कश्मीरी युवा नई दिशा की ओर

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जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण राज्य में राज्य से संबंधित विषयों पर विपरीत विचार और दृष्टिकोण रखने वाले दो राजनीतिक दलों की गठबंधन की सरकार अंततः 3 वर्षों  बाद टूट गई। गठबंधन में साथी रही भाजपा ने गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला पिछले माह लिया। सरकार से समर्थन वापस लेने के कई कारण भाजपा ने बताए, जिनमें से देश की अखण्डता और सुरक्षा सबसे ऊपर थी। इन 3 वर्षों में भी वैसे जहां तक देश की सुरक्षा की बात थी तो सामरिक दृष्टि से केन्द्र सरकार और भारतीय सुरक्षा बलों ने कोई ढील जम्मू-कश्मीर राज्य में नहीं बरती। लेकिन फिर भी जहां तक राज्य के भीतर विशेषकर कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था और अराजक तत्वों से निपटने का सवाल था तो राज्य में मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ्ती हमेशा से ही असमंजस की स्थिति में रहीं।

देर आए, दुरुस्त आए !

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       वर्ष 2015 में जम्मू-कश्मीर राज्य ने अपना मत स्पष्ट तौर से प्रकट करते हुए जम्मू संभाग में भाजपा और कश्मीर घाटी में पीडीपी को राज्य की जिम्मेदारी सौंपी। अलगाववाद, आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर राज्य की समस्याओं को लेकर बिलकुल विपरीत विचार रखने वाले दोनों दलों ने जनादेश का…

जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति एवं अनुच्छेद ३५ (ए)

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१५ अगस्त १९४७ को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के साथ ही अंग्रेजों और कुछ स्वार्थी राजनेताओं ने पंथ के नाम पर देश को दो हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्से को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर पाकिस्तान बना दिया गया। स्वतंत्रता के समय भारत में कुल ५६५ से भी अधिक रि

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