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संघ कार्य पवित्र ईश्वरीय कार्य है

संघ कार्य पवित्र ईश्वरीय कार्य है

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, राजनीति, संघ
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सिसोदिया ने कहा कि “इससे पहले भी ‘संविधान बचाओ’ जैसे अभियानों का दुरुपयोग कर संघ और भाजपा के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। कांग्रेस का नेतृत्व हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रस्त होकर केवल एक वोट बैंक को खुश करने तक सीमित हो गया है। इसी कारण वह संघ और भाजपा के खिलाफ निरंतर जहर उगलता रहता है, जिसे अब देश की जनता भली-भांति समझ चुकी है और कांग्रेस को लगातार नकार रही है।”

कोटा, 5 अप्रैल। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस एवं उसके छात्र संगठन द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ खड़े किए जा रहे गैरज़रूरी विरोध और अराजकतापूर्ण माहौल पर तीखा और करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सत्य सनातन हिंदुत्व का प्रखर अग्रेसर है। संघ कार्य पवित्र ईश्वरीय कार्य है; जिसने इसके मार्ग में बाधा उत्पन्न की, वह स्वयं शून्य हो गया। संपूर्ण हिंदू समाज संघ के साथ खड़ा है। यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का पोषक एवं संरक्षक तथा देश की आत्मा से जुड़ा आदरणीय संगठन है। इसका स्वयंसेवक हिंदू सनातन का ध्वजवाहक है, जिसे रोकने की कल्पना भी अंग्रेजों की विरासत वाली अहिंदू कांग्रेस को नहीं करनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “अंग्रेजों, कांग्रेस सरकारों और वामपंथियों ने संघ को रोकने के अनेक सक्रिय प्रयास किए, किंतु वे पराभूत हुए और संघ ने उन सभी बाधाओं को पार करते हुए सामाजिक स्वीकृति के साथ निरंतर प्रगति की है। जनविश्वास के आधार पर वह विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बन चुका है। वर्तमान में संघ अपने 100 वर्षों की गौरव यात्रा को उल्लास और उत्साह के साथ मना रहा है। कांग्रेस ने इतिहास में जितनी बार संघ को दबाने का प्रयास किया, हर बार संघ और अधिक मजबूत होकर उभरा और देशवासियों का विश्वास व समर्थन उतना ही बढ़ता गया।”

सिसोदिया ने प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान कांग्रेस गोविंद सिंह डोटासरा तथा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “उनके बयान पूरी तरह हताशा, कुंठा और राजनीतिक अस्तित्व बचाने की छटपटाहट का परिणाम हैं।” उन्होंने कहा, “डोटासरा को अपनी कुर्सी बचाने की चिंता है, तो गहलोत को नई कुर्सी पाने की। अपनी-अपनी चिंताओं में अहिंदू हाईकमान को खुश करने के लिए वे आरएसएस विरोध का नाटक करते रहते हैं। यह उनका स्वार्थपरक वैचारिक दिवालियापन दर्शाता है।”

सिसोदिया ने “एनएसयूआई” द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम के विरोध को “पूर्व नियोजित अराजकता” करार देते हुए कहा कि “कांग्रेस अब वैचारिक लड़ाई नहीं लड़ सकती, इसलिए वह झूठ की ओट में अराजकता फैलाने का काम कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि “संघ एक सांस्कृतिक, राष्ट्रवादी और समाज सेवा आधारित संगठन है, जबकि कांग्रेस झूठ, भ्रम और विभाजन की राजनीति पर खड़ी पार्टी बन चुकी है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि “कांग्रेस नेता अपने अहिंदू हाईकमान को खुश रखने के लिए अपने ही कार्यकर्ताओं को भड़काना, गलत तथ्यों के आधार पर आंदोलन खड़ा करना और समाज में तनाव पैदा करना अपनी स्थायी कार्यशैली बना चुके हैं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि जबरिया गुंडागर्दी और अनैतिक दबाव की राजनीति है।”

सिसोदिया ने कहा कि “इससे पहले भी ‘संविधान बचाओ’ जैसे अभियानों का दुरुपयोग कर संघ और भाजपा के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। कांग्रेस का नेतृत्व हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रस्त होकर केवल एक वोट बैंक को खुश करने तक सीमित हो गया है। इसी कारण वह संघ और भाजपा के खिलाफ निरंतर जहर उगलता रहता है, जिसे अब देश की जनता भली-भांति समझ चुकी है और कांग्रेस को लगातार नकार रही है।”

उन्होंने स्पष्ट कहा कि “आज देश की जनता कांग्रेस को सुनना ही बंद कर चुकी है। कांग्रेस अब केवल बयानबाजी और विवादों की राजनीति तक सिमट गई है, जबकि संघ समाज के हर वर्ग में स्वीकार्यता और सम्मान प्राप्त कर रहा है।”

सिसोदिया ने कहा कि “संघ का शताब्दी वर्ष पूरे देश में अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जो उसकी बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का प्रमाण है। वहीं कांग्रेस का विरोध उसकी हताशा, पराजय के भय और राजनीतिक समाप्ति का संकेत है।”

अंत में सिसोदिया ने कहा, “संघ राष्ट्र निर्माण की अटूट और शक्तिशाली धारा है, राष्ट्रहित उसके लिए सर्वोपरि है। संघ को उसके महान गुणों के कारण ही देश ने स्वीकार किया है, जबकि कांग्रेस को उसकी तुष्टिकरण और ‘परिवार प्रथम’ की नीति के कारण देश लगातार अस्वीकार कर रहा है।” उन्होंने कहा कि “कांग्रेस को अब आत्ममंथन करना चाहिए कि देश ने उन्हें क्यों नकार दिया है।”

– अरविन्द सिसोदिया

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