प्रतिपल सैकड़ों शिशु संसार में जन्म लेते हैं। अधिकांश लोग सामान्य जीवन जीकर संसार से विदा हो जाते हैं। उनका पूरा जीवन भोजन, निद्रा के लिये सुरक्षित स्थान अर्थात घर बनाने, जोड़ा बनाने, संतान को जन्म देने अथवा क्रोध प्रेम की अभिव्यक्ति में बीत जाता है। ये निजी आवश्यकता तो चींटी से लेकर हाथी तक सभी प्राणी पूरी करते हैं।
इस प्रकार का जीवन तो सृष्टि के मनुष्योत्तर प्राणियों की भाँति ही जीवन हुआ। लेकिन कुछ लोग होते हैं जो जीवन की इन आधारभूत आवश्यकता से ऊपर अपनी जीवन यात्रा आरंभ करते हैं। उन्हें केवल अपनी ही नहीं बल्कि अपने पूरे समाज, संस्कृति, परंपरा, राष्ट्र और संसार की चिंता होती है। ऐसी विभूतियों ऋग्वेद के आव्हान “मनुर्भवः” आव्हान का पूरा करती हैं। इनकी गणना महापुरुषों में होती हैं। यही विभूतियाँ इतिहास बनाती हैं। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी हैं।
बालपन से लेकर आज तक उनके सामने हर क्षण चुनौतियाँ रहीं लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना किया। विषमताओं और विरोध को अपनी शक्ति बनाया। वे भविष्य में आने वाली चुनौतियाँ का आकलन पहले से कर लेते हैं। उन्होनें हर चुनौती का समाधान करने का मार्ग कुछ इस प्रकार बनाया कि वे चुनौतियाँ ही उनकी शक्ति बनीं।
हम उनका बचपन देखे, बचपन में उन्होंने चाय बेची। चाय बेचकर अपने स्कूल का खर्चा निकाला। परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं था। फिर भी अपनी कर्मशीलता से वे राजनीति के सर्वोच्च स्थान तक पहुँचे। वे जहाँ रहे, जो दायित्व मिला उसे उन्होंने कुछ इस प्रकार निभाया कि आने वाली पीढ़ी ने उसका अनुकरण किया। उन्होंने न किसी विरोध की परवाह की और न प्रशंसा से आत्ममुग्ध हुये। यदि कहीं सम्मान मिला तो अंहकार भी नहीं आया। सतत आगे बढ़ना उनका स्वभाव रहा है।

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुये उनका जितना विरोध हुआ, उतना विरोध भारत के किसी मुख्यमंत्री का आज तक नहीं हुआ। इस विरोध के चलते उन्हें अमेरिका की बीजा तक नहीं मिला था। लेकिन वे अडिग रहे, विचलित नहीं हुये और आगे चलकर उसी अमेरिका ने उन्हें अपने देश में आने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री के रूप में अमेरिका के व्हाईट हाउस में उनका जैसा सम्मान हुआ वैसा सम्मान उनसे पहले भारत के किसी प्रधानमंत्री का नहीं हुआ। अमेरिका ने उनके सम्मान में डिनर का आयोजन किया था।
प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद भी उनपर राजनैतिक हमले लगातार हो रहे हैं। ये हमले भी हर प्रकार के हैं। व्यक्तिगत हमले भी हुये, राजनैतिक भी और निर्णयों को भी मुद्दा बनाया गया। लेकिन कभी विचलित नहीं हुये और निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इन सभी हमलों के बीच उन्होंने भारत में लगातार सबसे लंबी अवधि तक पदारूढ़ रहने का कीर्तिमान बनाया। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री रहने तक लगातार इतनी लंबी अवधि कोई भी राजनेता पदारूढ़ नहीं रहा। अपने व्यक्तित्व की कर्मशीलता से ही उन्होनें राजनीति में यह कीर्तिमान बनाया है।
वे अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पद संभालने से पहले पूरे भारत की यात्रा की थी। देश का शायद ही कोई ऐसा जिला केन्द्र हो जहाँ वे गये न हों। इससे भारतीय संस्कृति और मनोविज्ञान की विविधता की उन्हें सहज जानकारी है। इसीलिए उनके निर्णयों में जमीनी समस्या के समाधान के सूत्र होते हैं। उनका स्वच्छता अभियान, हर घर को नल जल अभियान, ग्रामीण बहनों को धुँये से मुक्ति के लिये उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि आदि ऐसी योजनाएँ आरंभ की, जिससे न केवल भारत के लोकजीवन की मूलभूत समस्याओं के समाधान का मार्ग निकला अपितु भारतीय जनता पार्टी का स्वरूप भी व्यापक हुआ।
प्रधानमंत्री के रूप में उनके अधिकांश निर्णयों में दूरदृष्टि है। इनमें स्पेस टेक्नालॉजी के लिये बजट बढ़ाकर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जिससे अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन “इसरो” दुनियाँ के अन्य देशों के उपग्रह स्थापित कर रहा है। चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने वाला भारत पहला राष्ट्र बना। आयुध निर्माण में भारत अब निर्यातक देश है। करोना और मध्य एशियाई तनाव के बीच अर्थव्यवस्था की स्थिरता भी मोदीजी के दूरदृष्टि से लिये गये निर्णयों के कारण है।
जहाँ पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था डगमगा रही है वहीं भारत की अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। भारत अब दुनियाँ की चौथी अर्थ व्यवस्था है और तीसरी पर आने की राह पर चल रहा है। हाल ही दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भी भारत की अंतराष्ट्रीय सामर्थ्य की प्रशंसा सभी देशों ने की। देश के भीतर समृद्धि और अंतराष्ट्रीय साख बढ़ने के पीछे मोदीजी की भविष्य दृष्टि और उसके अनुरूप यथेष्ट निर्णय लेना ही है।
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मध्य प्रदेश सरकार उनके जन्मदिन से सेवा संकल्प अभियान आरंभ कर रही है। यह अभियान पूरे एक माह चलेगा। इसमें सरकार और संगठन जनता के बीच होगा। यह सेवा संकल्प अभियान उभयपक्षीय है। इसमें सरकार अपनी योजनाएँ और उनका क्रियान्वयन भी जनता के सामने लेकर जायेगी और इसके साथ जन सामान्य की समस्याएँ भी सुनेगी। सरकार यह प्रयास भी करेगी कि जनता की जो समस्याएँ सामने आईं हैं उनका समाधान तुरन्त हो जाय। निसंदेह एक जनोन्मुखी सरकार का यह प्रयास सराहनीय है और श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर इसका शुभारंभ उनके व्यक्तित्व के अनुरूप भी है।
– रमेश शर्मा

