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                                आंबेडकरी विचारक,अध्येता व लेखक श्री एस.एस.यादव

सांसद श्री गोपाल शेट्टी के प्रयासों से इसी माह मुंबई के शताब्दी रुग्णालय में महामानव डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है। इस संदर्भ में प्रस्तुत है आंबेडकरी विचारक, अध्येता व लेखक श्री एस. एस. यादव से आंबेडकर, आरक्षण, मोदी सरकार के दलितों के पक्ष में कार्य, दलित वर्ग और माओवादी, भीमा-कोरेगांव घटना    आदि पर हुई विस्तृत बातचीत के सम्पादित अंशः

डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर के प्रति आपके भाव स्पष्ट कीजिए।

डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर के बिना हमारा जीवन शून्य है। डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से हमारा जीवन व्याप्त है। उनके विचार, उनकी सीख हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं।

डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर के कौन से विचार दलित समाज और पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं?

पूरे भारत वर्ष में पिछड़ी जातियों का जो समाज है उनके कल्याण का मार्ग डॉ.बाबासाहेब ने दिखाया और इस तरह से कार्य किया कि सभी पिछड़ी जातियों के लोगों का भविष्य उज्ज्वल हो। और वैसा हुआ भी है। मैं खुद अपना उदाहरण देता हूं। मैं झोपड़पट्टी में रहने वाला हूं। आज मैंने जो इतने काम किए, इतना नाम कमाया वह सब डॉ.बाबासाहेब की देन है। मैंने डॉ.बाबासाहेब के साथ काम नहीं किया। मैंने उन्हें देखा भी नहीं। उनके सानिध्य में नहीं आ सका। लेकिन, मैंने उनकी जीवनी पढ़ी है। उससे मैंने अपने जीवन को दिशा दी और मैं यहां तक आ गया हूं। मैं आज जो भी हूं वह तो सिर्फ और सिर्फ डॉ.बाबासाहेब  के विचारों की देन हूं।

डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर संविधान के निर्माता हैं। उनके बनाए संविधान के संदर्भ में आप क्या सोचते हैं?

डॉ.बाबासाहेब को अवसर मिला संविधान लिखने का और उस अवसर का उन्होंने अच्छी तरह से उपयोग किया। उनका लक्ष्य था अपने पीड़ित समाज को ऊपर उठाने का। चूंकि प्राकृतिक संसाधन पिछड़ों के हाथ में नहीं थे अतः उनकी आर्थिक उन्नति होना भी संभव नहीं था। और अगर आर्थिक उन्नति नहीं होती है तो सामाजिक उन्नति कोई माने नहीं रखती। इसलिए डॉ. बाबासाहेब ने संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया। उसका फल दिखने लगा है। आज मैं जहां हूं वह मात्र आरक्षण की वजह से हूं।

डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान निर्माता के रूप में देश को योगदान आप किस प्रकार से आंकते हैं?

भारत बहुत सारी छोटी-छोटी रियासतों में बंटा हुआ था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने सब को एक किया। हर रियासत का इतिहास, उनकी संस्कृतियां अलग-अलग थे, फिर भी वे एक हुए। इन सब को एक सूत्र में पिरोने में संविधान बहुत कारागर साबित हुआ है। पूरे भारत का एक संविधान, समान कानून होने से हर भारतीय एक दूसरे के भाई-बहन हो गए। मेरी राय में संविधान के रूप में डॉ. बाबासाहेब का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान है। चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम हो, ईसाई हो, बौद्ध हो- लेकिन सब मिल कर अपने को भारतीय कहते हैं। यह देश और हम सब के लिए गर्व की बात है। भाईचारे और राष्ट्रीयता की इस भावना को बनाने में  डॉ. बाबासाहब का बनाया संविधान बहुत उपयोगी रहा है। समता, न्याय, बंधुत्व ये तीन चीजें संविधान ने हमें दीे हैं।

संविधान को लेकर, खासकर आरक्षण के मुद्दे पर, समाज में विभाजन करने का भी प्रयास हमेशा चलता है। आप इस संदर्भ में डॉ.बाबासाहेब के विचारों से अवगत हैं। आप क्या सोचते हैं?

कुछ लोग कहते हैं कि संविधान में यह बदलना चाहिए, वह बदलना चाहिए। परंतु उनके मन में आया इसलिए संविधान नहीं बदलेगा। समय की आवश्यकता के अनुसारे थोड़े बदलाव होते हैं। पर संविधान का समता, न्याय और बंधुत्व का मूल ढ़ांचा किसी भी हालत में नहीं बदलेगा। बाबासाहब ने भी कहा है कि जरूरत के अनुसार बदलाव भी आवश्यक होंगे।

राजनीतिक क्षेत्र में अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि नरेंद्र मोदी, संघ परिवार और भाजपा संविधान को तोड़ना-मरोड़ना चाहते हैं, संविधान में परिवर्तन लाना चाहते हैं। इस बारे में आपके विचार क्या है?

मोदी जी के बारे में कह सकता हूं कि उन्होंने बार-बार कहा है कि संविधान से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। हमें उनकी बातों पर विश्वास रखना चाहिए। अतः भाजपा का प्रश्न नहीं है।

मोदी सरकार के माध्यम से समाज के पीड़ित वर्गों के लिए, आर्थिक रूप से पिछडे वर्गों के लोगों के लिए किस प्रकार का कार्य हो रहा है? क्या कोई अच्छा कार्य हो रहा है?

पिछली कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने घोषणाएं बहुत कीं, परंतु उन पर अमल नहीं हुआ। इसलिए योजनाएं भले अच्छी हो लेकिन पिछड़ों को उसका कोई लाभ नहीं हुआ। मोदी सरकार ने उन्हीं योजनाओं पर पूरी ताकत से अमल शुरू किया। पिछड़े वर्गों को अब इसका लाभ होने वाला है। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने घोषणाओं की आतिशबाजी की, हमारे मुंह पर योजनाएं फेंक दीं, पर प्रत्यक्ष में अमल नहीं किया। मोदी सरकार उस पर पूरे जोरशोर से अमल कर रही है। हमारा समाज अब मोदी सरकार को क्यों मानता है? एक मिसाल देता हूं। यूपीए के काल में मुंबई के इंदु मिल की जमीन डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारक के लिए सरकार अधिग्रहीत कर सकती थी, लेकिन उन्होंने वैसा नहीं किया। भाजपा की सरकार आते ही उन्होंने वह जमीन अपने अधिकार में ली और स्मारक का बड़ा प्रकल्प शुरू किया। दिल्ली में डॉ.बाबासाहब का बहुत बड़ा स्मारक मोदी सरकार के कार्यकाल में ही बना। यह सब यूपीए सरकार भी कर सकती थी; लेकिन उन्होंने नहीं किया, शायद उनकी वैसी इच्छा न होगी। भाजपा सरकार की वैसी दृढ़ इच्छा थी और उन्होंने जबानी जमाखर्च के बजाय उसे प्रत्यक्ष में कर दिखाया।

ऐसा कहा जाता है दलित आंदोलन में माओवादी घुस रहे हैं। उसका असर भी दिखाई दे रहा है। आप क्या सोचते हैं?

हम आरपीआय वाले माओवादियों, नक्सलियों का पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं। उनके बारे में किसी तरह की सहानुभूति भी नहीं है। डॉ. बाबासाहेब कम्युनिज्म के बिलकुल खिलाफ थे। हम भी माओवाद, कम्युनिज्म, नक्सलियों के खिलाफ हैं। हमें ये विचारधाराएं बिलकुल स्वीकार नहीं है। अहिंसा सत्य धर्म है। सबसे बड़ा धर्म है। हिंसा से कुछ भी हासिल नहीं हो सकता है। दूसरी बात यह कि इन माओवादियों को लड़ाके चाहिए। लड़ने वाला तो दलित समाज का ही होता है। इसलिए उन्होंने दलित समाज पर ध्यान केंद्रित किया है। हम युवकों से कहते हैं कि बाबासाहेब का बताया मार्ग ही हमारी प्रगति के लिए उचित है। माओवाद और नक्सलवाद से हमारा कुुछ भला नहीं होने वाला है।

आरक्षण के संदर्भ में बाबासाहेब के विचार क्या थे?

भारत में आरक्षण सबसे पहले शाहू महाराज ने शुरू किया। पूरे भारत के लिए बाबासाहेब ने शुरू किया। आरक्षण ये हमारा पहला साधन है। उस साधन से हम अपनी उन्नति कर सकते हैं। आरक्षण केवल दस साल के लिए था, यह बात गलत है। राजनीतिक आरक्षण पर दस साल की सीमा है। लेकिन, गुमराह किया जाता है कि बाबासाहेब ने दस साल के लिए ही आरक्षण का प्रावधान किया था। मैंने बाबासाहेब को बहुत पढ़ा है, लेकिन मेरे पढ़ने में ऐसी कोई समय सीमा नहीं आई।

आप अपने कार्य और अपने कर्तृत्व के बारे में परिचय देंगे?

मेरा अपना ऐसा कोई ज्यादा काम नहीं है। पैंथर के जमाने से मैं पैंथर का सदस्य रहा हूं। मैंने कभी नहीं सोचा नेता बनूं। ढाले, ढसाल, आठवले हम दस जनों को पकड़ कर रखा था।  दस दिन अंदर थे। उस काल में हमारे समाज में बहुत अन्याय हुआ था। उस वक्त हम पूरी व्यवस्था के खिलाफ लड़ते रहे। फिर भी हमने कम्युनिस्टों को साथ नहीं लिया। अपनी लड़ाई हम खुद लड़ते रहे।

आप 50 सालों से दलित आंदोलन से जुड़े हैं। उन 50 सालों के आपके कार्यों के बारे में जानकारी दीजिए।

मैं साहित्य के बारे में बोलूंगा। आर्थिक नीति, उदारीकरण, वैश्वीकरण का नया विचार सामने आया तब मैंने दलितों के नजरिये से अध्ययन किया। इससे मेरी राय बनी कि उदारीकरण से प्राकृतिक संसाधन दलितों के हाथ से छूटने वाले हैं। उसका उपयोग दलितों को नहीं होने वाला है। पूंजीवादियों को ही ज्यादा फायदा होने वाला है। और, वहीं हुआ है।

आपकी साहित्य निर्मिति के बारे में बताइए?

मैं सटीक लेख लिखता था। एक विषय हर हफ्ते- जैसेे बैंक ॠण, प्राकृतिक संधाधन आदि। लोकसत्ता में 250 लेख प्रकाशित हुए हैं। उन पर प्रतिक्रियाएं भी आती थीं। मैं जो लिखता था वह गरीबों के लिए लिखता था।

गोपाल शेट्टी जी शताब्दी रुग्णालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण दिसंबर महीने में कर रहे हैं। आपकी राय?

ये मेरे लिए गर्व की बात है। ऐसा होना ही चाहिए। शेट्टी साहब जो कर रहे हैं वह बहुत अच्छी बात है। हमारा पूरा समाज उनके साथ होगा। नाम तो है डॉ. आंबेडकर शताब्दी रुग्णालय। नाम के साथ प्रतिमा भी हो तो घी में शक्कर!

गोपाल शेट्टी ने अपने कार्यक्षेत्र में पिछड़े समाज के हित में किस प्रकार कार्य किया है, योगदान दिया है?

हम गोपाल शेट्टी साहब के कार्यों से बहुत खुश हैं कि वे हमारे समाज के लिए काम करते हैं। यह हमारे लिए अच्छी बात है। हम चाहते हैं कि आगे के पांच साल भी वही सांसद रहे। गोपाल शेट्टी बड़े अच्छे व्यक्ति हैं। जो भी उनके पास जाता है उसका काम करते हैं। यह उनकी खासियत है।

2019 के चुनावों के बारे में आपकी राय क्या है?

मैं मानता हूं कि 2014 जैसा स्पष्ट बहुमत शायद ही मिले। सत्ता में जो होता है उसके खिलाफ स्वर होते हैं। अच्छा है या बुरा है यह बात अलग है। इसका थोड़ा सा नुकसान भाजपा को हो सकता है। मगर फिर भी बहुमत भाजपा को ही मिलेगा। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कदम उठाए और नए-नए सुधार किए वे लोगों को पसंद आए हैं। लोग इतने बेवकूफ नहीं हैं कि कांग्रेस ने अपने राज में क्या किया उसे भूल जाएं।

आपकी राय में पिछड़ा वर्ग, दलित वर्ग, आर्थिक दृष्टि से दुर्बल वर्ग 2019 के चुनाव के संदर्भ में भाजपा के बारे में क्या सोचता है?

अभी पुणे में जो घटना हुई उसमें हमारी लोगों को बहुत मार पड़ी है। इस घटना के खिलाफ मैं खुद खड़ा हुआ। यह भाजपा के खिलाफ नहीं था, अन्याय के खिलाफ था।

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