अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए जिस तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया है, उस पर डॉ. सुरेश हावरे की नियुक्ति महज़ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों रामभक्तों में विश्वास और आश्वस्ति की भावना पैदा करने वाला कदम है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री ने डॉ. हावरे की कार्यक्षमता और नेतृत्व पर जो विश्वास जताया है, वह उनकी नियुक्ति के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है।
डॉ. हावरे इस चयन समिति के सदस्य हैं और ट्रस्ट ने उनके अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह ईमानदार, पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन पर एक राष्ट्रीय स्तर की मुहर है।

विज्ञान की अनुशासनप्रियता और प्रबंधन की दूरदृष्टि
डॉ. सुरेश हावरे के साथ कई वर्षों तक काम करने का अवसर मुझे मिला है। मराठी बिल्डर्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने न केवल एक संगठन खड़ा किया, बल्कि निर्माण क्षेत्र को नैतिकता, व्यावसायिकता और राष्ट्रहित की दिशा दी। भाभा परमाणु ऊर्जा केंद्र (BARC) में पूरे 27 वर्षों तक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में काम करने के बाद उन्होंने उद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विज्ञान की अनुशासनप्रियता, प्रबंधन में दूरदृष्टि और निर्णायक नेतृत्व का दुर्लभ संगम उनके व्यक्तित्व में देखने को मिलता है।
मंदिर प्रबंधन का आदर्श
सन् 2016 से 2019 की अवधि में शिर्डी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो कार्य किया, वह आज भी सुशासन का एक ‘मॉडल’ माना जाता है। साईं समाधी शताब्दी वर्ष की योजना, लाखों श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएँ, अत्याधुनिक प्रसादालय, अस्पताल, पारदर्शी प्रशासन, स्वच्छता अभियान और भक्त-केंद्रित सेवा जैसे अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से कैसे किया जा सकता है, इसका आदर्श प्रस्तुत किया। उनके नेतृत्व ने धार्मिक संस्थाओं में भी आधुनिक प्रबंधन और उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया।
समय की जरूरत : व्यावसायिक सुशासन
श्री राम मंदिर का भव्य निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब उसके दीर्घकालिक, सक्षम और पारदर्शी प्रबंधन की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मंदिर प्रबंधन डॉ. हावरे के विशेष अध्ययन का विषय है। ‘Temple Management’ नामक उनकी गहन अध्ययनपूर्ण पुस्तक में उन्होंने आधुनिक प्रबंधनशास्त्र और भारतीय मंदिर परंपरा के समन्वय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। मंदिर प्रबंधन पर उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें इस विषय का विशेषज्ञ माना जाता है। इसलिए यह नियुक्ति कोई संयोग नहीं, बल्कि उनके दशकों के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता की उचित मान्यता है।
विकास का नया अध्याय
एक विकासकर्ता के रूप में मेरा दृढ़ विश्वास है कि सुशासन ही किसी भी विकास का सच्चा आधार होता है- चाहे वह उद्योग हो, शहर हो या मंदिर। ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का जो निर्णय लिया है, वह भविष्य के सुशासन की दिशा स्पष्ट करने वाला है। इस प्रक्रिया में डॉ. सुरेश हावरे जैसे अनुभवी और विद्वान व्यक्तित्व की भागीदारी निश्चित रूप से बहुमूल्य साबित होगी।

मुझे पूरा विश्वास है कि डॉ. सुरेश हावरे के अनुभवी मार्गदर्शन से भविष्य में अयोध्या का श्री राम मंदिर न केवल आस्था का सर्वोच्च केंद्र होगा, बल्कि उत्कृष्ट प्रबंधन, पारदर्शी प्रशासन और भक्त-केंद्रित सेवाओं के वैश्विक मानदंड स्थापित करने वाली संस्था भी बनेगा। यह नियुक्ति उनके व्यक्तिगत कार्य का सम्मान नहीं, बल्कि भारत में मंदिर प्रबंधन के नए युग की आश्वासक शुरुआत है।
डॉ. सुरेश हावरे को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। मुझे दृढ़ विश्वास है कि उनके नेतृत्व और अनुभव का लाभ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निश्चित रूप से मिलेगा।
॥ जय श्रीराम ॥
– प्रकाश बाविस्कर

