श्री अथर्वशीर्ष के श्री गणेश

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गागर में सागर की उक्ति को सागर करता हुआ अथर्वशीर्ष भारतीय दार्शनिक चिंतन का अनुपम उदाहरण है। धर्म, कर्मकांड, एवं उपासना का सारमूल संक्षिप्त संस्कारण अथर्वशीर्ष योग, अध्यात्म एवं ज्ञान विज्ञान के रहस्यों से भरा है। दस श्लोकों का अथर्वशीर्ष श्री गणेश आराधना का स्तोत्र है।

पं. दीनदयालजी का एकात्म मानववाद

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भारतीय स्वरूप में श्रम के आधिक्य मूल्य का शोषण प्रारंभ से अंत तक होता है। किन्तु संन्यास अवस्था में पहुंचने के पश्चात यज्ञ करके, समूची अर्जित सम्पत्ति निर्धनों के बीच दान देकर वल्कल वस्त्र पहनकर संन्यास के लिए निकल जाता है। यह संचय और वितरण का माध्यम दुनिया की किसी संस्कृति में उदाहरण स्वरूप भी सुनने को नहीं मिलता है।

उत्तर प्रदेश की सन्त परम्परा

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उत्तर प्रदेश की सन्त परम्परा भगीरथी परम्परा है । वाल्मीकि, भारद्वाज, याज्ञवल्क्य, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र जैसे ऋषि‡मुनियों के ज्ञान से पोषित परम्परा ने ‘भक्ति काल’ में जिस उत्कर्ष को छुआ, उसमें तत्कालीन परिस्थितियों, विषम राजनैतिक वातावरण के बीच जन-सामान्य की निराशा और

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