सुबह तो हुई…!

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ट्रेनें कब की बंद हो चुकी थीं। मुंबई की खासियत है कि हर बरसात एक-दो दिन के लिए ट्रेनों को आराम देती है। लोग भी ऐसी अनचाही छुट्टी को खूब मनाते हैं। पर यह दौर तो अभी-अभी आकर गुजर चुका था....फिर भी चारों ओर पानी ही पानी....बारिश है कि..रुकने का नाम ही नहीं लेती। एक मटमैला सागर शहर में पसर रहा था।

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