है वे डॉक्टर की सलाह लेकर ही व्रत रखें।

आदर्श थाली का एक उदाहरण इस प्रकार हो सकता है – दो रोटी, एक कटोरी मूंग दाल, लौकी की सब्जी, थोड़ा सा चावल, दही और ककड़ी-गाजर का सलाद। साथ में एक फल। यह थाली संतुलित, पौष्टिक और सात्विक है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और फाइबर तीनों मिल जाते हैं।
सावन का महीना सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं है बल्कि स्वास्थ्य सुधार का भी अवसर है। जब हम सात्विक थाली अपनाते हैं तो शरीर हल्का महसूस होता है, मन शांत रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बारिश के मौसम में यह आहार पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
अंत में यह कहना सही होगा कि सावन में आहार की थाली सादी, शुद्ध और संतुलित होनी चाहिए। भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ शरीर की सेवा भी करनी चाहिए। सही आहार अपनाकर हम सावन को स्वास्थ्यवर्धक और आनंदमय बना सकते हैं। शुद्ध भोजन शुद्ध विचार पैदा करता है और शुद्ध विचार जीवन को ऊंचा उठाता है। यही सावन मास का सच्चा संदेश है।

