सुबह उठते ही मुंह से हल्की दुर्गंध आना आम बात है। रात में सोते समय मुंह में लार कम बनती है, इसलिए बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और सुबह की साँस में गंध महसूस हो सकती है। लेकिन यदि ब्रश करने, कुल्ला करने और जीभ साफ करने के बाद भी दुर्गंध दिनभर बनी रहे, तो इसे केवल शर्मिंदगी या सामाजिक असुविधा की बात मानकर टालना ठीक नहीं है।
चिकित्सा भाषा में इस समस्या को हैलिटोसिस कहा जाता है। अक्सर लोग मुंह की दुर्गंध को पेट की गड़बड़ी से जोड़ देते हैं, जबकि अधिकतर मामलों में इसका कारण पेट नहीं बल्कि मुंह ही होता है। दाँतों के बीच फँसे भोजन के छोटे-छोटे कण, जीभ पर जमी सफेद या पीली परत, मसूड़ों की सूजन, कैविटी, संक्रमित दाँत या मुंह की सफाई में कमी— ये सभी दुर्गंध के सामान्य कारण हो सकते हैं। मिंट, इलायची, च्युइंग गम या माउथवॉश कुछ समय के लिए गंध को ढक सकते हैं, लेकिन असली समाधान तभी होगा जब मूल कारण को पहचाना और ठीक किया जाए।
हमारे मुंह में स्वाभाविक रूप से अनेक प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं। जब भोजन के कण दाँतों के बीच, मसूड़ों के पास या जीभ की सतह पर रह जाते हैं, तो बैक्टीरिया उन्हें तोड़ने लगते हैं। इस प्रक्रिया में बदबू पैदा करने वाली गैसें बन सकती हैं। जीभ का पिछला हिस्सा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहाँ भोजन के सूक्ष्म कण, मृत कोशिकाएँ और बैक्टीरिया आसानी से जमा हो जाते हैं। इसलिए केवल दाँतों पर ब्रश कर लेना पर्याप्त नहीं है; जीभ साफ करना भी रोज की आदत होनी चाहिए।

दुर्गंध तब भी बढ़ सकती है जब मुंह बार-बार सूखता हो। कम पानी पीना, लंबे समय तक भूखे रहना, बहुत सख्त डाइटिंग, कुछ दवाएँ, अधिक कॉफी या शराब का सेवन तथा धूम्रपान मुंह को सूखा कर सकते हैं। प्याज, लहसुन और बहुत तीखे मसालों वाले भोजन से भी कुछ समय तक साँस में गंध आ सकती है। जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स, खट्टी डकार, सीने में जलन, बार-बार साइनस की समस्या या नाक से गले में बलगम गिरने की शिकायत रहती है, उनमें भी दुर्गंध बनी रह सकती है।
मुंह की दुर्गंध से बचने के लिए सबसे जरूरी है सही और नियमित सफाई। दिन में कम से कम दो बार, लगभग दो मिनट तक किसी भरोसेमंद टूथपेस्ट से हल्के हाथों से ब्रश करें। बहुत जोर से ब्रश करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे मसूड़ों को नुकसान हो सकता है। दाँतों के बीच जमा मैल को हटाने के लिए रोज एक बार फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का उपयोग करना उपयोगी है। साधारण ब्रश दाँतों के बीच की संकरी जगहों को पूरी तरह साफ नहीं कर पाता है।
रोजाना जीभ को टंग क्लीनर या मुलायम ब्रश से धीरे-धीरे साफ करें। जीभ को बहुत जोर से रगड़ने से जलन हो सकती है, इसलिए सफाई हल्के हाथ से करें। दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी आवश्यक है, क्योंकि पानी मुंह को नम रखता है और भोजन के कणों को हटाने में सहायता करता है। भोजन के बाद सादे पानी से कुल्ला करना एक सरल लेकिन अच्छी आदत है।
यदि प्याज, लहसुन, कॉफी या मसालेदार भोजन लिया हो, तो पानी से कुल्ला करें। ऐसी स्थिति में शुगर-फ्री च्युइंग गम थोड़ी देर के लिए मदद कर सकती है, क्योंकि इससे लार अधिक बनती है और मुंह का सूखापन कम होता है। लेकिन इसे ब्रश और सफाई का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
जो लोग डेंचर, रिटेनर या ब्रेसेज़ पहनते हैं, उन्हें उनकी रोज सफाई करनी चाहिए। डेंचर को रात में निकालकर अच्छी तरह साफ रखना जरूरी है, क्योंकि उसमें जमे भोजन-कण और बैक्टीरिया दुर्गंध का कारण बन सकते हैं। धूम्रपान और तंबाकू से भी दूर रहना चाहिए। ये न केवल बदबू बढ़ाते हैं, बल्कि मसूड़ों, दाँतों और मुंह के अंदरूनी हिस्सों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
माउथवॉश का उपयोग सहायक हो सकता है, खासकर जब दंत चिकित्सक किसी एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश की सलाह दें। फिर भी माउथवॉश को ब्रश, फ्लॉस और जीभ की सफाई का विकल्प नहीं मानना चाहिए। जिन लोगों का मुंह बार-बार सूखता है, उन्हें अल्कोहल वाले माउथवॉश से परेशानी बढ़ सकती है।
यदि दो से तीन सप्ताह तक नियमित सफाई और पर्याप्त पानी पीने के बाद भी दुर्गंध कम न हो, तो दंत-चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। वे कैविटी, मसूड़ों की बीमारी, दाँत के संक्रमण, पस, डेंचर की फिटिंग या जीभ की किसी असामान्य परत जैसी समस्याओं को पहचान सकते हैं।
मसूड़ों से बार-बार खून आना, सूजन बने रहना, दाँत में दर्द, दाँत हिलना, पस आना, बहुत अधिक मुंह सूखना, गले में लगातार दर्द, टॉन्सिल की परेशानी, नाक से लगातार बलगम गले में गिरना, खट्टी डकार या सीने में जलन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि वजन घट रहा हो, निगलने में कठिनाई हो या कोई असामान्य समस्या लंबे समय से बनी हुई हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
एक सरल दिनचर्या अपनाई जा सकती है— सुबह ब्रश करें और जीभ साफ करें, भोजन के बाद पानी से कुल्ला करें और रात को सोने से पहले ब्रश के साथ फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का उपयोग करें। समय-समय पर दंत-चिकित्सक से जांच भी कराते रहें।
साँस की दुर्गंध शर्मिंदगी की बात नहीं है। यह अक्सर इस बात का संकेत होती है कि मुंह को थोड़ी अधिक देखभाल की जरूरत है। नियमित सफाई, पर्याप्त पानी, तंबाकू से दूरी और सही समय पर दंत-चिकित्सक की सलाह से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बातचीत में आत्मविश्वास भी वापस आ सकता है।
– सुभाष चंद्र लखेड़ा

