पूर्व पीएम अटल बिहारी के करीबी लालजी टंडन का हुआ निधन

  • मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का हुआ निधन
  • पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के थे करीबी
  • लंबी बिमारी के बाद लखनऊ में ली अंतिम सांस
  • मंगलवार शाम तक किया जायेगा अंतिम संस्कार
मध्य प्रदेश के राज्यपाल और बीजेपी नेता लालजी टंडन का मंगलवार सुबह निधन हो गया वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। लालजी टंडन के निधन की वजह से राजनीति जगत में शोक की लहर है और सभी राजनेताओं उनके निधन पर शोक वक्त किया और कहा कि टंडन जी के निधन से राजनीति जगत को नुकसान हुआ है। बीजेपी नेता लालजी टंडन की तबियत बिगड़ने के बाद उन्हे 11 जून को लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका इलाज जारी था। डाक्टरों ने टंडन का बुलेटिन जारी कर एक बार बताया था कि हालात में सुधार नहीं हो रहा है जिससे बाद उन्हे वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन तबियत लगातार बिगड़ती गयी और आखिरकार 21 जुलाई दिन मंगलवार सुबह करीब 5.30 बजे उनका निधन हो गया। 
बीजेपी के वरिष्ट्र नेता लालजी टंडन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक प्रकट किया और लिखा, लालजी टंडन जी को हमेशा उनके कामों के लिए जना जायेगा, टंडन जी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए कड़ी भी मेहनत की थी और पार्टी से लोगों को जोड़ा था। मैं टंडन जी को श्रद्धांजली अर्पित करता हूं। 

लखनऊ के ही रहने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी टंडन के निधन पर शोक प्रकट किया और ट्वीट कर बताया कि लालजी टंडन जी पार्टी कार्यकर्ताओं में भी काफी लोकप्रिय थे। लखनऊ में आज भी उन्हे उनके काम के लिए तारीफ मिलती है। दुख की इस घड़ी में भगवान परिवार को शांति प्रदान करें।

राजनाथ सिंह के पुत्र और नोएडा से विधायक पंकज सिंह ने भी लालजी टंडन के निधन पर दुख जताया और कहा कि आदरणीय टंडन जी का अचानक से जाना देश के साथ साथ पार्टी के लिए भी एक बड़ी क्षति है। मैं टंडन परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। 

लालजी टंडन का जन्म 12 अप्रैल 1935 को लखनऊ में हुआ था उन्होने बहुत की कम उम्र में संघ ज्वाइन कर लिया और समाज सेवा करने में शामिल हो गये। संघ में सेवा कार्य की वजह से लालजी टंडन लोगों को बीच में विख्यात होने लगे। संघ में रहने के दौरान ही लालजी टंडन की मुलाकात अटल बिहारी वाजपेयी जी से हुई थी और बाद में वह अटल जी के करीबीयों में गिने जाने लगे थे। टंडन जी का राजनीतिक करियर 1960 से बतौर पार्षद शुरु हुआ और फिर वह लगातार राजनीति की सीढ़िया चढ़ते गये और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लालजी टंडन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम बदलाव और कड़े फैसलों के लिए भी जाना जाता है। 
साल 2009 में जब अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति से दूरी बना ली और लखनऊ सीट छोड़ दी तब लालजी टंडन को पार्टी ने इस सीट से लोकसभा उम्मीदवार बनाया जहां टंडन को बड़ी जीत हासिल हुई और वह सासंद बन गये। साल 2018 में उन्हे मोदी सरकार की तरफ से बिहार का राज्यपाल बनाया गया और बाद में मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया।    

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