नकली दवाइयों के निर्माता और विक्रेता धन के लालच में न केवल लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं बल्कि दूसरे देशों में भारत की छवि धूमिल होने का कारण भी बन रहे हैं।
वैश्विक पटल पर दवाइयोेंं के निर्माण में भारत का अग्रणी स्थान है। एक अनुमान के अनुसार विश्व की 60% वैक्सीन और 20% जेनेरिक दवाएं भारत में ही बनती हैं। परंतु इसी के साथ नकली दवाओं के फलते-फूलते धंधे ने मरीजों के उपचार की अपेक्षा उनकी असामयिक मौतों का विकराल रूप भी धारण कर लिया है। एसोचैम यानी एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया, जो भारत का सबसे पुराना और प्रमुख शीर्ष व्यापार संघ और गैर-सरकारी औद्योगिक संगठन है, के अनुसार भारत में निर्मित लगभग एक चौथाई दवाईयां नकली या सबस्टैंडर्ड हैं यानी निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं हैं।
उनमें बुखार, शुगर, ब्लड प्रेशर, पेन किलर और यहां तक कि कैंसर तक की घटिया और नकली दवाइयां बाजार में कई प्रसिद्ध देसी और विदेशी कम्पनियों के नाम से चोरी-छिपे और कहीं-कहीं जागरूकता के अभाव में धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। भारत में नकली दवाइयों का कारोबार प्रतिवर्ष लगभग 33% की तीव्रता से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में नकली दवाइयों का कारोबार लगभग 16.6 लाख करोड़ रुपए का है।
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भारत में नकली दवाइयों के कुछ उदाहरण ( नकली दवाइयां / इंजेक्शन )
नकली दवाओं के कारोबार का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। मानव ही नहीं जानवरों की दवाइयां भी नकली बनाई और बेची जा रही हैं। इस काले धंधे के तार नकली दवानिर्माता से लेकर बिचौलियों और खुदरा विक्रेताओं तक जुड़े हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत सहित चार देशों में नकली इंजेक्शन की उपलब्धता की जानकारी देने के बाद 5 सितम्बर, 2023 को भारत सरकार के डीसीजीआई यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा राज्यों और संस्थाओं में कड़ी निगरानी रखने और औचक निरीक्षण करने के आदेश जारी किए गए।

भारत में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ (सेंट्रल स्टैंडर्ड ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा विगत 5 वर्षों के दौरान दवाइयों के कुल लगभग 4,92,000 से अधिक नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,342 नमूने निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं थे और 1593 नमूने तो पूरी तरह नकली पाए गए। वर्ष 2023-24 के दौरान दवाइयों के कुल 5,500 नमूनों की जांच करने पर 3.2 % नमूने सबस्टैंडर्ड/नकली पाए गए।
दिनांक 7 मार्च, 2025 को उत्तर प्रदेश के भदोही में महाराष्ट्र की ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विस तथा स्थानीय पुलिस ने नकली दवाइयों के कारखाने में बच्चों के जीवन रक्षक सिरप, लिवर की दवा और एक प्रसिद्ध कम्पनी के ‘पेन बाम’ समेत 7 प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकली दवाइयां, फेविकोल, रैपर, शीशियां, स्टिकर और पैकिंग मशीन की बरामद की। विगत 25 मई, 2025 को बिहार के ‘गया जी’ में जीवन रक्षक दवाइयों के टैबलेट्स, इंजेक्शन और नशीली दवाइयां सहित लगभग 4 करोड़ रुपए मूल्य की नकली दवाएं जब्त की गईं।
दिनांक 4 जून, 2025 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े एक अंतर्राज्यीय गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर उनसे लाखों रुपए मूल्य की कैंसर की नकली दवाइयां बरामद कीं। 28 जून, 2025 को दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने एक प्रसिद्ध दवा निर्माता कम्पनी के नाम से कोलेस्टेरॉल के इलाज में प्रयुक्त नकली दवाइयां बरामद कीं।
28 जून, 2025 को विभाग द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में हिमाचल प्रदेश के सोलन से 33, सिरमौर से 9 और ऊना से 3 दवा कम्पनियों द्वारा निर्मित दवाइयों के नमूने फेल होने की जानकारी दी गई। जुलाई, 2024 से जून, 2025 के दौरान देश में दावाओं के कुल 1324 सैंपल फेल हुए जिनमें 373 नमूने हिमाचल प्रदेश के ही थे। 29 जून, 2025 को उत्तराखंड के हरिद्वार में ब्रांडेड दवा कम्पनियों के नाम पर पैरासिटामॉल, पेन किलर और शुगर के इलाज में प्रयुक्त बड़ी संख्या में टैबलेट्स पकड़ी गईं। 30 जून, 2025 को राजस्थान के भिवाड़ी से नकली दवाई के कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।
दिल्ली का भागीरथ पैलेस वर्ष 1969 से थोक दवाइयों के व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। पिछले तीन वर्षों में दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग और दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर 14 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की नकली दवाएं पकड़ी हैं।
नकली दवाइयां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
नकली दवाइयां में प्रायः दवाई के असली तत्व यानी सक्रिय औषधि संघटन (एपीआई/एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट) नहीं होते या बहुत कम मात्रा में होते हैं। किसी दवाई या टैबलेट का एपीआई बीमारी को ठीक करने या उसका असर दिखाने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होता है। ऐसी दवाइयों के सेवन से बीमारी तो ठीक नहीं होती, उल्टा सेहत और बिगड़ जाती है। एंटीबायोटिक दवाइयों में इसके कारण बैक्टीरिया और ताकतवर/आक्रामक बन जाता है। फार्मास्युटिकल कम्पनियां नकली दवाइयों में सीसा, चॉक पाउडर, ईंट का चूरा, कैंसर पैदा करने वाले रंग, सस्ता स्टेरॉयड, आदि हानिकारक तत्व मिलाती हैं। नकली दवाइयों में उनकी उपस्थिति किडनी (गुर्दे) और लिवर (यकृत) जैसे अति महत्वपूर्ण अंगों के क्षतिग्रस्त होने की पूरी सम्भावना होती है। बच्चों के कफ सिरप और बुखार कि नकली दवाइयों से बच्चों की मौत के मामले प्रायः प्रकाश में आते हैं। इन घटनाओं से लोगों का असली दवा पर से भी भरोसा टूटा है।
नकली दवाई की पहचान करना सम्भव
दवाइयां खरीदते समय कुछ छोटी-छोटी बातें नकली दवाइयों की गिरफ्त में आने से बचा सकती हैं। नकली दवाइयों की पैकिंग में आमतौर पर स्पेलिंग गलत होती है, उनका रंग फीका होता है, प्रिंटिंग में एकरूपता नहीं होती यानी वह टेढ़ी-मेढ़ी होती है, और उनके अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी अजीब ढंग से अंकित होते हैं।
नकली दवाइयों के विरुद्ध कानून
नकली दवाइयों के कारोबार पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार द्वारा कड़े कानूनों का प्रावधान है। ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स अधिनियम -1940 के अनुच्छेद 27 के अंतर्गत नकली दवा बनाना, बेचना गैर-ज़मानती अपराध है। अपराध साबित होने की स्थिति में 10 साल की कैद से लेकर उम्र कैद के साथ 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। नकली दवाई के सेवन से किसी रोगी की मृत्यु प्रमाणित होने पर आजीवन कारावास या फांसी तक की सजा हो सकती है। वर्ष 2022 में इस कानून को और कठोर बनाया गया।
डॉ. कृष्णा नंद पांडेय
