सूर्य ग्रहण एवं प्राकृतिक आपदाएं

सूर्य और राहु की युति से अभी 3 महीने तक प्राकृतिक आपदाओं का दौर जारी रहेगा और भारतवर्ष के लिए यह समय अस्थिरता से भरा रहेगा। प्राकृतिक आपदाओं एवं अमंगल की स्थिति बनी रहेगी। सावधानी अपेक्षित है।

ऐसी मान्यता है कि जब अपनी आकाशगंगा में उच्च राशि मिथुन का राहु और स्वराशि शनि का प्रभाव बढ़ जाए तो प्राकृतिक आपदाओं का दौर चलता है। लगभग 15 महीने से राहु अपनी उच्च राशि मिथुन का है जो रविवार 20 सितंबर 2020 तक रहेगा। अपनी आकाशगंगा में वर्तमान समय में राहु अपनी उच्च राशि मिथुन का है तथा शनि स्वराशि मकर का है। दिनांक 24 जनवरी 2020 ई. को ढाई वर्ष के लिए शनि अपनी स्वराशि मकर में आया हुआ है। राहु एवं शनि के कुप्रभाव से भारत सहित दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं का दौर रहेगा। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में उल्लिखित है कि शनि के पिता सूर्य हैं। शास्त्र सम्मत है कि सूर्य के प्रभाव से शनि अस्त हो जाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के विषय में यह कहना उचित होगा कि राहु का अपनी उच्च राशि मिथुन में होना तथा शनि का मकर राशि में होना प्राकृतिक आपदा को जन्म देने का प्रमुख कारक ग्रह माना जाएगा। ऐसी भी मान्यता है कि प्रत्येक 100 वर्ष के अंतराल पर भयंकर प्राकृतिक आपदाओं का दौर भारत सहित पूरे विश्व में देखने को मिलता रहा है। वही स्थिति 2020 ई. में भी है।

आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि, 21 जून को सुबह 10:30 पर सूर्य ग्रहण लगा था। इसका मध्य दिन में 12:18 पर और मोक्ष दोपहर 2:04 पर हुआ था। इसका सूतक 20 जून को रात्रि 10:31 से शुरू हुआ था। वास्तव में सूर्य ग्रहण का प्रभाव भी भारतवर्ष पर पड़ेगा। इस समय सूर्य मिथुन राशि में ही विद्यमान है जिसमें राहु बैठा हुआ है। सूर्य और राहु की युति से अभी 3 महीने तक प्राकृतिक आपदाओं का दौर जारी रहेगा और भारतवर्ष के लिए यह समय अस्थिरता से भरा रहेगा। प्राकृतिक आपदाओं एवं अमंगल की स्थिति बनी रहेगी। सावधानी अपेक्षित है।

अपनी आकाशगंगा में सूर्य का महत्व सबसे अधिक है। नौ ग्रहों में सूर्य को राजा ग्रह माना गया है। इस काल में सूर्य के प्रभाव से एक ओर संयोगवश नव संवत्सर 2077 का राजा बुध एवं मंत्री चंद्रमा है। ये दोनों ग्रह सूर्य के परम मित्र माने गए हैं। इन दोनों ग्रहों का सहयोग भी अपेक्षित रहेगा। लेकिन खास बात यह है कि प्राकृतिक आपदाओं से भारत को निजात मिलने में अभी लगभग 3 माह का समय लगेगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि जब राहु 20 सितंबर 2020 ई. को वृषभ राशि में प्रवेश करेगा उस समय भारत सहित संपूर्ण विश्व से प्राकृतिक आपदा का शनैः शनैः खत्म होना शुरू हो जाएगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि अभी 3 माह का इंतजार करना पड़ेगा।

आइए जानते हैं कि अपनी आकाशगंगा में सूर्य का क्या महत्व है और सूर्य का प्रकाश जब पृथ्वी पर पड़ता है तो मानव जीवन पर सूर्य का क्या असर होता है? ब्रह्मांड में अपनी आकाशगंगा जैसे अनेक तारामंडल हैं। सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते रहते हैं। ये सभी सूर्य की निरंतर परिक्रमा करते रहते हैं। हमारी पृथ्वी भी सौरमंडल की एक सदस्य है तथा वह सूर्य से आकर्षित होकर अनवरत उसकी परिक्रमा करती रहती है। पृथ्वी में भी आकर्षण शक्ति है जिसके कारण सूर्य उसे प्रकाश, ताप इत्यादि भेंट करता रहता है। इसके फलस्वरूप पृथ्वी के जीवधारियों में प्राण एवं शक्ति का संचार होता है। ग्रहों में जो ग्रह सूर्य से जितना निकट होता है उसका वेग सूर्य के प्रभाव से उतना ही तेज हो जाता है। सूर्य पूर्व दिशा का स्वामी, अग्नितत्व प्रधान प्रकृति का, पुरुष प्रधान एवं क्षत्रिय गुणों से युक्त होता है। इसका स्वरूप कालिमा के साथ रक्तिमबाहुल्य लिए हुए, भव्य, गंभीरता लिए हुए, प्राकृतिक गुणों से संपन्न, ओजस्वी मुख्य मंडल, पराक्रम से कार्य करने वाले और प्रतिशोध लेने की भावना अत्यंत तीव्र होती है। सूर्य की दृष्टि किसी भी ग्रह पर पड़ने से वह ग्रह अस्त हो जाता है। सूर्य की उच्च राशि मेष और नीच राशि तुला है। अपनी उच्च राशि मेष के सूर्य के साथ बुध के अलावा कोई भी ग्रह बैठा हो तो वह ग्रह अस्त हो जाता है। बुध को राजकुमार ग्रह कहते हैं। यह ग्रह सूर्य के साथ हो तो सूर्य की महादशा काल अथवा अंतर्दशा काल में ’बुध+आदित्य’ योग बनाकर विशेष फलदाई होता है। सूर्य हड्डी इत्यादि का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि पाप ग्रह राहु, शनि एवं सूर्य के प्रभाव से अभी कुछ माह तक प्राकृतिक आपदाओं से रूबरू होना पड़ेगा।

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