
संघ के 100 वर्षों की सफल यात्रा प्रेरणादायी – भैया जी जोशी
मुम्बई। समाज में अनेक प्रकार के प्रश्न रूपी समस्याएं एवं चुनौतियां तो रहेंगी ही, परंतु प्रत्येक प्रश्न को समझकर उसका उत्तर स्वयंसेवकों को देना चाहिए और वे दे भी रहे हैं। कोई भी क्षेत्र हो, कोई भी विषय हो, इसके समाधान हेतु स्वयंसेवकों की विराट शक्ति देश में उभरी है। डॉ. हेडगेवार जी की कल्पना का स्वयंसेवक सामर्थ्यवान व कौशल में निपुण होना चाहिए। संघ की 100 वर्षों की सफल यात्रा, संघ कार्य का विस्तार एवं प्रगति प्रेरणादायी और विश्वास देने वाली है, यह वक्तव्य भैया जी जोशी ने प्रमुख वक्ता के रूप में हिंदी विवेक मासिक पत्रिका द्वारा प्रकाशित ”चरैवेति चरैवेति रा. स्व. संघ अंधेरी पूर्व वाटचाल” पुस्तक के विमोचन समारोह के दौरान दिया।
इस दौरान मंच पर हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष पद्मश्री रमेश पतंगे, महानगर कार्यकाह सुरेश भगेरिया, सहार भाग संघचालक रवि नत्थानी, मोहन अय्यर, बिजनेसमैन डॉ. अजित मराठे एवं हिंदी विवेक की कार्यकारी संपादक पल्लवी अनवेकर उपस्थित थे।
भैया जी जोशी ने आगे कहा कि प्रतिकूल परिस्थिति में संघ कार्य प्रारंभ हुआ तब लोग टिका टिप्पणी करते थे, परंतु जब नागपुर में संघ संचलन हुआ तब उसे देखकर वे हतप्रभ व आश्चर्यचकित थे। संघ का विरोध हुआ, संघ के मार्ग में रोड़े डाले गए, यहां तक कि संघ को समाप्त करने का प्रयास किया गया, परंतु संघ अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक बढ़ता गया। संघ का एक गीत है “शत्रु पर भी मात करता आपका व्यवहार निर्मल” इस गीत को चरितार्थ करते हुए संघ स्वयंसेवक आगे बढ़ते जा रहे हैं। देश के लाखों गांवों में स्वयंसेवक “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” संघ प्रार्थना करते हुए हिंदू के नाते एकत्रित होते हैं, जिसमें सभी समाज-जाति वर्ग के लोग शामिल हैं। आज इस्लाम, ईसाई, साम्यवादी के प्रमुख लोग भी संघ से भेंट करते हैं और विविध विषयों पर सलाह लेते हैं तथा विचार-विमर्श करते हैं। यह संघ पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। इस संबंध में उन्होंने उदाहरण स्वरूप कुछ प्रसंग भी बताए।



भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद मंच पर उपस्थित मान्यवरों का परिचय और उनका स्वागत सम्मान किया गया। फिर उपरोक्त मान्यवरों के हाथों पुस्तक का विमोचन किया गया।
हिंदी विवेक की कार्यकारी संपादक श्रीमती पल्लवी अनवेकर ने अपनी प्रस्तावना में हिंदी विवेक पत्रिका की 17 वर्षों की सफल यात्रा, नियमित अंक, विशेषांक, ग्रंथ, पुस्तक प्रकाशन की विशेषता और उपलब्धियों से सभी को परिचित करवाया।
मोहन अय्यर ने पुस्तक के प्रति अपनी मनोभावना व्यक्ति की और डॉ. अजित मराठे ने पुस्तक प्रकाशन के संदर्भ में भूमिका रखी।
रवि नत्थानी ने अपने वक्तव्य में पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डाला और बिमल केडिया एवं सुनील देवधर ने अपना अनुभव कथन सुनाया। पद्मश्री रमेश पतंगे ने भी अपने उद्बोधन से सभा में उपस्थित सभी को भावविभोर कर दिया।
इस कार्यक्रम में पराग अलवणी, विधायक मुरजी पटेल, सिने दिग्दर्शक राजदत्त जी, उद्योजक शिवकुमार खेतान, पूर्व पार्षद अभिजित सामंत, जनकल्याण बैंक के चेयरमेन संतोष केळकर सहित अनेक मान्यवरों के साथ बड़ी संख्या में संघ के स्वयंसेवक उपस्थित थे.
शैलेश घोसाळकर ने सभी के प्रति
आभार जताया और श्रीकांत खंडकर ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। श्रीमती वृंदा केळकर ने सम्पूर्ण वंदेमातरम गाकर कार्यक्रम का समापन किया।




