वांगचुक ने बिना किसी तिलचट्टे को खबर किए अनशन तोड़ दिया. पुलिस के लव लेटर अब दंगाइयों के घर पहुंचने शुरू हो गए. बेचारे वीडियो डाल-डाल के माफ़ी मांग रहे हैं, तो कुल मिला के किरान्ति की असली शुरुआत अब हुई है, अब पता चलेगा कि पुलिस के लव लेटर का क्या मतलब होता है, लेकिन…
क्या ये जो कुछ भी हुआ उसकी वजह Paper leak था…!! वो तो पहले भी होते रहे हैं. असल वजह कुछ और थी, जिसका नाम FCRA है.
शुरू से समझते हैं….
2004 में जब कॉंग्रेस की सरकार बनी थी तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन सब जानते हैं कि वो सिर्फ एक मुखौटा थे, असली सरकार NAC (National Advisory Committee) चला रही थी, जिसकी मुखिया थी उनकी राजमाता.
और इस NAC के पीछे अधिकांश NGO थे जो विदेशों से चंदा लेते थे… बेहिसाब चंदा और देने वाले उनसे अपना मकसद पूरा कर रहे थे.
भारत की तरक्की को रोकने का मकसद…
भारत को तोड़ने का मकसद…
सनातन को खत्म करने का मकसद….
2010 के बाद इन विदेशी दानदाताओं को ये समझ में आ गया कि कॉंग्रेस के प्रति जनता में बेहद नाराजगी है और वो सत्ता में वापस नहीं आने वाली. मोदी की लोकप्रियता चरम पर है, तब उन्होंने अपने ही कुछ मोहरों को आगे किया.
आप याद कीजिए… हैंडसम सिसोदिया और नटवरलाल… NGO वाले हैं….कबीर और परिवर्तन इनके NGO हैं.
और यही क्यूँ, इनकी पूरी पार्टी ही NGO की पार्टी है. तो मकसद ये था कि कॉंग्रेस से नाराज वोटर सीधा मोदी की तरफ ना चला जाए, उसमें से कुछ उसके मोहरों की तरफ shift हो जाए ताकि मोदी अगर आए भी तो कमजोर सरकार के साथ, जैसे अटलजी आए थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
देश की जनता ने एकतरफा फैसला सुनाया और इनके सारे किए धरे पर पानी फिर गया. यहां से इनके पतन की शुरुआत होती है, जो 2020 में FCRA के संशोधन तक पहुंचती है.
* FCRA कानून इंदिरा गांधी की सरकार ने Emergency के दौरान बनाया था विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए.

* 2020 में सरकार ने इसमें संशोधन करके NGO के प्रशासनिक खर्च… यानी उनका खुद का खर्च 50% से घटाकर 20% कर दिया. सारी विदेशी फंडिंग अब दिल्ली के एक SBI ब्रांच में ही आएंगी… आधार जरूरी किया.
* इस संशोधन के बाद लगभग 6000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए. 2019-20 के दौरान भी लगभग 2000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए…..और सरकार के सामने एक नई समस्या खड़ी हुई कि जिनके लाइसेंस रद्द हुए हैं, उनकी संपत्ति का क्या करें. ये जो पूरे देश में चर्च… सेंट जेवियर… सेंट मार्टिन जैसे स्कुल-कॉलेज खोल रखे हैं, उनका क्या किया जाए….!!
* तो अब सरकार एक संशोधन लाना चाहती है कि यदि….यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द हो जाए तो विदेशी फंड से बनी सारी संपत्ती सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के पास चली जाएंगी.
सारा फसाद इसी बात का है, अब ना पैसा आ पाएगा और ना यहां जो empire बना रखा है वो बचेगा… ये तो सड़क पर आ जाएंगे… आ जाएंगे क्या…. आ गए.
सबसे बड़ा नेता मोदी के घर के सामने जमीन पर लोट रहा है…
चमचे बीच चौराहे नंगे नाच रहे हैं… मुजरा कर रहे हैं…
पागलों जैसी हरकते कर रहे हैं…
क्या बोल रहे हैं…
उन्हें खुद नहीं पता…
इतिहास पूछेगा….
“….कितने आदमी थे…?”
ज़वाब मिलेगा…
“….सरदार सिर्फ 2… और उन दोनों ने ही पूरे के पूरे विपक्ष को पागल बना के सड़क पर नचा दिया था…”

