ज्योतिरादित्य सिंधिया का मध्य प्रदेश में जोरदार स्वागत, बीजेपी मुख्यालय पर बोले “मैं खुद को बीजेपी को सौंपता हूं”

पूर्व कांग्रेस नेता और वर्तमान बीजेपी राज्यसभा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे ने मध्य प्रदेश राजनीति को हिलाकर रख दिया यू कहें तो मध्य प्रदेश कांग्रेस की नींव हिलाकर रख दिया। होली के दूसरे दिन बीजेपी में शामिल होने के बाद गुरुवार को अपने गृह राज्य पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया का जोरदार स्वागत किया गया, उनके स्वागत के लिए हजारों की संख्या में समर्थक माला और फूल लेकर तैयार थे और सबकी बस यही कामना थी कि उनका फूल महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंच जाये। हर कोई उनसे मिलने को लालायित होता नजर आ रहा था। वहीं सिंधिया भी खुले दिल से सभी का स्वागत कर रहे थे वह हर किसी से हाथ मिलने की कोशिश कर रहे थे और सभी को गले भी लगा रहे थे।

स्वागत समारोह के बाद सिंधिया सीधे मध्य प्रदेश के बीजेपी मुख्यालय पहुचें, उनके लिए यह पल काफी यादगार और उत्साहित करने वाला था। इस दौरान पार्टी मुख्यालय पर भी उनका स्वागत किया गया, जिसके बाद सिंधिया ने सभी पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का बार बार धन्यवाद किया और कहा कि इन लोगों के आशिर्वाद की वजह से आज मैं बीजेपी के साथ जुड़ा हूं। सिंधिया ने कहा कि वह पुराना सब कुछ छोड़ कर अपने जीवन में आगे निकल चुके है वह अब खुद को बीजेपी को सौंपते है। ज्योतिरादित्य इस बयान के साथ ही भावुक हो गये और उनकी आखों में मानों आंसू आ गये।

बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य ने कहा कि उन्होने करीब 18 सालों तक एक पार्टी को परिवार मानकर उसकी सेवा की, हर समय वह पार्टी के साथ खड़े रहे यही नहीं उनके पिता जी ने भी पार्टी के लिए बहुत मेहनत की थी जिसके बाद कांग्रेस ने पूरे देश में शासन किया था लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया है अब यह कांग्रेस पूरी तरह से बदल चुकी है।

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ चुकी है क्योंकि ज्योतिरादित्य के साथ साथ 22 और विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। ज्योतिरादित्य के बीजेपी में शामिल होने के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि मध्य प्रदेश में फिर से बीजेपी की सरकार बन सकती है। हालांकि अभी तक राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ इस बात का दावा कर रहे है कि उनके पास बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की संख्या पर्याप्त है।

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