संतों की हत्या और विकृत राजनीति

पालघर और बुलंदशहर में हुई संतों की बीभत्स हत्याओं पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच ट्विटर पर ठन गई। योगी ने  कहा, इसे राजनीतिक रंग देने वाली ठाकरे की वैचारिक (कु)दृष्टि को क्या कहा जाए? निःसंदेह यह ठाकरे के बदले हुए राजनीतिक संस्कारों की परिचायक है और यही  तुष्टिकरण का प्रवेश द्वार है।”

महाराष्ट्र के पालघर में निर्मोही अखाड़े के दो साधुओं की दिन-दहाड़े भीड़ द्वारा  हत्या के बाद मचे राजनीतिक बवाल की लपटें थमी भी नहीं थीं कि उत्तर प्रदेश के  बुलंदशहर जनपद में एक मंदिर के दो साधुओं की निर्मम हत्या से देश एकबारगी कांप  गया। पालघर के सामाजिक-राजनीतिक तानेबाने में पुलिस की उपस्थिति में धार्मिक  विद्वेष की ओर संकेत करती घटना का पूरा असर बुलंदशहर के साधु हत्याकांड पर भी  पड़ता हुआ नजर आ रहा था। परंतु, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त  रवैये के चलते अपराध का छः घंटे के भीतर न केवल पर्दाफाश हो गया बल्कि अभियुक्त को भी पुलिस ने पकड़ लिया। एक के बाद एक हुई इन दर्दनाक घटनाओं ने राजनीति के विकृत होते जा रहे चेहरे को भी उजागर कर दिया है।

पालघर में 16 अप्रैल की रात भीड़ ने दो संतों को पीट-पीटकर मार डाला था। दोनों संत मुंबई से सूरत अपने गुरू के अंतिम संस्कार में जा रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते पुलिस ने इन्हें हाइवे पर जाने से रोक दिया। फिर इको कार में सवार साधु  ग्रामीण इलाके की तरफ मुड़ गए जहां भीड़ की हिंसा के शिकार हो गए। पुलिस की मानें तो अफवाह के कारण साधु और ड्राइवर भीड़ के शिकार हुए। भीड़ ने चोर समझ कर  साधुओं की गाड़ी रोकी थी। लेकिन हमला पुलिस की उपस्थिति में हुआ और संतों को बचाने के लिए पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की, न ही भीड़ को हटाया। देशभर में इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। मीडिया में ईसाई मिशनरी के पालघर में बढ़ते प्रभुत्व से भी इस घटना को जोड़ा गया था।

तब, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘पालघर, महाराष्ट्र में हुई जूना अखाड़ा के संतों- स्वामी कल्पवृक्ष गिरि जी, स्वामी सुशील गिरि जी व उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े जी की हत्या के सम्बंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जी से बात की और घटना के जिम्मेदार तत्वों के   खिलाफ कठोर कार्रवाई हेतु आग्रह किया।’ आगे योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ‘महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा यह बताया गया कि कुछ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं तथा शेष को चिह्नित कर सभी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।’ नाथपंथ के सबसे बड़े  मठ का मुखिया होने के नाते योगी की चिंता स्वाभाविक थी।

दस दिन बाद ही बुलंदशहर के अनूपशहर थाना क्षेत्र के गांव पगोना में स्थित शिव मंदिर में देर रात दो साधुओं की गला रेतकर हत्या कर दी गई। जिस युवक पर हत्या का आरोप है वह भी ग्रामीणों के सहयोग से जल्द पकड़ लिया गया। नशे के आदी अभियुक्त ने साधुओं का चिमटा चुराया था, जिस पर उन्होंने उसे काफी बुरा-भला कहा था। बुलंदशहर एसएसपी के अनुसार, ‘यह तलवार लेकर आया और दोनों बाबाओं की हत्या कर दी। ग्रामीणों ने इसे तलवार लेकर गांव से बाहर जाते हुए देखा था।’

लेकिन लगातार ऐसी घटनाओं से संत समाज उद्धेलित हो गया। संतों ने अपने त्वरित आरोप में कहा कि साधुओं पर हमलों की लगातार घटती घटनाएं किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘योगी आदित्यनाथ की सरकार में संतों की हत्या होना कई सवाल खड़े करता है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन है कि वे संतों की हत्या के मामले की जांच सीबीआई से कराएं।’ इस माहौल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शिवसेना को जहां योगी सरकार पर पलटवार का अवसर मिल गया वहीं, गठबंधन सरकार के घटक दल कांग्रेस सहित उप्र के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को भी योगी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया। हालांकि दोनों घटनाओं की प्रकृति किसी भी तरह एक जैसी नहीं थी।

शिवसेना की ओर से सांसद संजय राऊत ने ट्वीट कर हमला बोला तो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री योगी को फोन करके महाराष्ट्र की तर्ज पर कार्रवाई करने की बात कही। संजय राऊत ने योगी आदित्यनाथ पर पालघर की घटना को सांप्रदायिक बनाने का आरोप लगाया था। शिवसेना नेता के इस ट्वीट पर जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, ‘संजय राऊत जी, संतों की बर्बर हत्या पर चिंता करना राजनीति लगती है? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  जी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जी को फोन किया क्योंकि पालघर के साधु निर्मोही अखाड़ा से संबंधित थे। सोचिये, राजनीति कौन कर रहा है?’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पालघर में हुई संतों की बीभत्स हत्या पर चिंता व्यक्त करने को राजनीति कहने वाली आपकी वैचारिक (कु)दृष्टि को क्या कहा जाए? कुसंस्कारों में ‘रक्त स्नान’ करती आपकी टिप्पणी, आपके बदले हुए राजनीतिक संस्कारों की परिचायक है. निःसंदेह यही तुष्टिकरण का प्रवेश द्वार है।’

संतों की हत्या पर की कार्रवाई की जानकारी देते हुए सीएम कार्यालय के द्वारा किए गए ट्वीट में कहा गया कि ‘योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून का राज है। यहां कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाता है। बुलंदशहर की घटना में त्वरित कार्रवाई हुई और चंद घंटों के भीतर ही आरोपी को गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र संभालें, यूपी की चिंता न करें।’ मुख्यमंत्री योगी के इस इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर कई घंटे तक योगी हैं तो न्याय है का हैशटैग ट्रेंड करता रहा।

कांग्रेस नेता और पूर्वी उप्र प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘अप्रैल के पहले 15 दिनों में ही यूपी में सौ लोगों की हत्या हो गई। तीन दिन पहले एटा में पचौरी परिवार के 5 लोगों के शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए। कोई नहीं जानता उनके साथ क्या हुआ? आज बुलंदशहर में एक मंदिर में सो रहे दो साधुओं को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। ऐसे जघन्य अपराधों की गहराई से जांच होनी चाहिए और इस समय किसी को भी इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। निष्पक्ष जांच करके पूरा सच प्रदेश के समक्ष लाना चाहिए। यह सरकार की ज़िम्मेदारी है।’

सपा नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट में लिखा, ‘उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मंदिर परिसर में दो साधुओं की नृशंस हत्या अति निंदनीय व दुखद है। इस प्रकार की हत्याओं का राजनीतिकरण न करके, इनके पीछे की हिंसक मनोवृत्ति के मूल कारण या आपराधिक कारण की गहरी तलाश करने की आवश्यकता होती है। इसी आधार पर समय रहते न्यायोचित कार्रवाई करनी चाहिए।’ लेकिन, योगी की धुआंधार सख्त कार्यशैली और त्वरित कारर्वाई के चलते विपक्ष का हमला भोथरा होता नजर आ रहा है और बुलंदशहर ह्त्याकांड ठंडे बस्ते में चला गया है। दूसरी ओर, उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पालघर घटना की कोर्ट की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई जांच की मांग की गई है, साथ ही मामले को महाराष्ट्र से दिल्ली ट्रांसफर कर दिल्ली में ट्रायल चलाने की गुहार लगाई गई है। जिस पर उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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