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विवेकानंद युथ कनेक्ट फाउंडेशन द्वारा मुंबई के समुद्र और समुद्री तट को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाने के लिये केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकाय को जागृत कर उनसे इस कार्य हेतू संरचनात्मक, समन्वयपूर्व कार्य कराने हेतू प्रयास किये जा रहे है।

मुंबई शहर भारत देश का सबसे महत्वपूर्ण शहर माना जाता है। यह शहर  भारत के औद्योगिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक  प्रगति का प्रमुख केंद्र रहा है।

मुंबई का प्राकृतिक महत्व आप सब जानते ही है।

167 किमी का समुद्र तट, सैकड़ो वर्ग किमी का प्राकृतिक जंगल, वन्य जीव, पशु, पक्षी, समुद्री जैवविविधता, ऐसा लगता है ईश्वर ने इस शहर को विशेष प्राकृतिक वरदान दिए है।

परंतु गत 25 -30 वर्षो से इस शहर के अनियंत्रित, अमानवीय विस्तार, मनुष्य की अगणित लालसा और लापरवाही ने इस शहर के प्राकृतिक सौंदर्य को अभिशापित कर दिया है।

31 मई 1893 जब इसी शहर से समुद्री मार्ग से स्वामी विवेकानंद जी  ने शिकागो के लिये प्रस्थान किया था या  महात्मा गांधी जी, हरे कृष्णा परिवार के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद जी जब जुहू बीच पर  सुबह वॉक करते थे तब शायद ही उन्हे लगा होगा कि मुंबई के निले शुभ्र समुद्र को मुंबईकर प्रदूषित कर काला कर देंगे।

मैं गत 14 वर्षो से नित्य जुहू बीच पर वॉक करता हूं। मैने यह देखा है कि मानसून में जून से सितंबर तक 4 महिने मुंबई की सारे बीचेस और समुद्री तट की हालत दुनिया के सबसे गंदे, प्रदूषित समुद्र में हो जाती है।

लाखो टन प्लास्टिक और कचरा समुद्र तट पर समुद्र की लहरे ले आती है। मानो मुंबई का समुद्र तट कचरे का डम्पिंग ग्राउंड हो गया हो।

इस प्लास्टिक और कचरे को इस 167 किमी समुद्री तट से उठाकर इसे प्रक्रिया कर उपयोग में लाना या नष्ट करना यह लोकल बॉडीज की जिम्मेदारी होती है। किंतु इस कार्य हेतू आवश्यक सामग्री, तंत्रज्ञान, प्रशिक्षित लोग और राजकीय प्रबल इच्छाशक्ति का अभाव से केवल 30 % ही प्लास्टिक और कचरा उठाया जाता है और बाकी सारा समुद्र में समा जाता है अगले वर्ष वापस आने के लिए।

यह हो गई प्लास्टिक की समस्या। अब जानते है मुंबई की बारीश। मुंबई देश के सबसे ज्यादा पर्जन्य प्राप्त होने वाला शहर है। और मुंबई की समुद्र को और खाड़ियों को मुंबई की अति प्रदूषित नदीयां और नाले इस बारिश के पानी के साथ सारा कचरा, प्लास्टिक, सीवेज, रासायनिक, औद्योगिक प्रदूषण द्रव्य ले कर समा जाती है।

मानो मुंबई का समुद्र  गटर  का पाणी, नाले से प्राप्त सीवेज, रासायनिक प्रदूषित पानी का ही समुद्र हो। पुरा समुद्र काला, प्रदूषित विशाल गटर बन जाता है।

यह मानसून के 4 महिने मानो समुद्र तट, बीचेस पर जाना एक शाप हो।

हर रोज 2 करोड़ मुंबईकर के सामने गत 25-30 वर्ष से समुद्र में मुंबई के गटर, नाले, प्रदूषित नदीयां गंदा प्रदूषित पानी, प्लास्टिक, कचरा, सीवेज ले कर चौबीसों घंटे इसे अविरत प्रदूषित करती है और लोग और प्रशासन आखे बंद कर इसे नजरअंदाज कर रहे है।

यह स्थिती बदलनी चाहिए

दिन में अगर कोई यात्री मुंबई अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लँड होता है तो वह यह जरूर देखता है कि मुंबई तट पर आने तक जो समुद्र नीला और शानदार लगता है, मुंबई करीब आते ही वह काले गटर की तरह दिखता है।

मुंबई के समुद्री पानी की शुद्धता जब जांची जाती है तो  इसमे मनुष्य, पशु, पक्षी और समुद्री जीव सबके लिए हानिकारक तत्व भारी मात्रा में पाए जाते है।

और सबसे आश्चर्यजनक यह है कि इससे किसीं को कोई समस्या नही है,

मानो सब कुछ ठीक है। न प्रशासन, न राजनैतिक नेतृत्व न मुंबई की जनता,

मानो मुंबईकर इसे कोई बड़ी समस्या मानते ही नहीं।

यह स्थिती विवेकानंद युथ कनेक्ट फाउन्डेशन “प्रोजेक्ट ब्लू” के माध्यम से बदलना चाहता है।

स्थिती कैसे बदलेगी ?

1) वसई – विरार, मीरा – भायंदर, मुंबई महानगर पालिका, नवी मुंबई, पनवेल, ठाणे, कल्याण – डोंबिवली महानगरपालिका,  मुंबई महानगर प्राधिकरण, सरकार  और केंद्र सरकार एक टीम बनकर, समन्वय से  एक साथ काम करे। अगले दस साल की योजना बनाए और इस 167 किमी समुद्र तट पर आनेवाला हर एक प्लास्टिक और कचरे का छोटा से छोटा टुकड़ा  पुरी तरह से उठाया जाए, कोई वापस समुद्र में न जा पाये। यह सारी लोकल बॉडीज एक साथ प्रबल इच्छाशक्ति के साथ उच्च प्राथमिकता देकर करे।

2) मुंबई के 167 किमी समुद्र तट पर समुद्र में प्लास्टिक और कचरा लेकर जानेवाले हर रास्ते और कारण को 100 प्रतिशत रोका जाए, प्रतिबंधात्मक उपाय किए जाए। प्लास्टिक और कचरे का कोई कण समुद्र में जा न पाए।

3) मुंबई के समुद्र और खाड़ियों को मिलने वाले  प्रदूषित नाले, नदी का पानी बिना रिसायकल किए, शुद्धता ट्रीटमेंट किए समुद्र में ना छोड़ा जाए।

4) इस विषय में जनजागरण हेतु स्कूल, कॉलेजेस, पब्लिक प्लेसेस, सरकारी, निम्न सरकारी,  कॉर्पोरेट और सामाजिक, अध्यात्मिक संस्था की इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

यह एक सरकारी प्रोजेक्ट बनकर रह गया तो इसकी सफलता खतरे में पड़ जाएगी।

यह एक जनभागीदारी वाला प्रोजेक्ट बने, जनअभियान बने। इसकी सफलता या असफलता हमारी सफलता या असफलता है यह भावना जनमानस की बने, यह प्रयास आवश्यक है।

विवेकानंद युथ कनेक्ट फाउन्डेशन इस “प्रोजेक्ट ब्लू”  अभियान के माध्यम से मुंबई महानगर प्राधिकरण के क्षेत्र में आने वाले हर जनप्रतिनिधी से संपर्क कर मुंबई समुद्र के  स्वच्छता मिशन की आवश्यकता से अवगत कराएगा।

स्कूल, कॉलेज, बीचेस पर जनजागृती हेतु अलग – अलग कार्यक्रम करेगा।

प्रधानमंत्री जी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जी से मिलकर उनसे इस प्रकार के केंद्र, राज्य और लोकल बॉडीज की समन्वय टीम स्थापित कर इस मानव निर्मित प्राकृतिक आपदा से मुकाबला करने हेतु निवेदन करेगा।

मुंबई क्षेत्र में हर क्षेत्र के प्रभावी व्यक्तित्व से इस कार्य हेतु वीडियों संदेश और समर्थन प्राप्त किया जायेगा। मीडिया और डिजिटल माध्यम, सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग कर “उठो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य तक न पहुंच जाओ” इस स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणादायी संदेश को आत्मसात कर लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।

(लेखक विवेकानंद युथ कनेक्ट फाउन्डेशन के संस्थापक है)

This Post Has One Comment

  1. Good initiative sir.
    Really we understand the depth of issue.
    We really want to join your activities please update your address so my colleague and me can join…
    Regards
    Ashok Waghmare

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