महाराष्ट्र गठबंधन में कुछ तो गड़बड़, सामना में कांग्रेस को बताया पुरानी खटिया

  • महाराष्ट्र गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं!
  • सामना के द्वारा शिवसेना ने कांग्रेस पर बोला हमला
  • शिवसेना ने कांग्रेस को बताया पुरानी खटिया
  • अशोक चव्हाण और बाला साहेब थोरात पर बोला हमला   
महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना के साथ कांग्रेस और एनसीपी भी गठबंधन में है लेकिन पिछले काफी दिनों से यह खबर सामने आ रही है कि अब गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और इसकी एक झलक मंगलवार को शिवसेना के मुख पत्र सामना में देखने को मिला। मंगलवार को शिवसेना ने मुख पत्र सामना के द्वारा कांग्रेस पर हमला बोला और महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता अशोक चव्हाण और बाला साहेब थोरात को निशाने पर लिया। संपादकीय में लिखा गया कि कांग्रेस पार्टी अच्छा काम कर रही है लेकिन समय-समय पर यह पुरानी खटिया (कांग्रेस) रह रह कर कुरकुर की आवाज़ करती है। खटिया पुरानी है लेकिन यह ऐतिहासिक विरासत है इस पुरानी खाट पर करवट बदलने वाले लोग भी बहुत हैं इसलिए यह कुरकुर की आवाज़ करती है।
संपादकीय में के द्वारा उद्धव सरकार को भी सचेत रहने का निर्देश दिया गया और लिखा गया, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को आघाडी सरकार में ऐसी कुरकुराहट से निपटने की तैयारी रखनी चाहिए क्योंकि घर में भाई भाई के बीच झगड़ा होता रहता है तो फिर इस राज्य में तो तीन दलों की सरकार है, थोड़ी बहुत कुरकुरा हट तो होती ही रहेगी। अशोक चव्हाण ने हाल ही में एक निजी अखबार को इंटरव्यू दिया था जिसको लेकर संपादकीय में उन पर निशाना साधा गया और कहा की एक साक्षात्कार के दौरान अशोक चव्हाण भी कुरकुराते नजर आए हालांकि सरकार को इससे कोई खतरा नहीं है।
सूत्रों की माने तो महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में कांग्रेस को सबसे कम तवज्जो मिलता है और इस बात को एक बयान के दौरान राहुल गांधी ने भी स्वीकार किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि महाराष्ट्र में उनकी पार्टी को फैसला लेने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस पार्टी सिर्फ सरकार को समर्थन दे रही है जबकि कांग्रेस के कुछ बड़े नेता महाराष्ट्र सरकार में पिछले दरवाज़े से घुसने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए तमाम तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं लेकिन उद्धव ठाकरे उन्हें सफल नहीं होने दे रहे हैं।
अगर इन तीनों पार्टियों के इतिहास पर नजर डालें तो इनके हमेशा से अपने एजेंडे बिल्कुल ही अलग रहे हैं और यह आपस में कभी मेल नहीं खा सकते। शिवसेना की शुरुआत हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ने की थी और उन्होंने हमेशा से हिंदुओं का मुद्दा उठाया था और उसी को प्राथमिकता दी थी जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक सेक्युलर के तौर पर खुद को पेश करने की कोशिश करती रहती है लेकिन उसके एजेंडे कभी साफ नहीं हो पाए जबकि महाराष्ट्र कि एनसीपी महाराष्ट्र को लेकर हमेशा सियासत करती रहती है अब ऐसे में अगर यह तीनों पार्टियाँ मिलकर सरकार चलाती हैं तो इनमें मतभेद होना बहुत आम बात है तीनों पार्टियाँ चाह कर भी एक मुद्दे पर कभी भी सहमत नहीं हो सकती।

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