नीतिगत निर्णय निर्माण व् कोरोना वायरस में ताईवान की भूमिका

निर्वर्तमान समय सम्पूर्ण विश्व के लिए अत्यंत अविश्वसनीय सा है जो घटित हो रहा है जो कल्पना से परे की बात है | 31 दिसंबर, 2019 को, चीन ने वुहान, हुबेई प्रांत में एक अज्ञात वायरल निमोनिया के फैलने के 27 मामलों की सूचना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को दी। यह जानकारी उन पहली वाली जानकारी की तरह लग रही थी जैसे बीते कालखंड कई देश अनुभव कर चुके थे | जैसे कई बीमारियॉं अचानक आती है व् कुछ विशेष परिस्थिति में जनजीवन को नुकसान पहुंचा कर समाप्त हो जाती है यह एक सामान्य सी लगने वाली जानकारी प्रतीत हुई किन्तु यह सामान्य वायरस नहीं था | यह आने वाले
कालखण्ड में एक नया व् भयावय इतिहास लिखने वाला था |

आज सम्पूर्ण विश्वभर कोरोना महामारी से निश्चित आंकड़े तक़रीबन लगभग 5,407,613,केस आज तक रिकॉर्ड हुए जिसमें तकरीबन 345,059 मौत , स्वस्थ हुए 2,168,563, व् तक़रीबन 2,893,991 बीमार लोगो का आंकड़ा है जो निरन्तर प्रतिदिन बढ़ रहा है | हमारे अध्ययन का उदेश्य है की चीन से निकलयह वायरस किसे और कितना प्रभावित कर रहा है | यदि आर्थिक व् राजनितिक दिष्टिकोण से देखा जाये तो हम देखते है की इस वायरस ने अति विकसित देशों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है जैसे अमेरिका केस 1,643,246, मौत 97,720, ब्राज़ील केस 363,211, मौत 22,666 ,रूस केस 344,481 मौत 3,541, ब्रिटेन केस 260,916 मौत 36,875 स्पेन केस 235,772 मौत 32,752, इटली केस 229,858 मौत 32,785 इसी तरह फ़्रांस ,जर्मनी ,टर्की इत्यादि | यह किन्तु यदि हम आगे इसी श्रंखला में शोथ करते है तो पाते है की एशिया व् अफ़्रीकी महादीप के देशों में इस महामारी के आँकड़े एक अलग ही चित्र चित्रित करती है जैसे भारत जोकि चीन के पश्चात् जनसंख्या के आंकड़े में दूसरे स्थान पर आता है व् जहाँ की राजनीतिक , सामाजिक, धार्मिक व् आर्थिक अत्यन्त विषमतापूर्ण है |

जहाँ बहुदलीय व्यवस्था व मिश्रित शासन व्यवस्था विधमान है 30 जनवरी 2020 को केरल में भारत के कोरोनोवायरस का पहला मामला सामने आया है, जो एक मेडिकल छात्रा जो वुहान विश्वविद्यालय में पढ़ मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी को नॉवेल कोरोनावायरस मरीज का एक सकारात्मक मामला पाया गया |

इसी तरह ऐसे असंख्य देश जो गरीबी से जुंझ रहे है वहाँ बड़ी देर से आये | जिसमें कई देशों ने आश्चर्यजनक तरीके से महामारी से छुटकारा व् उस पर नियन्त्रण हासिल कर विश्व के सामने एक बड़ा उदहारण प्रस्तुत वैसे तो कई नाम लिए जैसे मॉरिटानिया केस 237 मौत 6, यमन केस 222 ,मौत 42 , बर्मा 201 मौत 6, यूगांडा केस 198 मौत 0 ,लीबिया केस 75 मौत 0 3 , अंगोला केस 69 मौत 04 ,इरीट्रिया केस 39 मौत 0 भूटान केस 20 मौत 0 , ताईवान केस 441 मौत 7 , इत्यादि ऐसे असंख्य नाम है जहाँ मामलों की संख्या भी कम है और मृत्युदर भी कम जिन्होंने इन छ: महीनों ना केवल नियंत्रण पाया अपितु विश्व के लिए एक मिसाल भी प्रस्तुत की | वैसे तो ऐसे देशो के कई उदहारण है किन्तु आजकल चारों तरफ ताईवान की कोरोना पर विजय के कारणों पर अध्ययन व् विश्लेषण करने का प्रयास करेंगे | जैसा की सभी जानते है की ताईवान की चीन से यदि आप ताइवान द्वीप और मुख्य भूमि चीन के बीच सबसे छोटी दूरी तो यह लगभग 110 किमी है, जो कि अधिकांश मिसाइलों की सीमा के भीतर है।ताइवान चीन का हिस्सा है, और यह दुनिया की सभी प्रमुख शक्ति द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य है।

ताइवान बेल्जियम की तुलना में थोड़ा बड़ा है, लेकिन 23 मिलियन से अधिक लोगों की आबादी है! ताइवान को दुनिया में सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक बनाता है, ताइवान उन कुछ देशों में से एक है जो अभी भी भाषा के लिखित रूप में पारंपरिक चीनी अक्षरों का उपयोग करते हैं। इन दिनों, लगभग हर देश में जहाँ लोग चीनी भाषा बोलते हैं, सरलीकृत चीनी अक्षरों का उपयोग किया जाता है। अर्थात इस तुलना से समझा जा सकता है की ताइवान चीन के काफी करीब का घनी आबादी वाला देश है जहाँ के अधिकतर लोग चीन मे रोजगार करते है और प्रत्येक दिन का चीन से आवागमन लगा रहता है |

अतः इस शोध में हम के अंतर्गत चीन के वूहान से निकल कर जिस वायरस ने दुनिया को लॉकडाउन करवा दिया ताइवान ने कभी अपने देश मैं लॉकडाउन नहीं किया आखिर क्यू और कैसे ताइवान ने इस महामारी पर विजय हासिल की ताइवान ने जब गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS) के 2003 के प्रकोप के दौरान, 346 मामलों और 37 मौतों (2) का अनुभव किया। 2003 में SARS के 8,000 मामले विश्व स्तर पर सामने आए और दुनिया भर में 774 लोगों के प्रकोप का दावा किया गया, ताइवान सरकार 2019 में निकटवर्ती चीन में उभरते संक्रामक रोग के बारे में विशेष रूप से सतर्क थी। ताइवान की चीन के साथ निकटता और 2 देशों के बीच यात्रियों की आवृत्ति ने चिंता पैदा की। वायरस फैल सकता है। क्योंकि चीन में रहने और अध्ययन करने वाले लाखों ताइवान के नागरिकों को 11 जनवरी के राष्ट्रपति चुनाव के लिए घर लौटने की उम्मीद थी और नव वर्ष की छुट्टी पर आसन्न था और ताइवान चीन के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य है, यह एक चिंता का विषय था जिसने सरकार के सार्वजनिक इंतजाम की चिंता ने बीमारी की रोकथाम के उपायों को बढ़ा दिया। SARS के प्रकोप को झेल चुके ताइवान ने अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कन्ट्रोल केन्द्र की स्थापना |

ताइवान में अधिकारियों ने इस क्षेत्र से आने-जाने वाली उड़ानों को रोकना शुरू कर दिया और यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी। इसने एक सप्ताह बाद अपने मूल्यांकन मानदंडों का विस्तार किया और लक्षणों को दिखाने वाले किसी भी व्यक्ति को क्वारंटाइन करना शुरू कर दिया।साथ ही साथ ताइवान सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपने सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर, NHCC के भीतर एक शाखा को 20 जनवरी तक सक्रिय कर दिया,सभी यात्रियों से यात्रा वृतान्त विस्तार से लिया जाने लगा और उस पर कड़ी नज़र भी रखी जाने लगी | ताइवान सरकार का महत्वपूर्ण फैसला अपने देश की सिमा रेखाओं अर्थात बॉर्डर को सील करना था साथ ही उन्होंने देश की सीमा पर तैनात कर्मचारी व् अधिकारियो को सुरक्षित तरीके से क्वारंटाइन करना प्रारम्भ कर दिया सभी सन्दिग्ध व् संक्रमित पाए जाने की शंका भर से ही यात्रिओ को अस्पतालों व् घरो में ही क्वारंटाइन करना शुरू कर दिया यह ताइवान का प्रारम्भिक दौर था जब संक्रमित लोगो का पता तकनीकी माध्यमों द्वारा लगाया जा रहा थी | ताइवान की अन्य सरकारी एजेंसियों ने भी संकट के दौरान विशेषज्ञता और क्षमता बढ़ाई। ताइवान CECC ने संगरोध निगरानी के लिए नागरिक और कानून प्रवर्तन विभागों के साथ भागीदारी की, जैसा कि वर्णित है। इसके अलावा, CECC ने NHI को NHI के केंद्रीकृत क्लाउड-आधारित स्वास्थ्य रिकॉर्ड के पूरक के लिए सीमा शुल्क और आव्रजन के डेटाबेस से चीन की यात्रा के हाल के इतिहास को एकीकृत करने के लिए कहा।

सीमा शुल्क और आव्रजन डेटा एकीकृत किए जाने के बाद, एनएचआई प्रणाली ने रिकॉर्डों को चिह्नित किया ताकि मेडिकल प्रदाताओं को मरीजों की यात्रा के इतिहास के बारे में पता चलेगा बाद में, ताइवान सीडीसी को सूचित किए गए सभी पुष्टि और संदिग्ध मामले के संपर्कों को भी जोड़ा गया था। 2003 SARS प्रकोप के बाद, ताइवान, जापान और एशिया के कई अन्य देशों में व्यक्तियों ने इन्फ्लूएंजा के मौसम के दौरान या भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों में, जैसे कि सबवे (11) में मेडिकल फेस मास्क पहनना शुरू किया। मास्क पहनना भी ठंड से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अच्छा अभ्यास माना जाता है, और एलर्जी या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों को मास्क (12) पहनने की उम्मीद होती है। इसलिए, कई नागरिकों ने घर पर आपूर्ति की थी या जब एक बार महामारी की घोषणा की गई थी, तो ताइवान सीडीसी ने सलाह दी थी कि स्वस्थ व्यक्तियों को अस्पतालों या भीड़, संलग्न स्थानों पर जाने के अलावा, मास्क की आवश्यकता नहीं है, मास्क प्राप्त करने के लिए। महामारी के कारण मास्क की मांग में वृद्धि को देखते हुए, ताइवान के प्रधानमंत्री ने जनवरी के अंत में मुखौटा निर्यात को निलंबित कर दिया। व् सभी को मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया

चीन ने 11 जनवरी को उपन्यास कोरोनावायरस के पूर्ण जीनोमिक अनुक्रम को जारी किया और 12 जनवरी तक, ताइवान प्रयोगशाला टीम ने 24 घंटे के प्रारंभिक परीक्षण से छोटा एक उन्नत, 4-घंटे परीक्षण किट पेश किया। ताइवान ने अपने परीक्षण क्षमता की उच्च कोटि का विकसित किया प्रारम्भ में उन्होंने एक दिन मैं 1-100 नमूनों को परीक्षण करना प्रारम्भ किया जोकि डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित आदर्श मानक के बराबर है। प्रयोगशाला कर्मचारियों ने परीक्षण की गति और क्षमता में तेजी जारी रखी, परीक्षण करने की क्षमता विकसित की , फरवरी के अंत तक, ताइवान सार्वजनिक और अनुबंधित निजी प्रयोगशालाओं का उपयोग करके 2,450 नमूनों / दिन का परीक्षण करने में सक्षम हो गया था ।साथ ही साथ ताइवान ने अपनी पारम्परिक औषधि प्रक्रियाओ महत्व दिया जिसे मरीजों के ठीक होने का कर्म तेज़ी से बढ़ने लगा| वैश्विक महामारी के 18 फरवरी 18 के दिन, डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दुनिया भर में 16,000 मामले और 2,000 मौतें हुईं। ताइवान में पुष्टि किए गए 22 मामलों में, स्थानीय प्रसारण 5 तक सीमित थे, मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों के बीच। एक विश्वसनीय अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के बावजूद, जिसने प्रकोप की गतिशीलता का अनुमान लगाया था और भविष्यवाणी की थी कि चीन के बाहर दूसरा सबसे अधिक मामले होने की सम्भावना जताई गई किन्तु ताइवान की क्रियाशीलता व् सजक व्यवहारिक दृष्टिकोण ने सभी के अनुमानों को एक तरीके से झुठला दिया

निष्कर्ष
ताइवान के द्वारा SARS के दौरान निर्मित सीख व् सावधानी और वर्तमान महामारी के दौरान कुछ सफल रणनीतियाँ अन्य सरकारों द्वारा नीतिगत दृष्टिकोणों व् सूचनाओं ने एक सकारात्मक भूमिका निभाई | इन देशों में लोग राज्य और स्थानीकार्यप्रणाली पर बहुत भरोसा करते हैं, आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को आश्वस्त करने के लिए अंतर-सरकारी और अंतर- सरकारी समन्वय और पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। एक एकीकृत दृष्टिकोण जो सार्वजनिक
स्वास्थ्य, मानव सेवाओं और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को शामिल करता है, भविष्य की घटनाओं के लिए लचीलापन और बेहतर राष्ट्र तैयार कर सकता है। ताइवान न केवल लोकतंत्र का एक अंग है, बल्कि इस बात का जीता जागता सबूत है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक शासन के माध्यम से एक उभरते हुए वायरस पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक निरंकुश उपायों की आवश्यकता नहीं है।

वैसे ताइवान एक अकेला देश नहीं है जो अपनी सजगता से कोरोना महामारी से तेज़ी से सुरक्षित करने में लगा हुआ है ऐसे अनेक देश है जहाँ संसाधन अति विकसित नहीं है नाही वह विकसित देश है किन्तु वह कोरोना महामारी इतनी नहीं फ़ैल पाई जैसे की विकसित देशो मई जैसे इरीट्रिया , बोत्स्वाना , भूटान जाम्बिआ,फिजी ,नामीबिया पश्चिमी सीरिया इत्यादि | इन देशों की स्थिति को देख कर लगता है की यह चीन की आर्थिक व्यवस्था के लिए बड़ी मार्केट नहीं है | ऐसे असंख्य तथ्य व् कारन है जो चीन के द्वारा निकले वायरस ने सम्पूर्ण विश्व के जीवन को बर्बाद कर दिया उसका असर इन देशो में कम देखने को मिला
और अगर हुआ भी तो उन्होंने अपनी पारम्परिक व्यवस्था से इस महामारी पर नियंत्रण भी हारिल कर लिया | इनमें कई देश वो भी हैं जिन्हों को WHO ने मान्यता भी नहीं दी है उन्ही देशों मैं से एक देश ताइवान है अत ताइवान की महत्वता इसलिए बढ़ जाती है क्यूंकि ताइवान चीन का सबसे नज़दीकी देश है मनो चीन व् ताइवान के मध्य यात्रियों का आवागम दैनिक दिनचर्या का हिस्सा हो और ऐसी परस्थिति मैं ताइवान का इस महामारी से अपने देश को बचाना एक चमत्कार से कुछ कम नहीं |

लेखक – डॉ चन्द्रकांता के माथुर
राजनीति विश्लेषक/ प्रोफ़ेसर दिल्ली विश्वविद्यालय

This Post Has One Comment

  1. Ravinder Kumar Jain

    Excellent Behan ji.

आपकी प्रतिक्रिया...