महाराष्ट्र सरकार का चीन को बड़ा झटका, 5 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगी रोक

  • महाराष्ट्र सरकार का चीन को बड़ा झटका
  • महाराष्ट्र में 3 चीनीं कंपनियों के प्रोजेक्ट पर लगी रोक
  • 5 हजार करोड़ का महाराष्ट्र में किया था निवेश
भारत चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद लगातार भारत से चीनी कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हिंसक झड़प के तुरंत बाद सरकार की तरफ से बीएसएनल और एमटीएनएल के साथ हुए चीनी कंपनियों के करार को रद्द कर दिया गया था इसके साथ ही सरकार ने बीएसएनएल को आदेश दिया था कि चीनी उपकरणों का इस्तेमाल कम से कम किया जाए। रेलवे की तरफ से भी चीनी कंपनियों के साथ हुए करार को रद्द कर दिया गया था और इन सब के साथ साथ महाराष्ट्र सरकार ने भी चीन को बड़ा झटका देते हुए एक साथ तीन चीनी कंपनियों के प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है।
 
उद्धव सरकार मोदी के साथ
भारत चीन के बीच हुई खूनी झड़प के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पार्टियों के साथ एक बैठक बुलाई थी जिसमें सभी से सहयोग करने की भी बात कही थी। सर्वदलीय बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने खुले आम सरकार को समर्थन देते हुए कहा था कि सरकार को चीन को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए और महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर सरकार के साथ है। महाराष्ट्र में चीनी कंपनियों के प्रोजेक्ट पर रोक लगाने को उद्धव ठाकरे का केंद्र के प्रति सहयोग के तौर पर भी देखा जा रहा है।
 
 
महाराष्ट्र में चीनी प्रोजेक्ट पर लगी रोक
महाराष्ट्र सरकार ने 15 जून को चीन की तीन कंपनियों के साथ 5000 करोड़ का करार किया था। उद्धव सरकार की तरफ से मैग्नेटिक महाराष्ट्र के दौरान इन चीनी कंपनियों से डील की गई थी लेकिन चीनी कंपनियों के साथ जारी इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई है। चीन की इन कंपनियों के साथ महाराष्ट्र इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 5000 करोड़ रुपए के निवेश का फैसला लिया गया था लेकिन उस दौरान हालात कुछ और थे। भारत चीन सीमा पर हिंसक झड़प के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से यह बयान जारी किया गया है कि कोई भी सरकार चीनी कंपनियों के साथ कोई एग्रीमेंट ना करें और जितने भी पुराने एग्रीमेंट हुए हैं उन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
 
भारत-चीन हिंसक झड़प
आपको बता दें कि 15 जून की रात भारत और चीन सीमा पर सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि भारतीय जवानों ने भी बड़ी वीरता से दुश्मनों का मुकाबला किया और इस दौरान चीन के 45 से अधिक सैनिक मार गिराए, हालांकि चीन ने इसकी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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