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आपकी दृष्टि से सुशासन का सही अर्थ क्या है?
शासन एक समाज व्यवस्था की प्रणाली है। सुशासन का अर्थ यह है कि लोग हर क्षेत्र में अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। इसी दृष्टि से शासन की कार्यप्रणाली का मार्गक्रमण हो, समाज के हर व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध हो, आम व्यक्ति की जो मौलीक आवश्यकताएं हैं उसकी पूर्ति हो। सुशासन का सही अर्थ है, समाज एवं सरकार में नैतिकता होनी चाहिए। समाज के हर व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार एवं शासन प्रणाली के नियम के अनुसार जीवन की सभी आवश्यक सुविधाएं प्राप्त होने की प्रक्रिया का अर्थ ही सुशासन है। और ये सभी सुविधाएं सरलता से, स्वाभाविक रूप में प्राप्त होनी आवश्यक है।
सुशासन की व्याख्या में भारत की ग्राम व्यवस्था को किस प्रकार ला सकते हैं?
मा. प्रधान मंत्रीजी ने आदर्श ग्राम की बात कही, जिसमें देश के सांसदों ने एक ग्राम गोद लेकर वहां विकास कार्य का निर्माण करने की बात कही है। ग्रामीणों को गैस कनेक्शन मिले, जो व्यक्ति आवास की पात्रता रखता हो उसे आवास प्राप्त हो। गांव में स्वच्छतापूर्ण वातावरण निर्माण हो। गांव में हर व्यक्ति के घर में शौचालय हो। पंचायत भवन समाज के हित में कार्य कर रहे हो। आधुनिक तकनीकों से पंचायत का कार्य संपन्न हो। ग्राम विकास की प्रक्रिया को पंचायत लोगों के हित में उपयोग में ला रही हो। स्कूल, पढ़ाई, रोजगार, खेती, ग्रामीण व्यापार, पानी की उपयोगिता के संदर्भ में लोगों में जागरुकता हो इस प्रकार के सुजलाम् सफलाम् गांव की रचना हमें अपेक्षित हो, जो स्वयंपूर्ण गांव की व्याख्या में आता है।
हम भारत को विश्व गुरु के रूप में देख रहे हैं, पर भारत की आत्मा ‘ग्राम’ है, इस गांव के विकास के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने कौन सी नीतिगत भूमिका अपनाई है?
यह सच है कि गांव भारत की आत्मा है। गांव विकसित होगा तो ही देश विकसित होगा। हम भारतीय अत्यंत सौभाग्यशाली है कि मा. नरेंद्र मोदी जैसे प्रधान मंत्री हमें मिले हैं। वे देश को आगे बढ़ाने का प्रयत्न कर रहे हैं और दुनिया में भारत के राजनैतिक महच का भी प्रभाव बढ़े इस दृष्टि से लगातार प्रयास कर रहे हैं। इन दो वर्षों में हम सभी ने अनुभव किया होगा कि, गरीबों के जीवन स्तर में परिवर्तन लाने के लिए प्रधान मंत्रीजी ने बहुत कदम उठाए हैं। गरीबों के जीवन में बदलाव आए, उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिले, उनकी आमदनी बढ़े, उनके जीवन में स्किल डेवलपमेंट आए, चिकित्सा की सुविधा प्राप्त हो, गरीबों को पेंशन प्राप्त हो, देश का आम नागरिक मुख्य धारा में जुड़े इस दृष्टि से मा. प्रधान मंत्रीजी के निरंतर प्रयास रहे हैं।
जनधन योजना से देश के करोड़ों गरीब बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े हैं। प्रधान मंत्री सुरक्षा वीमा योजना के अंतर्गत गरीबों को दुर्घटना होने पर लाभ होगा। गांव में रहने वाले ज्यादातर व्यक्ति किसान हैं, उस किसान को फसल बीमा उपलब्ध कराया। उस बीमा योजना के प्रीमियम की राशि कम कर दी। इस योजना से किसान का नुकसान की भरपाई का दावा हो गया। गांव के पंचायतों को सदृढ़ करने का प्रयास किया है। हर पंचायत को पांच साल के विकास का प्लान बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें आवक-जावक का अनुमान हो, जिससे हर पंचायत अपनी समस्या को समझें और उसका निराकरण करें। ग्रामीण क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट के काम को बढ़ाया, जिससे गांव के कुशल लोगों को रोजगार प्राप्त हो। इस प्रकार से गांव के विकास के संदर्भ में प्रयास चल रहे हैं। हर गांव को मुख्य सड़क के जोड़ने का उपक्रम शुरू हुआ है। इस योजना के लिए १९००० करोड़ की राशि तय की गई है।
मनरेगा के माध्यम से गांव के बेरोजगार लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। उसमें अब तक का सबसे बढ़िया प्रावधान ४३,५०० करोड़ रुपया हमारी सरकार ने किया है। गांव आत्मनिर्भर बने, गांव में रोजगार प्राप्त हो इसलिए इसमें महिलाओं को विविध कार्यों की शिक्षा देकर प्रशिक्षित किया जाता है। महिलाएं अपना लघु उद्योग प्रारंभ कर रही हैं। सरकार के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी लाभार्थी हो रही हैं। इस प्रकार से गांव को मजबूत करने की प्रक्रिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसका आने वाले वर्षों में लाभ दिखाई देगा।
‘स्वच्छ भारत’ अभियान में गांवों को किस प्रकार जोड़ने की प्रक्रिया हो रही है?
स्वच्छता की बात मोदीजी ने की है, हर घर में शौचालय होना चाहिए, कहने को तो शौचालय बहुत छोटी चीज लगती है, लेकिन भारत को हम विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं, उसके अनेक पैरामीटर हैं, उन्हें पूरा करना है। अगर घर में शौचालय नहीं है तो हम कैसे कह पाएंगे की भारत विकसित राष्ट्र है। यह एक छोटी बात है पर उस पर मोदीजी का पूर्णत: प्रयास है कि आने वाले समय में भारत के हर गांव के प्रत्येक घर में शौचालय होना जरूरी है। देश की प्रगति में मोदीजी की यह सूक्ष्म सोच भी सकारात्मक परिणाम देने वाली है।
विगत सात दशकों में हम भारत के गांव की स्थिति में परिणामकारक रूप से सुधार लाने में सफल नहीं रहे, ऐसा क्यो?
दरअसल बात यह है, हम राजनैतिक नेता ७० साल से एक बात नियमित रूप से दोहराते रहे कि ‘‘भारत गांवों का देश है। ’’ यह प्रधानता हमारे भाषणों में थी। पर गांव के विकास संदर्भ में हम निश्चित नहीं थे। इसी कारण जो काम आजादी के पहले दस सालों में होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया है। उसके कारण गांव उपेक्षित रहे। शहरों बढ़ गए। एक असंतुलन की स्थिति समाज में निर्माण हो गई है।
सड़क, पानी, बिजली, रोजगार और शिक्षा ये पांच बातें गांव के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन पांच बातों के लिए आपके नेतृत्व में कौन से प्रयास हो रहे हैं?
प्रधान मंत्री सड़क योजना के माध्यम से गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने का प्रयास हम कर रहे हैं। फायनान्स कमीशन का पैसा सीधा पंचायत को मिले, जिसके माध्यम से गांव की अंदर की सड़क बने, गांव में नालियां बने, गांव में जो आवश्यक है उसका विकास हो। शिक्षा नीति के माध्यम से अच्छी शिक्षा गांव में उपलब्ध हो इस दृष्टि से प्रयास हो रहे हैं। चिकित्सा की दृष्टि से डॉक्टर का अभाव है लेकिन युवा डॉक्टरों को गांव की तरफ मोड़ने का हमारा प्रयास चल रहा है। इस दृष्टि से नई नीति सरकार बना रही है। गांव में सस्ती चिकित्सा एवं चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो, इसलिए जेनेरिक दवाइयों की सूची बढ़ा दी गई है, जिससे सस्ते दामों पर वह जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध होगी।
प्रधान मंत्री ने हेल्प इंश्योरेन्स स्किम का प्रावधान किया है, जिसमें एक लाख रुपये का कवच गरीब आदमी को मिलेगा। इस दृष्टि से शिक्षा, चिकित्सा, सड़क और अन्य विषयों में परिणामकारक प्रयास मोदी सरकार के माध्यम से हो रहे हैं।
‘जय जवान, जय किसान’ यह हमारा नारा है, पर भारत का किसान उपेक्षित है? ऐसा क्यों? भारत की अर्थनीति हम तय करते हैं तो उसमें कृषि नीति को ध्यान में रख कर कौनसे प्रयास होते हैं?
किसान को ध्यान में रख कर मोदी सरकार ने नीति तय की है, किसान को समुचित फर्टिलायजर मिले, समुचिेव बीज मिले, बीज की गुणवत्ता अच्छी हो और किसान की फसल प्राकृतिक आपदा से नष्ट होती है तो किसान को उसका पूरा मुआवजा मिले ये बातें सरकार ने की हैं। सॉयल हेल्थ कार्ड हर किसान को दिया है। सरकार ने नई फसल योजना बनाई जिसमें किसान को डेढ़ और दो प्रतिशत प्रीमियम पर बीमा उपलब्ध है। इससे अगर प्राकृतिक आपदा में फसल बर्बाद होती है तो किसान को पूरा मुआवजा मिलेगा। पहले हमेशा किसान को फर्टिलायजर यूरिया नहीं मिलता था। हर वर्ष आंदोलन, लाठीचार्ज होता था। धरने होने पर फर्टिलायजर के लिए राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली मे डेरा डाले रहते थे। फर्टिलायजर पर्याप्त मात्रा में पहले उपलब्ध नहीं होता था। मोदी सरकार के आने पर मोदीजी ने छोटा सा प्रयोग किया। यूरिया को नीम की कोटिंग की, यूरिया नीम कोटिंग होने के कारण वह यूरिया खेती के अलावा और किसी मतलब का रहा नहीं। इस कारण अब कहीं भी फर्टिलायजर की कमी नहीं है। मोदीजी की ग्राम विकास की नीति और किसान को मुनाफे में लाने की नीति ये दोनों नीतियां एकसाथ चल रही हैं। उन्होंने कहा है कि २०२२ तक किसान की आमदनी दुगनी हो जाएगी। इस बात को प्रत्यक्ष रूप में लाने का प्रयत्न केंद्र सरकार के माध्यम से हो रहा है। बिजली हर गांव में पहुंचाने का हमारा प्रयास उत्साहवर्धक गति से शुरू है। बिजली से सिंचाई योजना को बल मिलेगा। इन सब बातों से भविष्य में किसान का विकास जरूर होगा।
ग्रामीण क्षेत्र में उद्योग विकास हेतु कौनसी बातें सरकार के माध्यम से हो रही हैं?
सच बात यह है कि, कई बातें कहना बहुत आसान होता है, और अच्छी भी लगती हैं, लेकिन गांव इतनी छोटी इकाई है कि हर गांव में बडी इंडस्ट्री नहीं लग सकती है। पर गांव आधारित रोजगार निर्माण हो सकते हैं। ग्राम आधारित रोजगार खड़े होने चाहिए। उनके आधार पर युवकों के लिए रोजगार निर्माण हो सकता है। उन रोजगारों के निर्माण हेतु बैंकों से सहायता उपलब्ध होनी चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने दो प्रमुख कार्य किए हैं- गांव के व्यक्ति को कुशल बनाना और उसके कामों में कुशलता लाना। साथ में प्रधान मंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ५००० रुपये से लेकर १०,०००००/- रुपये तक का बीमा गारंटी का ऋण किसी भी बेरोजगार युवा को मिल सकता है जिससे वह अपना उद्योग गांव में निर्माण कर सकता है। गांव में उद्योग ५ या १० हो सकते हैं। इससे ज्यादा नहीं हो सकते हैं। घर की महिलाएं भी अपनी कुशलत: पूर्वक संभाली हुई बातों को उद्योग में परिवर्तित करें, रोज के कार्यों से भी उद्योग निर्माण हो सकते हैं। हम उन्हें भी बढ़ावा दे रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए ध्यान दिया जाता है। महिला रोजगार से जुड़ कर घर पर अपना उद्योग प्रारंभ कर सकती है। उन्हें अच्छे कार्य की ट्रेनिंग दी जाती है। इस कारण महिला भी अपनी आमदनी का निर्माण कर सकती है। इस तरह परिवार का आर्थिक स्रोत बढ़ रहा है।
मा. नरेंद्र मोदी जी ने मेक इन इंडिया से लेकर अनेक योजनाओं का प्रारंभ किया है। योजनाएं ग्राम विकास के लिए किस प्रकार सहायक रही हैं?
हां, बहुत सहायक हो रही हैं। मेक इन इंडिया हो, स्टार्ट अप इंडिया हो, स्किल डेवलपमेंट हो, लाइवलीवुड प्रोग्राम हो, प्रधान मंत्री मुद्रा योजना हो, गेट अप इंडिया हो इन सभी योजनाओं का गांव की आमदनी बढ़ाने में बहुत योगदान मिला है।
आजकल ‘स्मार्ट ’ शब्द ज्यादा उपयोग में आ रहा है। स्मार्ट सिटी, स्मार्ट-विलेज ये शब्द भी चल रहे हैं। पर देश के हजारों गांवों की आज की स्थिति को देखते हुए यह ‘स्मार्ट’ शब्द स्वप्निल लगता है। आज गांवों की प्राथमिक जरूरतें भी पूरी हो नहीं पा रही हैं। ऐसी स्थिति में ‘स्मार्ट ’ शब्द की आपकी व्याख्या क्या है?
हमारी सरकार ने कभी भी ‘स्मार्ट विलेज’ की बात नहीं की है। हम लोगों ने ‘आयडियल विलेज’ की बात की है। वह भी अलग दृष्टि से विचार हुआ है। प्रधान मंत्रीजी ने सांसदों से कहा है कि, सार्वजनिक जीवन में सांसदों का प्रभाव होता है, तो सांसदों को अपने जीवन में एक गांव का विकास कर देना चाहिए। यह सांसदों का कार्यक्रम है। दूसरी बात ‘स्मार्ट’ यह एक शब्द है, ‘स्मार्ट ’ किसी भी शहर को बनाना या गांव को बनाना इसमें कमी है ही और यह विचार होता है तो गांव और शहर दोनों के साथ होना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ हमारे भारत के लोंगों को भी ‘स्मार्ट ’ बनने की जरूरत है। वह अच्छे शिक्षित हो, अच्छी सोच हो, वह अपने शहर या गांव के विकास के बारें में सोचे, अपने शहर के लोगों के संदर्भ में सोचें, अपने गांव के स्तर का विकास बढाने के संदर्भ मे सोचें, अपने गांव के विकास में जो योगदान एक व्यक्ति इस नाते हम दे सकते हैं उसके बारे में सोचें। एक बात है अगर हमारे गांव का व्यक्ति स्मार्ट बनेगा तो गांव स्मार्ट बनेगा ही।
स्मार्टनेस होने के लिए सरकार के द्वारा विशेष आर्थिक सहयोग और ग्राम नियोजन की जरूरत है। हमारी सरकार उन बातों पर गहराई से ध्यान दे रही है। गांव में हर तरह की व्यवस्था हो, गांव को पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध हो, गांव का घन-कचरा और लिक्विड वेस्ट का प्रबंध करने की पद्धति निश्चित हो चाए, गांव में अच्छी सड़कें बने, गांव के जो भी ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक स्थान हैं उन्हें और भी अच्छा बना कर वह पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने की योजना चल रही है। गांव की हर मौलिक आवश्यक बातों का निपटारा हो। ये सब बातें हो जाने पर गांव ‘आदर्श गांव’ जरूर बन जाएगा, जिसको दुनिया ‘स्मार्ट’ कहती है।
सन २०२० में भारतीय गांवों का स्वरूप किस प्रकार आपको अपेक्षित है?
हमारी सरकार जिस गति से ग्राम विकास का विषय लेकर काम कर रही है, उससे मैं समझता हूं कि २०२० तक भारतीय गांव अधिकांश समस्याओं से मुक्त हो जाएंगे।
हिंदी विवेक के ‘ग्रामोदय दीपावली विशेषांक’ के माध्यम से आप हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं गांव से जुड़े हर व्यक्ति से अनुरोध करता हूं कि वह गांव के विकास के बारे में सकारात्मक दृष्टि से विचार करें। ग्राम सभा की बैठक करें। ग्राम सभा की बैठक में विकास के संदर्भ में विचार करें। पंचायत के पास सरकार की विविध योजनाओं, राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार के माध्यम से जो फंड आ रहा है, उसका लाभ गांव के विकास में करें। उस फंड का उपयोग गांव के विकास और पात्र व्यक्तियों के विकास में ही होना आवश्यक है। इस धन की कोई चोरी न करे इस बात का ध्यान हरेक को रखना चाहिए। इस जागरुकता से ग्राम पंचायत, सरपंच और अन्य प्रतिनिधियों पर भी नियंत्रण होगा। सरपंच गांव के विकास के लिए जो काम करना चाहता है वह कर पाएंगे । साथ में जहां गांव में श्रमदान की आवश्यकता है वहंा श्रमदान दें। गांव के विकास संदर्भ में गांव के लोगों की सोच है उस सोच को पूरा करने में उनमें सजगता होना आवश्यक है। ‘मेरा गांव मेरा तीर्थ’ की भावना हम सभी में होगी तो हम सभी की जागरुकता से देश के ज्यादातर गांवों में विकास हो जाएगा।

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