हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
अपने देश का दुर्भाग्य..!

अपने देश का दुर्भाग्य..!

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, राजनीति
0

जोसेफ गोबेल्स यह 1933 से 1945 तक, एडोल्फ हिटलर के नाजी जर्मनी का कुख्यात प्रचार मंत्री था। ‘हिटलर का सबसे विश्वासपात्र और निष्ठावान मंत्री’ यह उसकी पहचान थी। द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की हार होते ही हिटलर ने आत्महत्या की थी। हिटलर की मृत्यु के पश्चात मात्र एक दिन वह जर्मनी का चांसलर रहा, और 1 मई 1945 को अपनी पत्नी और 6 बच्चों को विष पिलाने के पश्चात इसने भी आत्महत्या की थी।

‘एक गलत या झूठी बात को बारंबार बोलने से वह सच लगने लगती हैं, और सत्य बन जाती हैं’। यह इसका प्रचार तंत्र था। इसे ही “गोबेल्स नीति’ या ‘बिग लाई’ (Big Lie) कहा जाता हैं।

इस देश के विपक्ष के नेता (LoP) इस समय इसी ‘गोबेल्स तंत्र’ का उपयोग करते दिख रहे हैं। वह कुछ दिनों से चुनाव में धांधली और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। पिछले एक महीने से उन्होंने प्रमुख चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में मोर्चा खोल रखा हैं। राहुल गांधी, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं।

वें जो आंकड़े दे रहे हैं, उन्हें देखकर कोई भी सामान्य नागरिक यही कहेगा की दाल में कुछ काला लग रहा हैं। कारण मतदाता सूचियों का जो गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) हुआ हैं, उसके कारण ड्राफ्ट मतदाता सूची (यह अंतिम सूची नहीं हैं) से 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे (delete किए) गए हैं।

अब देखने में यहां आंकड़ा बड़ा भारी लगता है, किंतु क्या कारण है कि इतने ज्यादा नाम निकाले गए हैं?
इनमें मृत व्यक्तियों के नाम 2.7 करोड़ (20%) हैं। यह सत्यापित नाम हैं, जो निकाले ही जाने हैं। इनमें विवाद नहीं हैं। इसके सिवाय, जिनका नाम एक से ज्यादा स्थानों की मतदाता सूची में हैं, ऐसे डुप्लीकेट नामों की संख्या है 1.01 करोड़ (7.6%)। यह भी सत्यापित हैं, और इनमें विवाद नहीं हैं।

अब विवाद कहां हैं? तो वह है 9.5 करोड़ (71.5%) नामों पर, जिन्हें स्थानांतरित या गैरहाजिर बताया गया हैं। यह संख्या बड़ी हैं, किंतु इसे ठीक से समझना चाहिए। यदि व्यक्ति नहीं मिलता है या नही दिखता हैं, तो उस अनुपस्थित व्यक्ति को मतदाता कैसे मान ले? भारत में पिछले दशकों में जो इतनी बड़ी घुसपैठ हुई, वह इसी प्रकार से। इनमें से अधिकतम लोगों के पास वोटर आईडी हैं। यह कैसे हो गया? तो, उस समय वहां के बीएलओ ने, बिना प्रत्यक्ष देखे, मतदाता की अनुपस्थिति में उसे सत्यापित कर दिया था।

किंतु अब यह नहीं चलने वाला। वोटर की अनुपस्थिति में उसे सत्यापित नहीं किया जा सकता। सही (अधिकृत) मतदाता ढूंढने की यही योग्य पद्धति हैं।

पिछले सप्ताह, 1 अक्टूबर 2026 से, इन 9.5 करोड़ मतदाताओं को सत्यापित करने का एक जबरदस्त अभियान चलाया जा रहा हैं। अर्थात, 9.5 करोड में से अधिकतम मतदाता, यदि वह वास्तविक (genuine) हैं, तो सत्यापित हो जाएंगे।

अब इस प्रक्रिया में गलत क्या हैं.?
क्या यह पहली बार हो रहा हैं..?

अपने देश में मतदाता सूची का ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) इसके पहले, वर्ष 1952 से लेकर 2004 के बीच आठ बार हुआ हैं।
1952 में देश में सबसे पहला ऐसा SIR हुआ, जब स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचक नामावली (वोटर लिस्ट) सत्यापित करके तैयार की गई।

1957 – 1961 और 1965 – 66 में जनसंख्या बदलावों के साथ, नए प्रदेशों के निर्मित के कारण, SIR किया गया।
1983 – 84 और 1987 -1989 इन वर्षों में मतदाता सूचियों की त्रुटियों को दूर करने के लिए, सत्यापन पर बल देने के लिए, SIR किया गया।

1992 – 1993 और 1995 यह दौर था, जब देश में पहली बार वोट देने के लिए ‘मतदाता फोटो पहचान पत्र’ (EPIC) की अवधारणा लागू हुई। सूचियों का व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण किया गया।

2002 – 2004 यह इसके पहले का अंतिम बडा पुनरीक्षण था। उसके बाद, अभी तक विस्तृत SIR नहीं किया गया।
इस बार के SIR की विशेषता हैं कि भारत के मतदाताओं का डिजिटल डेटाबेस (ECI – Net) बनाया जा रहा हैं। इसके कारण अब भविष्य में, एक ही व्यक्ति का, देश के दो विभिन्न सूचियों में नाम रहने जैसी समस्याएं नहीं रहेगी।
अर्थात, अभी हो रहा ऐसा SIR पहली बार नहीं हैं। इस SIR में डिजिटाइजेशन पर जोर दिया जा रहा हैं। ताकि मतदाता सूचियों में धांधली को रोका जा सके।

DMK's U-Turn On Rahul Gandhi's Delhi March, Protest Against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar

तो फिर इस SIR का विरोध क्यों?
जिनको हटाने की मांग राहुल गांधी कर रहे हैं, वह ज्ञानेश कुमार 14 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त बने। उसके बाद हुए चुनाव में भाजपा बहुमत का आंकड़ा भी छू न सकी। 240 पर सिमट गई। वें 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए गए। किंतु उसके पहले, भाजपा ने 2014 में और 2019 में शानदार जीत हासिल की थी। वह किसके कारण? तब तो ज्ञानेश कुमार चित्र में ही नहीं थे..!
आपका और हमारा दुर्भाग्य हैं कि इस देश का विपक्ष, विकास की संभावनाओं पर नहीं बोलता, देश के नीति निर्धारण की बहस में हिस्सा नहीं लेता, सामान्य व्यक्ती की सही समस्याओं को नही उठाता। वह तो केवल, जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं हैं, उन पर आक्रमण कर रहा हैं।

यह ठीक नहीं हैं।
जब पूरे विश्व में भारत के जांबाज कैप्टन स्मिथ माछर के शौर्य की वीरगाथाएं गायी जा रही हैं, तब हमारा विपक्ष इस वीर कैप्टन के बारे में एक शब्द भी नहीं बोल रहा हैं। भारत एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर रहा हैं, उसपर भी यह सब खामोश हैं। देश में इस समय हनुमान भक्ति की बयार बह रही हैं। विपक्ष उसपर भी नि:शब्द हैं।
उनका एक सूत्रीय कार्यक्रम संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का हैं।
ऐसा विपक्ष हमारे देश में हैं, यह हम सब का दुर्भाग्य हैं..!
– प्रशांत पोळ

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Next Post
स्वदेशी यात्री विमान निर्माण की दिशा में भारत

स्वदेशी यात्री विमान निर्माण की दिशा में भारत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0