कल एक दृष्टि घर से मिली है, अक्सर हम तत्काल में जो घट रहा है और जो प्रत्यक्ष सामने से दिखाई देता है, उस पर प्रतिक्रिया देते हैं, उसके पीछे के निहित भावों एवं जो इस तरह घटना घटाने तक की नकारात्मकता रखनेवाले देश भर में हैं, उन्हें सामने लाकर उनके मुखोटों को उतारने पर ध्यान नहीं देते।
वस्तुत: इस पूरे आन्दोलन ने इसी ओर ध्यान दिलाया है, तिलचट्टों के साथ अन्य कई चट्टे-बट्टे हैं, जिनके बारे में देश को पता होना आवश्यक था, सो इस आयोजन ने एक बार फिर बता दिया। अब लोग कह रहे हैं, मोदी जो करते हैं, अच्छा ही है।
धैर्य के साथ एक-एक को बिल से बाहर निकाला गया है, अब बारी उन पर Mortein छिड़कने की है। सो, साहब कल की घटना के बाद से वह कार्य भी आरंभ हो चुका है। पहचान की जा रही है, धड़ाधड़ एफआईआर का दौर चल रहा है, प्लास्टिक का लट्ठ भी बज रहा है, कमाल की बात इसकी यह है कि चलाने पर आवाज इसमें से साय…फाय…हाय…निकलती है, किंतु चोट का निशान एक भी बाहर नहीं आता!

पुलिस में जितने भी उस विचार के हिमायती थे और जिनके मन में सत्ता के विरोध का फल पक रहा था, वह भी अब टूट चुका है या कहना चाहिए कि फिलहाल के लिए उसका गूदा सूख चुका है अथवा गायब हो गया है। आज वे भी अपने साथियों को एवं स्वयं को पिटता देख समझ गए कि मोदी जो कर रहे हैं, वह सही है।
कहते हैं राजनीति में अक्सर धैर्य का फल मिलता है, किंतु यह धैर्य बहुत साधना साध्य है। कई बार इसके लिए हमने देखा भी है कि भाजपा ने अपनी सत्ताएं भी खोई हैं, व्यक्तियों की निष्ठा तक को स्वाहा कर दिया है। पर सच यही है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आज जो है, वह सत्ता में आने के लिए लम्बा धैर्य पहले ही रख चुका है, इसलिए वह जानता है कि समस्या है तो उसका निवारण जड़ से कैसे करना है।


आज सभी चिलचट्टों का सच पूरे देश ने देख लिया है, पहले जो थोड़ी बहुत हमदर्दी दिख रही थी, वह अब देश के आम व्यक्ति के मन से उन तमाम दृष्यों को देखकर समाप्त हो चुकी है, जोकि तिलचट्टों के लोकतंत्र पर अलग-अलग तरीके से, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर, पुलिस पर हाथ उठाकर एवं अन्य प्रकार से सामने ला दिए हैं।
अब देखों; हम सभी आज इसी विषय की चर्चा कर रहे हैं, बड़े बड़े लेख लिखे जा रहे हैं, चर्चाएं, परिचर्चाएं अब इसी विषय पर चल रही हैं, विचार का कितना सशक्त प्रवाह हवा में विद्यमान होता जा रहा है। निश्चित ही कहना होगा कि यह दूर दृष्टाओं की दूर की सोच है, जिसका परिणाम हम सभी ने कल अपनी आंखों से देखा ही है…
– डॉ. मयंक चतुर्वेदी
