पुणे: व्यक्तिचित्रण एक आकर्षक साहित्य विधा है। मराठी साहित्य में भी इस साहित्य विधा की एक महान परंपरा रही है। श्री तात्या जोगलेकर द्वारा लिखित ‘आठवण, साठवण’ नामक व्यक्तिचित्रणात्मक पुस्तक से संघ के मूल्यों को जीकर दिखाने वाले कई कार्यकर्ताओं की पहचान होती है, यह मनोगत राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने व्यक्त किया।
संघ के वरिष्ठ प्रचारक उदय उपाख्य तात्या जोगलेकर द्वारा लिखित ‘आठवण व्यक्तींची, साठवण प्रसंगांची’ पुस्तक का विमोचन रा. स्व.संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये के करकमलों द्वारा किया गया। ‘कौशिक आश्रम’ की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिदेशक अतुलचंद्र कुलकर्णी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। संघ के पश्चिम क्षेत्र के प्रचार प्रमुख प्रमोद बापट की इस अवसर पर प्रमुख उपस्थिति थी।

“संघ का प्रचारक समाज में रहकर काम करता है, इसलिए उसे हर प्रकार के लोग मिलते हैं। इन सभी के अनुभव वह एक प्रचारक के रूप में लेता है। संघ कार्य बहुत विलक्षण कार्य होने के कारण समाज के साथ संघ प्रचारक का नाता जुड़ जाता है। संघ कार्य एक पारिवारिक कार्य होने का अनुभव उसे मिलता है,” ऐसा रा. स्व.संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने कहा।
“संघ कार्यकर्ता जब लिखता है, तब उसके व्यक्तिचित्रण को उसके ध्येयनिष्ठ जीवन का भी स्पर्श होता है। तात्या जोगलेकर के लेखन का यह धागा पुस्तक पढ़ते समय मन को निश्चित रूप से भाता है,” ऐसा भी लिमये जी ने बताया।
‘आठवण, साठवण’ इस पुस्तक से संघ किस पद्धति से काम करता है, संघ किस पद्धति से कार्यकर्ता गढ़ता है, इसकी पहचान तो होती ही है। इसके साथ ही इस पुस्तक के वाचन से आगे की दिशा भी हमें मिलती है। इस पुस्तक के सभी व्यक्तिचित्रण पढ़ने के बाद संघ का एक सुंदर बड़ा चित्र तैयार होता है। संघ का प्रतिबिंब समझ में आता है। इस पुस्तक के वाचन से संघ के पुनःप्रत्यय का आनंद मिला, ऐसा मनोगत अतुलचंद्र कुलकर्णी ने व्यक्त किया।
तात्या जोगलेकर द्वारा किया गया व्यक्तिचित्रण और प्रसंग चित्रण मन को जैसा भाता है, वैसे ही यह पुस्तक पढ़ने के बाद भी ये व्यक्तित्व हमसे संवाद करते रहते हैं, ऐसा बापट ने कहा। अदिति हर्डीकर ने पारिवारिकप्रसंग बताकर तात्या के सहवास के कारण कई अच्छे संस्कार होने की बात कही। वरिष्ठ पत्रकार सुधीर जोगलेकर ने आभार व्यक्त किया।

