यूपी: स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के विशेष अधिकार से डरेंगे अपराधी

योगी का अलग अंदाज!
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जब से सत्ता संभाली है तब से वह अपने काम को लेकर हमेशा से ही चर्चा में रहते है कोरोना के समय में उनकी चर्चा विदेशों तक हो रही थी और जिस तरह से एक बड़ी जनसंख्या वाले प्रदेश को योगी सरकार ने हैंडल किया वह कई लोगों के लिए सबक बन गया था। योगी सरकार की तुलना अगर पिछली सरकारों से की जाए तो वह बिल्कुल ही अलग रास्ते पर चलने में विश्वास करते है बशर्ते वह रास्ता देश और जनता के हित में होना चाहिए। 
 
उत्तर प्रदेश में स्पेशल सेक्योरिटी फोर्स का गठन 
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फिर से ऐसा ही एक साहसिक कदम उठाया है। राज्य में उत्तर प्रदेश स्पेशल सेक्योरिटी फोर्स (UPSSF) का गठन किया गया है जानकारी के मुताबिक इसकी शक्तियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के समान होंगी और यह फोर्स बिना वारंट किसी को शक की बुनियाद पर गिरफ्तार कर सकती है इतना ही नहीं जरुरत पड़ने पर तलाशी भी ले सकती है इस फोर्स को लेकर सरकार की तरफ से अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है। इस सुरक्षाबल का नेतृत्व एडीजी स्तर का अधिकारी करेगा। उत्तर प्रदेश स्पेशल सेक्योरिटी फोर्स (UPSSF) की तैनाती प्रदेश में जिला व उच्च न्यायालय, प्रशासनिक कार्यालय, मंदिर, मेट्रो, हवाई अड्डा, बैंक और औद्योगिक संस्थानों पर लगाई जायेगी यानी इस फोर्स की तैनाती उन स्थानों पर होगी जहां सुरक्षा की बेहद अहम आवश्यकता होती है।  
 
स्पेशल फोर्स के विशेष अधिकार
योगी सरकार ने 26 जून को ही स्पेशल सेक्योरिटी फोर्स के गठन को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद से काम तेजी से चल रहा था। शुरुआत में इसकी 5 बटालियन गठित की जायेगी और फिर धीरे धीरे इसका विस्तार किया जायेगा। योगी सरकार के मुताबिक इस सुरक्षाबल को सीआईएसएफ की तर्ज पर उच्च ट्रेनिंग और अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जायेगा जिससे यह किसी भी विशेष परिस्थिति से आसानी से निपट सकें। एसएसएफ के खिलाफ बिना सरकार की परमिशन के अदालत भी इनके अधिकारियों के खिलाफ संज्ञान नहीं ले सकेगी। राज्य में कानून व्यवस्था बनी रहे इसके लिए भी इस फोर्स का इस्तेमाल किया जायेगा। इससे पहले यूपी पुलिस, पीएससी और आरआरएफ राज्य की कानून व्यवस्था संभालती थी। इस फोर्स का मुख्यालय लखनऊ में रहेगा। 
 
विपक्ष ने उठाया फोर्स के अधिकार पर सवाल
योगी सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट भी बताया जा रहा है और इस पर काफी समय से काम किया जा रहा था। वहीं फोर्स को मिलने वाले विशेष अधिकार को लेकर भी सवाल उठाया जा रहा है कि अगर बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तार की छूट दी जायेगी तो इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है हालांकि इस पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नही दिया गया है लेकिन यह बात समझने वाली है कि उत्तर प्रदेश में जुर्म का ग्राफ उपर है तो उसे नीचे लाने के लिए सरकार को कुछ कड़े फैसले लेने होंगे क्योंकि कई बार ऐसा हुआ है कि अपराधी सामने होता है लेकिन वारंट ना होने की वजह से उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता और अपराधी भागने या फिर सबूत मिटाने में सफल हो जाता है। 

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