खरपतवार वटवृक्ष से बड़ी हो गई।
गुंडो के हाथ के डंडे तब लहराते हैं जब हम अच्छे लोगों को तथाकथित सभ्य बनाने में लग जाते हैं या यूं कहा जाए कि शेषनाग को केंचुआ बना देते हैं।
राम बनो पर लक्ष्मण को राम बनाने की कोशिश करोगे तो देश में कभी रामराज्य नही आ सकता। हनुमान जी से भजन करवाओ पर उनकी गदा तो मत छीनो। सरकार चलाओ पर असरकार बनना तो मत छोड़ो।
एक टिकैत पूरे किसान संघ पर भारी पड़ गया। एक दीपके पूरे विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल या छात्र संगठन को पानी पिला गया।
बहुत पहले मैंने लिखा था कि शेर को शाकाहारी बनाने का परिणाम घातक ही होता है। बुद्ध और महावीर दार्शनिक रूप से हमारे सिरमौर हैं, पर ये भी सत्य है कि तलवार गलाकर तकली बनाने का परिणाम हम सबने देखा है।

राम, कृष्ण, शिवाजी या सावरकर शाकाहारी थे, यह विषय गर्व या बहस का नही है, ये महत्वपूर्ण है कि दुश्मनों को दहलाने वाली तलवार रखते थे। देवी को बलि चाहिए तो दो… कोले का विकल्प क्यों ढूंढते हो।
शिव के दो स्वरूप हैं सात्विक हनुमान भी और घोर तामसिक भैरव भी। भैरव को उन्मुक्तता की जगह ब्रह्मचर्य और शराब की जगह चरणामृत पिलाओगे तो हो गई… धर्म की जीत!
दिल्ली में अश्लीलता या अराजकता का जो आलम दिख रहा है, अगर इतने से ज्यादा अपने अच्छे छात्र वहां होते तो क्या इनकी मन मर्जी चल पाती ?
समाज में आंदोलनों की अपनी भूमिका होती है। मैं या हम सब उसी की उपज हैं। अगर हम नही करेंगे तो कोई तो करेगा।
विदेशी ताकते कहकर हम बच नही सकते। उनका तो काम ही यही है। समाज की बीमारी का इलाज आयुर्वेद नही करेगा तो एलोपैथी के पास लोग जाएंगे ही सही। अगर भ्र्ष्टाचार के खिलाफ हम नही बोलेंगे तो कोई अन्ना बोलेगा! छात्रों के लिए तुम नही बोलोगे तो कोई सोनम हीरो बनेगा। गौरक्षा पर खुलकर सड़क पर लड़ते नही दिखोगे तो कोई फर्जी अविमुक्तेश्वरानंद हिंदुत्व की आवाज बन जायेगा। वेक्यूम की पूर्ति कोई तो करेगा ही।


दो लाइन की पोस्ट की थी, उस पर कुछ लोगो ने समझाने की कोशिश की कि समाज में विद्यार्थी परिषद कितना बड़ा काम कर रही है। मुझे सिखाने से क्या होगा। मैंने स्वयं काम किया है इसलिए महत्व मुझे भी पता है। निष्ठावान छात्र सरकार और संगठन में कई जगहों पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन सड़क तो खाली है न!
सकारात्मक बाते बहुत है। लेकिन सड़के तो खाली हैं न! और याद रखने की बात है सत्ता का रास्ता सड़क से होकर ही जाता है।
राष्ट्रयज्ञ करो लेकिन हर यज्ञ में क्षेत्रपाल की भूमिका होती है। उसकी आहुति का विधान हर यज्ञ में होता है… भले यज्ञ मण्डप से दूर हो!

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दिल्ली के किसान आन्दोलन या छात्र आंदोलन की तरह पूरी सीरीज चलेगी और जब तक सरकार है तब तक पुलिस के दम पर दबाने की कोशिश करते रहना।
केवल कार्यालय बड़े बन जाने से कार्य बड़ा नही हो जाता।
संघ की वर्षो की साधना का सकारात्मक परिणाम है देश का विकास, राष्ट्र चेतना, राम मंदिर, मजबूत अर्थ व्यवस्था।
लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने गर्व से ये कहा था कि हमने इतिहास में एक लाइन भी बदलाव नही किया है। तब मैंने कहा था कि ये गर्व की बात है या शर्म की ?
उपलब्धियां गिनाने से कमियां दूर नही होती। च्यवनप्राश खिलाने से कैंसर सेल नही मरते! कीमियो दुखदायी है, पर करना पड़ता है।
सरकार का काम सरकार करे। लेकिन हमारा काम हम क्यों रोके?
अंत में दिनकर जी को याद करते हुए…
समर शेष है नही पाप का भागी केवल व्याध।
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।
– बाबा सत्यनारायण मोर्य

