हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
भारतीय जनमानस में हनुमान की उपस्थिति का रहस्य

भारतीय जनमानस में हनुमान की उपस्थिति का रहस्य

by अमोल पेडणेकर
in ट्रेंडींग, युवा, सामाजिक
0

“दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥”

हनुमान चालीसा की यह पंक्ति केवल श्रद्धा की अभिव्यक्ति नहीं है। यह भारतीय जनमानस के उस गहरे विश्वास को व्यक्त करती है कि जब मनुष्य किसी ऐसे संकट में फँस जाता है, जहाँ अपने सामर्थ्य की सीमा समाप्त होती दिखाई देती है, तब श्रद्धा उसके भीतर एक ऐसी शक्ति का संचार कर सकती है, जिसके बारे में उसने स्वयं भी कभी कल्पना नहीं की होती। हाल ही में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लायदुबई की उड़ान में घटी घटना ने इस अनुभूति को एक असाधारण संदर्भ दे दिया है। उड़ान के दौरान भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने विमान को गिराने के उद्देश्य से हमला किया। विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा। कैप्टन स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लेकिन उस स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का प्रयास किया, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों ने हस्तक्षेप किया और विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा जा सका।

From hospital bed, Captain Smit tells PM Modi: Couldn't let others die |  India News - The Times of India

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उस बातचीत में स्मित मच्छार ने बताया कि संकट की उस घड़ी में वे लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि जब वे गंभीर रूप से घायल होकर नीचे गिर गए थे, तब उनके मन में यह स्पष्ट था कि यदि वे उठकर कुछ नहीं करते तो विमान में बैठे अन्य यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अपने प्रशिक्षण, अनुभव और मानसिक संयम के साथ आगे बढ़कर कॉकपिट का दरवाजा खोलने का निर्णय लिया। यहीं से प्रश्न उठता है, आखिर संकट की उस घड़ी में हनुमान चालीसा का स्मरण उनके लिए क्या अर्थ रखता था? यह प्रश्न धार्मिक आस्था के साथ मनुष्य के भीतर छिपी हुई आंतरिक शक्ति का प्रश्न भी है।

Indian pilot Smit MachchharIndian pilot Smit MachchharLord Hanuman Ji 4K HD Desktop Wallpaper | Hanuman Ji Divine Animated  Background 16:9 | Hanuman Jayanti Spiritual Wallpaper for PC Stock  Illustration | Adobe Stock

हनुमान भारतीय जीवन में केवल एक देवता नहीं हैं। वे शक्ति, भक्ति, साहस, विवेक, सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के जीवंत प्रतीक हैं। रामायण में हनुमान का सबसे बड़ा वैशिष्ट्य यही है कि उनके पास अपार शक्ति होते हुए भी उस शक्ति का अहंकार नहीं है। उनकी शक्ति किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि प्रभुकार्य के लिए है। इसीलिए हनुमान की भक्ति मनुष्य को केवल शक्तिशाली बनने की प्रेरणा नहीं देती; वह उसे शक्ति का सदुपयोग करने की प्रेरणा देती है।

समुद्र के सामने खड़े होकर जब वानर सेना के योद्धा अपनी-अपनी सीमाओं का अनुमान लगा रहे थे, तब हनुमान भी अपनी शक्ति से अनभिज्ञ थे। जाम्बवंत ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया। स्मरण होते ही हनुमान का आत्मविश्वास जागा और वही हनुमान समुद्र लाँघने के लिए तैयार हो गए।‌ यह प्रसंग भारतीय मानस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई बार शक्ति हमारे भीतर होती है, लेकिन संकट के क्षण में हमें उसका बोध नहीं रहता। किसी विश्वास, किसी आदर्श, किसी मंत्र या किसी प्रेरणा का स्पर्श उस सुप्त शक्ति को जगा देता है। हनुमान भक्ति इसी आंतरिक जागरण का नाम है।

Flydubai hijack: How Indian pilot Smit Machchhar saved passengers - India  Today

कैप्टन मच्छार के प्रसंग में भी यही बात दिखाई देती है। विमान उड़ाने का तकनीकी प्रशिक्षण उनके पास पहले से था। लेकिन अत्यंत भयावह परिस्थिति में मन को स्थिर रखना, साहस जुटाना और कर्तव्य के लिए अंतिम प्रयास करना, यह मनोबल उस क्षण उनके लिए निर्णायक बना। उनकी अपनी श्रद्धा में हनुमान चालीसा उस शक्ति का स्रोत बनी।

हनुमान के चरित्र का सबसे बड़ा संदेश है, स्वयं से पहले कर्तव्य। लंका जाना है तो जाएंगे। समुद्र पार करना है तो करेंगे। सीता माता का पता लगाना है तो प्राणों की चिंता नहीं करेंगे। संजीवनी लानी है तो पूरा पर्वत उठा लाएंगे। प्रभु का कार्य है तो असंभव शब्द का कोई अर्थ नहीं। हनुमान की यही कर्तव्यनिष्ठा उन्हें सामान्य बलवान व्यक्ति से अलग करती है। कैप्टन स्मित मच्छार ने भी उस संकट की घड़ी में केवल अपने प्राणों के बारे में नहीं सोचा। उनके सामने विमान में बैठे सैकड़ों यात्रियों का जीवन था। उन्होंने घायल अवस्था में भी अपने अनुभव और साहस का उपयोग किया। यह उनका पेशेवर कर्तव्य था, लेकिन संकट की घड़ी में कर्तव्य का निर्वाह करने के लिए जिस असाधारण मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता थी, उसका अनुभव उन्होंने स्वयं हनुमान चालीसा के स्मरण से जोड़ा।यही हनुमान का संदेश है, भक्ति पलायन नहीं है; भक्ति कर्तव्य के लिए शक्ति देती है।

भारतीय समाज जीवन में हनुमान निकट हैं, ऐसा क्यों ? भारत के सामान्य परिवार में दिन की शुरुआत स्नान, ध्यान, पूजा और हनुमान चालीसा के पाठ से होना कोई असामान्य बात नहीं है। गाँव के छोटे से मंदिर से लेकर महानगरों के विशाल मंदिरों तक हनुमान की उपस्थिति सहज दिखाई देती है। इसका कारण केवल यह नहीं कि हनुमान महाबली हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे भक्त होकर भी महाबली हैं और महाबली होकर भी विनम्र हैं।

Monkeys return and dialogue between Lord Ram and Hanuman ji

वे शक्ति के साथ अहंकार नहीं जोड़ते। वे ज्ञान के साथ प्रदर्शन नहीं जोड़ते। वे भक्ति के साथ निष्क्रियता नहीं जोड़ते। वे सेवा के साथ स्वार्थ नहीं जोड़ते। इसीलिए सामान्य भारतीय को हनुमान अपने जैसे लगते हैं, निकट, सहज और आत्मीय लगते हैं। हनुमान की उपासना में किसी जटिल कर्मकांड की अनिवार्यता नहीं है। संकट के समय श्रद्धा से उनका नाम लेना, हनुमान चालीसा पढ़ना और उनके चरित्र को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना, इतना ही पर्याप्त अनुभव होता है।

आज के समय में युवा शक्ति के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियाँ हैं। तकनीक ने अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन साथ ही भ्रम, आक्रोश, नकारात्मकता और विभिन्न प्रकार के वैचारिक प्रभावों के रास्ते भी खोले हैं। ऐसे समय में युवाओं को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि क्या गलत है। उन्हें यह भी दिखाना होगा कि सही क्या है ? और उसके लिए खड़ा कैसे होना है? यहीं हनुमान का चरित्र प्रासंगिक हो जाता है।

हनुमान कहते हैं, शक्ति प्राप्त करो, लेकिन शक्ति का उपयोग सेवा में करो। हनुमान कहते हैं,भक्ति करो, लेकिन भक्ति को कर्तव्य से जोड़ो।हनुमान कहते हैं, साहस रखो, लेकिन साहस के साथ विवेक भी रखो। हनुमान कहते हैं, अपने सामर्थ्य पर विश्वास करो, लेकिन अहंकार मत करो। और सबसे महत्वपूर्ण, अपने जीवन को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ो। स्वामी विवेकानंद ने भी युवाशक्ति के संदर्भ में हनुमान के आदर्श को अत्यंत महत्व दिया था। उनके विचारों में हनुमान शक्ति, निष्ठा, सेवा और आदर्श के प्रति समर्पण के प्रतीक हैं। विवेकानंद ने भारतीयों को अपनी सुप्त शक्ति पहचानने और उसे राष्ट्र तथा समाज की सेवा में लगाने का आह्वान किया था।
हनुमान की कृपा का अर्थ यह नहीं कि संकट जीवन में आएगा ही नहीं। हनुमान की कृपा का अर्थ यह है कि संकट आने पर मनुष्य टूटेगा नहीं। कठिनाई आएगी, लेकिन साहस बना रहेगा।‌ भय आएगा, लेकिन विवेक साथ रहेगा।

असंभव दिखाई देगा, लेकिन प्रयास रुकेंगे नहीं। अपने से बड़ी चुनौती सामने होगी, लेकिन कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे। इसीलिए हनुमान को ‘संकटमोचन’ कहा गया है।

संकटमोचन का अर्थ केवल यह नहीं कि कोई बाहरी शक्ति आकर हमारा संकट समाप्त कर दे। इसका एक गहरा अर्थ यह भी है कि संकट के भीतर छिपी हमारी अपनी शक्ति को जागृत करने वाली प्रेरणा हमें प्राप्त हो। शायद इसी अर्थ में हनुमान चालीसा की पंक्ति,

“दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥”

आज भी करोड़ों भारतीयों के जीवन में जीवंत है।
आज भारत और विश्व अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहे हैं। हिंसा, आतंक, कट्टरता, सामाजिक तनाव, वैचारिक संघर्ष और तकनीकी परिवर्तन के बीच मनुष्य के सामने बाहरी संकट जितने हैं, उतने ही आंतरिक संकट भी हैं। क्रोध, अहंकार, लोभ, भय, निराशा और स्वार्थ, ये भी हमारे भीतर के राक्षस हैं। यदि हनुमान हमारे आराध्य हैं तो उनके गुण हमारे आचरण में भी दिखाई देने चाहिए। भक्ति हो तो सेवा में दिखाई दे। शक्ति हो तो संरक्षण में दिखाई दे। ज्ञान हो तो विवेक में दिखाई दे।साहस हो तो कर्तव्य में दिखाई दे। और समर्पण हो तो समाजहित में दिखाई दे। यही हनुमान को समझने का वास्तविक मार्ग है।

कैप्टन स्मित मच्छार की घटना को इसलिए केवल एक विमान दुर्घटना टलने की कहानी के रूप में नहीं देखना चाहिए। वह हमें यह भी स्मरण कराती है कि मनुष्य कितनी कठिन परिस्थिति में भी अपने भीतर साहस खोज सकता है। मच्छार ने उस साहस को हनुमान चालीसा और अपनी आस्था से जोड़ा। विमान आकाश में था। नीचे हजारों फीट की गहराई थी। सामने मृत्यु का संकट था। शरीर घायल था। समय कुछ क्षणों का था। लेकिन उस क्षण एक व्यक्ति ने अपने भीतर से आवाज सुनी, उठना होगा, दरवाजा खोलना होगा, यात्रियों को बचाना होगा। यही तो हनुमान का चरित्र है।जहाँ भय समाप्त होकर कर्तव्य शुरू होता है, वहीं हनुमान का स्मरण जीवंत हो उठता है।
इसलिए आज आवश्यकता है कि घर-घर में हनुमान का चरित्र पहुँचे। युवाओं के मन में हनुमान की निर्भीकता पहुँचे। समाज में हनुमान की सेवा भावना पहुँचे। राष्ट्रजीवन में हनुमान की कर्तव्यनिष्ठा पहुँचे और प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान सके। हनुमान स्वयं हमें यही सिखाते हैं कि शक्ति बाहर से नहीं आती; वह भीतर सोई रहती है। आवश्यकता केवल उसे जगाने की होती है। और जब श्रद्धा उस शक्ति को जगाती है, तब असंभव दिखाई देने वाला मार्ग भी सुगम हो जाता है।
“दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥”

यही हनुमान कृपा की अनुभूति है। यही भारतीय जनमानस में हनुमान की उपस्थिति का रहस्य है।

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
Tags: Flydubai Flight Cockpit AttackFlydubai FZ1073 LatestFlydubai Hijacking Alert IsraelFlydubai Pilot Fight Tel AvivIndian Captain Hero FlydubaiIndian Pilot Saved PlaneTabuk Airport Emergency Landing

अमोल पेडणेकर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0