भारत में बसंतोत्सव – तन रंग लो जी मन रंग लो

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आज बिरज में होरी रे रसिया, आज बिरज में होरी रे रसिया कौन के हाथ कनक पिचकारी, कौन के हाथ कमोरी रे रसिया। कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी, राधा के हाथ कमोरी रे रसिया। होली के दिनों में यह गीत होली का एक प्रतीक गीत बन जाता है। होलिका दहन…

भारत में बसंतोत्सव – समरसता और लोकमंगल पर्व

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होली एक लोक उत्सव है जिसमे प्रकृति भी शामिल होती है। बसंत ऋतु की मादकता सर्वत्र दिखाई देती है। यह ऋतु मनुष्य के व्यवहार में आये अहंकार को भी तोड़ती है। कोई शिष्ट नही होता कोई विशिष्ट नही होता। यह बसंतोत्सव और विशेषत: होली की विशेषता होती है। गांवों में…

भारत में बसंतोत्सव – पुराणों में होली

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दशहरा, दीपावली और होली भारत के तीन महत्वपूर्ण लोक उत्सव हैं। दशहरा शक्ति और शौर्य का उत्सव है, असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव है। दीपावली अज्ञानता पर ज्ञान और अंधकार पर प्रकाश का उत्सव है, जो सुख-समृद्धि के प्रतीक है। होली अन्याय पर न्याय और ऋतुराज बसंत के…

प्रकृति का कोई राग ही है रंजना पोहनकर की कला

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वह संगीतकारों के परिवार में पैदा हुईं। उनके पिता श्री कृष्णराव मजुमदार देवास दरबार के प्रसिद्ध गायक उस्ताद रजब अली साहब के शिष्य थे। घर में शास्त्रीय संगीत का वातावरण बचपन से ही मिला और विवाह भी अजय पोहनकर परिवार में हुआ जो आज भी शास्त्रीय गायन में प्रमुख स्थान रखता है।

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