तोहफा

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‘मम्मी!’ कांच के गिलासों में बर्फ डालती शोभा ने आंखें उठायीं तो बबलू फिर खड़ा था, ‘मम्मी, अजू भी जा रहा है।’थकान और निराशा से बोझिल उसकी आवाज रुआंसी हो आयी थी।

कपड़े

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कपड़े पहन आया तो अब्दुल ने दस रुपये भी दे दिये और प्यार से कहा कि मेम साहब को सलाम कर, जा।’ अति कृतज्ञ या अति दयनीय भाव से सिर झुकाए, उसने मुझे सलाम किया। जाते हुए उसका एक हाथ कमीज की जेब पर था जिसमें दस रूपये अभी-अभी रखे थे उसने।...

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