प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य ने इस दिशा में एक स्पष्ट राष्ट्रीय संकल्प लिया है। अब इस संकल्प को जनभागीदारी की शक्ति में बदलना होगा। 2047 का भारत आज की हमारी आदतों, नीतियों और निर्णयों से बनेगा।
विकसित भारत, 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के सामूहिक स्वप्न, संकल्प और सामर्थ्य का नाम है। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब देश केवल दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो, इतना ही पर्याप्त नहीं होगा। विकसित भारत का अर्थ होगा ऐसा भारत, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचा हो, रोजगार और उद्यम के पर्याप्त अवसर हों, गांव और शहर दोनों समृद्ध हों, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता विश्वस्तरीय हो, तकनीक जनसामान्य के जीवन को सरल बनाए, भारत रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर हो और प्रत्येक भारतीय अपने राष्ट्र की क्षमता पर गर्व और अपने भविष्य पर विश्वास कर सके।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में भारत ने इस दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, पर लक्ष्य जितना बड़ा है, उसकी राह उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नीति बनाने की नहीं बल्कि नीति को जमीन पर उतारने की है। यही विकसित भारत की यात्रा का निर्णायक चरण होगा।
शहरों का विस्तार या सुनियोजित शहरीकरण
भारत के विकास की सबसे बड़ी प्रयोगशाला उसके शहर बनने जा रहे हैं। देश में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की खोज में बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर आ रहे हैं, किंतु यदि शहरों का विस्तार बिना दीर्घकालीन योजना के हुआ तो यही विकास भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।

आज अनेक शहरों में ट्रैफिक जाम, जलभराव, प्रदूषण, पार्किंग की कमी, अनियमित निर्माण, कचरा प्रबंधन की समस्या और सार्वजनिक परिवहन का अभाव दिखाई देता है। कहीं सड़क बनने के बाद सीवर लाइन डाली जाती है और फिर सड़क खोदी जाती है। कहीं आवासीय क्षेत्रों के बीच व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कहीं भविष्य की जनसंख्या और यातायात को ध्यान में रखे बिना कॉलोनियां विकसित हो जाती हैं। यह केवल अव्यवस्था का प्रश्न नहीं है। यह नगर नियोजन की दीर्घकालीन दृष्टि का प्रश्न है। नगर रचना विभागों को केवल नक्शे पास करने वाली संस्थाओं के रूप में नहीं बल्कि अगले
25-50 वर्षों के शहर की कल्पना करने वाले रणनीतिक संस्थानों के रूप में विकसित करना होगा। किसी शहर की मास्टर प्लानिंग केवल वर्तमान आवश्यकताओं पर नहीं बल्कि उसकी भविष्य की जनसंख्या, रोजगार, परिवहन, जल, ऊर्जा, पर्यावरण और डिजिटल अवसंरचना को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। विकसित भारत के शहर केवल बड़े नहीं बल्कि रहने योग्य, टिकाऊ, सुरक्षित और उत्पादक होने चाहिए।
2025-26 के बजट में राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन के माध्यम से फाउंडेशनल जियोस्पेशियल इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा विकसित करने तथा पीएम गति शक्ति के उपयोग से लैंड रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण, अर्बन प्लानिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के डिजाइन को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। यह भविष्य के शहरों को केवल कंक्रीट के विस्तार के बजाय डाटा-ड्रिवन और प्लेंड अर्बन ग्रोथ की दिशा में ले जाने की क्षमता रखता है।
नीति की कमी नहीं, क्रियान्वयन की गुणवत्ता बड़ी चुनौती
भारत में नीतियों और योजनाओं की कमी नहीं है। समस्या कई बार नीति से अधिक उसके क्रियान्वयन में दिखाई देती है। केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नीति जब राज्य, जिला, नगर निकाय और स्थानीय प्रशासन तक पहुंचती है, तब उसकी गति और गुणवत्ता में अंतर दिखाई देने लगता है।
भ्रष्टाचार, विभागीय समन्वय की कमी, अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं, उत्तरदायित्व का अभाव और तकनीकी क्षमता की कमी विकास की गति को प्रभावित करते हैं। हमें यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक हानि नहीं करता, वह विकास का समय भी चुराता है। एक परियोजना में देरी का अर्थ है नागरिकों के लिए देर से सड़क, देर से अस्पताल, देर से रोजगार और देर से बेहतर जीवन। इसलिए विकसित भारत के लिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध केवल कानून नहीं बल्कि प्रक्रियागत पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी भी आवश्यक है। यही कारण है कि डिजिटल गवर्नेंस, डीबीटी, ऑनलाइन सेवाएं, जीईएम, डिजिटल भुगतान, आधार-आधारित सेवाएं, पीएफएमएस जैसी व्यवस्थाओं ने शासन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब अगला कदम एआई, डेटा एनालिटिक्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को स्थानीय शासन तक पहुंचाने का होना चाहिए।
मोदी सरकार की दिशा, नीति से मिशन तक
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकास को अलग-अलग योजनाओं के बजाय व्यापक राष्ट्रीय अभियानों से जोड़ने का प्रयास किया है। मेक इन इंडिया ने विनिर्माण की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा, डिजिटल इंडिया ने डिजिटल शासन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति दी, स्टार्टअप इंडिया ने उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा दिया, स्किल इंडिया ने युवाओं की रोजगार क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया और पीएम गति शक्ति ने बुनियादी ढांचे की योजना को एकीकृत दृष्टिकोण देने का प्रयास किया। इसी प्रकार विकसित भारत का लक्ष्य केवल जीडीपी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें बुनियादी ढांचा, सामाजिक विकास, तकनीक, ऊर्जा, विनिर्माण, कृषि, रक्षा, महिला सशक्तीकरण, युवा शक्ति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, सभी को एक साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। आज भारत में एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेनें, मेट्रो नेटवर्क, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, यूपीआई, नए हवाई अड्डे, बंदरगाह, औद्योगिक कॉरिडोर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहा परिवर्तन इस व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा है, किंतु इन उपलब्धियों को अंतिम मंजिल मानना भूल होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पहला चरण है, उसे कुशलता से चलाना, उसका रखरखाव करना और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवा देना अगला चरण है। यही भारत की अगली बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
विकसित भारत का अर्थ, विकसित नागरिक
हम प्राय: विकसित भारत को जीडीपी, एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन या आधुनिक शहरों के संदर्भ में देखते हैं, परंतु किसी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके नागरिकों की क्षमता और आत्मविश्वास में दिखाई देती है। जब भारत का युवा विश्व की किसी कम्पनी में नेतृत्व करेगा, जब भारतीय वैज्ञानिक वैश्विक समस्याओं का समाधान देंगे, जब भारतीय उद्यमी दुनिया के बाजारों में प्रतिस्पर्धा करेंगे, जब भारतीय प्रोफेशनल विदेशों में सम्मान और प्रभाव के साथ अपनी पहचान बनाएंगे- तब विकसित भारत की वास्तविक शक्ति दिखाई देगी।
एक सशक्त विकसित भारत का अर्थ है कि दुनिया में भारतीय पासपोर्ट के साथ केवल यात्रा करने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि ज्ञान, कौशल, पूंजी, तकनीक और नेतृत्व की शक्ति लेकर चलने वाला नागरिक पहचाना जाए। भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति बढ़ेगी तो विदेशों में रहने वाले भारतीयों की प्रतिष्ठा और प्रभाव भी बढ़ेगा। भारतीय युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्हें यह महसूस होगा कि वे केवल अवसरों की खोज करने वाले नागरिक नहीं बल्कि अवसर पैदा करने वाले राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं।
विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक
विकसित भारत तभी सफल होगा जब विकास दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरु या हैदराबाद तक सीमित न रहे। उत्तर प्रदेश का जिला मुख्यालय, बिहार का कस्बा, राजस्थान का गांव, पूर्वोत्तर का छोटा शहर और आदिवासी क्षेत्र भी इस विकास यात्रा के समान भागीदार बनें।
इसके लिए जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट प्लानिंग, स्थानीय आर्थिक गतिविधियों की पहचान, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन, डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर कनेक्टिविटी और कौशल विकास को प्राथमिकता देनी होगी।
भारत की वास्तविक आर्थिक शक्ति उसके लाखों छोटे उद्यमों, किसानों, कारीगरों, स्टार्टअप्स, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय व्यवसायों में है। इसलिए विकसित भारत का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें गांव भारत की कमजोरी नहीं, भारत की नई विकास शक्ति बनें।
केवल सरकार नहीं, समाज भी जिम्मेदार
यहां सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न आता है, क्या विकसित भारत केवल सरकार बना सकती है? उत्तर है, नहीं। सरकार दिशा दे सकती है, नीतियां बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है और संस्थागत ढांचा तैयार कर सकती है, पर सड़क पर यातायात नियमों का पालन नागरिक को करना होगा। शहर को स्वच्छ नागरिक को रखना होगा। कर का भुगतान नागरिक को करना होगा। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से नागरिक को मना करना होगा। युवा को कौशल सीखना होगा। उद्यमी को रोजगार पैदा करना होगा। शिक्षक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी। वैज्ञानिक को नवाचार करना होगा।
अर्थात विकसित भारत की सबसे बड़ी परियोजना कोई एक्सप्रेसवे या औद्योगिक कॉरिडोर नहीं है। सबसे बड़ी परियोजना है, विकसित नागरिक का निर्माण।
2047 की तैयारी आज से
2047 अभी दूर दिखाई देता है, पर राष्ट्र निर्माण के लिए 21 वर्ष बहुत लम्बा समय नहीं है। आज जो शहर बनाए जाएंगे, वही 2047 के शहर होंगे। आज जो बच्चे स्कूल में हैं, वही 2047 के वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी, शिक्षक और जनप्रतिनिधि होंगे। आज जो संस्थाएं हम बनाएंगे, वही भविष्य के भारत की संस्थागत क्षमता तय करेंगी।
इसलिए हमें पांच स्तरों पर एक साथ काम करना होगा- दीर्घकालीन योजना, पारदर्शी शासन, तेज क्रियान्वयन, तकनीक का व्यापक उपयोग और नागरिक भागीदारी। अच्छी बात यह है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में शासन को इसी दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कई ऐसे संस्थागत और तकनीकी प्रयोग किए हैं, जिनका उद्देश्य केवल योजना बनाना नहीं बल्कि योजना, क्रियान्वयन और परिणाम को एक-दूसरे से जोड़ना है।
इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान है। परम्परागत व्यवस्था में अलग-अलग विभाग अपने-अपने स्तर पर सड़क, रेल, बंदरगाह, बिजली या पाइपलाइन की योजना बनाते थे, जिससे समन्वय की कमी के कारण लागत और समय दोनों बढ़ते थे।

पीएम गति शक्ति ने विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों की परियोजनाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर इस DEPARTMENT SILO को तोड़नेका प्रयास किया है। इसमें विभिन्न अवसंरचनात्मक परियोजनाओं से जुड़े हजारों डेटा लेयर्स को एक साथ लाकर योजना और क्रियान्वयन को अधिक समन्वित बनाया गया है। इसी सोच को नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी ने आगे बढ़ाया। इसमें केवल नीति की घोषणा नहीं की गई बल्कि 2030 तक लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक मानकों के करीब लाने, भारत की लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स स्थिति को बेहतर करने और डाटा-ड्रिवन डिसीजन सर्पोट मैकेनिज्म विकसित करने जैसे स्पष्ट लक्ष्य और एक्शन प्लान निर्धारित किए गए।UNIFIED LOGISTICS INTERFACE PLATFORM ( ULIP), E- LOGS और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक एकीकृत और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
विकसित भारत: एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, राष्ट्रीय जनांदोलन
विकसित भारत का सपना इसलिए असाधारण है क्योंकि यह केवल सरकार का सपना नहीं है। यह उस किसान का सपना है जो अपनी उपज का बेहतर मूल्य चाहता है, उस युवा का सपना है जो विश्वस्तरीय रोजगार चाहता है, उस महिला का सपना है जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहती है, उस उद्यमी का सपना है जो वैश्विक कम्पनी बनाना चाहता है, उस वैज्ञानिक का सपना है जो भारत से दुनिया को समाधान देना चाहता है और उस सामान्य
नागरिक का सपना है जो सुरक्षित, स्वच्छ, समृद्ध और सम्मानजनक जीवन चाहता है।
यदि हम दूरदर्शी नगर बनाएंगे तो भविष्य की पीढ़ियां बेहतर जीवन पाएंगी। यदि हम पारदर्शी व्यवस्था बनाएंगे तो विकास की गति बढ़ेगी। यदि हम कौशल और शिक्षा में निवेश करेंगे तो भारत विश्व की प्रतिभा शक्ति बनेगा। यदि हम आत्मनिर्भरता और नवाचार को अपनाएंगे तो भारत केवल बाजार नहीं, वैश्विक समाधान का केंद्र बनेगा। विकसित भारत का निर्माण सरकार करेगी, परंतु विकसित भारत को सफल भारत बनाने का दायित्व समाज और प्रत्येक नागरिक का होगा।
मोदी सरकार ने इस दिशा में आधार तैयार किया है। अब राज्यों, स्थानीय प्रशासन, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और नागरिक समाज को मिलकर इसकी डिलीवरी कैपेसिटी को मजबूत करना होगा क्योंकि 2047 का विकसित भारत केवल अच्छी नीतियों से नहीं बनेगा, वह अच्छी नीतियों के लगातार, पारदर्शी और परिणामकारी क्रियान्वयन से बनेगा। यह समय केवल विकसित भारत की कल्पना करने का नहीं है। यह समय अपने हिस्से का विकसित भारत बनाने का है क्योंकि 2047 का भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है और उसमें हमारा योगदान ही हमारी आने वाली पीढ़ियों की पहचान बनेगा।
डॉ. शिवेश प्रताप

