सचिन पायलट की पार्टी में वापसी, गहलोत के निकम्मा वाले बयान को बताया अमर्यादित

  • सचिन पायलट एक महीने बाद दिल्ली से पहुंचे जयपुर
  • अशोक गहलोत के बयान पर जताया दुख
  • राजनीति में विरोध जरुरी लेकिन ना तोड़े मर्यादा-पायलट
  • गहलोत खेमा कर रहा पायलट का विरोध

प्रियंका गांधी की दखल के बाद सचिन पायलट ने बगावत छोड़ दी और पार्टी में वापसी कर रहे है लेकिन अब अशोक गहलोत खेमे के विधायक इसका विरोध कर रहे है उनका कहना है कि बागी विधायकों को वापस क्यों बुलाया जा रहा है जो एक बार पार्टी से बगावत कर सकता है वह समय आने पर कभी भी जा सकता है ऐसे लोगों को पार्टी में वापस नहीं लेना चाहिए। अशोक गहलोत ने इस पर अपने विधायकों से कहा कि यह लोकतंत्र है यहां जनता के हित के लिए कई फैसले दिल पर पत्थर रख कर भी लेने पड़ते है। सचिन पायलट की पार्टी में वापसी आलाकमान की तरफ से तय किया गया है जिसे हम मना नहीं कर सकते। 
 
उधर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा कि सचिन पायलट का पूरा ग्रुप बिना किसी शर्त के वापसी कर रहा है ऐसे में उन्हे पार्टी में जगह दी जा रही है। सुरजेवाला ने पायलट ग्रुप पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हमारी पार्टी दरवाज़े पर आये हुए को वापस नहीं लौटाती। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पायलट वापसी के लिए तैयार हुए है। सचिन पायलट ने करीब एक महीने तक पार्टी से दूरी बना ली थी इस दौरान यह आरोप लग रहे थे कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते है या फिर खुद की पार्टी बना सकते है लेकिन तमाम उतार चढ़ाव के बाद आखिरकार सचिन पायलट ने अपनी ही पार्टी में वापसी कर ली। 
 
सचिन पायलट करीब एक महीने बाद मंगलवार को राजस्थान पहुंचे जहां उन्होने मिडिया से बात की और कहा कि इस पूरे एक महीने में मैंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था जो पार्टी के खिलाफ हो लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने मेरे खिलाफ बयानबाज़ी की जिसका मुझे दुख है लेकिन जनता की सेवा और पार्टी को ध्यान में रखते हुए मैं उसे भूलने की कोशिश करूंगा हालांकि सचिन पायलट ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह अशोक गहलोत की बात कर रहे थे। 
 
अशोक गहलोत के निकम्मा वाले बयान को लेकर जब सचिन पायलट से पूछा गया तो उन्होने कहा कि ऐसे बयान से दुखी हूं क्योंकि मैने कभी भी बयान को लेकर लक्ष्मण रेखा नहीं पा की है और सभी को इसका ध्यान रखना चाहिए। राजनीति में समर्थन और विरोध दोनों जरुरी है लेकिन उसकी एक सीमा होनी चाहिए आप राजनीतिक विरोध को निजी दुश्मनी के तौर पर ना लें। 
 
सचिन पायलट ने करीब एक महीने पहले कुछ विधायकों के साथ पार्टी से बगावत कर दी थी और राजस्थान छोड़ दिल्ली के होटल में डेरा जमा लिया था जिसके बाद से पार्टी की तरफ से उनके खिलाफ जमकर बयानबाज़ी हो रही थी। अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को निकम्मा और अंग्रेजी बोलने वाला तक कह दिया था। सचिन पायलट की बगावत को ज्योतिरादित्य सिंधिया से जोड़ कर देखा जा रहा था और कयास लगाए जा रहे थे कि पायलट अपने खेमें के साथ बीजेपी में शामिल होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अंत में पायलट अपने विधायकों के साथ पार्टी में वापसी कर चुके है। 

आपकी प्रतिक्रिया...