महाराष्ट्र बैंक सेवानिवृत्त संगठन का सामाजिक दृष्टिकोण

बैंक में काम करने वाले कर्मचारी को सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षक माना जाता हैं। यही कर्मचारी सेवानिवृत्ती के बाद अपनी कार्यशक्ति का विनियोग समाज के दुर्बल घटकों के हितों के लिये करता है। इतना ही नहीं उनके लिये कल्याणकारी योजनायें बनाने के लिये सदैव प्रयत्नशील रहता है। इसी तरह के एक आदर्श समाजसेवी संगठन ‘बैंक ऑफ महाराष्ट्र सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन’ के कुशल कार्य का वृत्तांत-

बैंक ऑफ महाराष्ट्र सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन की स्थापना 12 वर्ष पूर्व हुई थी। सामान्यत: कोई भी कर्मचारी संगठन अपने संगठन के सदस्यो के प्रश्नों को हल करने, एक दूसरे की मदद करने, वार्षिक स्नेह सम्मेलन आयोजित करने आदि कार्य करता है। उनका कार्य यहीं तक सीमित होता है।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सेवानिवृत्तों का संगठन इन सभी विषयों से आगे जाकर एक व्यापक स्वरूप में कार्य करता है। इसका एकमात्र कारण यह है कि संस्था ने अपनी स्थापना के समय ही सामाजिक प्रश्नों का व्यापक विचार किया था और अपने कार्यों की एक निश्चित दिशा तय कर रखी थी।

सन 1977 से बैंक ऑफ महाराष्ट्र मे भा. म. सं. द्वारा ‘बैंक और महाराष्ट्र ऑफिसर्स आर्गनाइझेशन’ चलाया जा रहा है। श्री….उर्फ बालासाहब फडणवीस संस्था की स्थापना से इसके मार्गदर्शक रहे। इस संगठन में कार्य करते हुए उन्होंने बैंक के कर्मचारियों को दैनंदिन कार्यों में होनेवाली कठिनाइयों पर ध्यान दिया। और उन्हें दूर करने का प्रयत्न किया। परिणाम स्वरूप इस कार्यकुशल संगठन को कई अधिकारियों का सहयोग मिला। अपने सदस्यों की उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में मदद तो की ही साथ ही उनके व्यक्तिगत कार्यों में भी मदद की। उनके लिये कई कल्याणकारी योजनायें भी बनायी। बैंक की नौकरी के साथ-साथ इन्होंने समाज के दुर्लक्षित लोगों के लिये भी कई कल्याणकारी योजनायें बनाई। सन 1982 में अपंगो को सायकल और अन्य सुविधा साधन भेंट किये। तिल्लारी भूकंप के समय बैंक के कर्मचारियों ने स्वेच्छा से एक महिना उस क्षेत्र में बिताया और वहां के भूकंप पीडितों की मदद की।

इसी दौरान, बैंक के कर्मचारियों को बैकिंग के संबंध में पूरा ज्ञान हो इसी दृष्टिकोन से उन्होंने बैंक से उन्होेंने बैंक से संबंधित कई किताबों और प्रकाशनों को संगठन की ओर से उपलब्ध करवायीं। उनके प्रमोशन के लिये कई मार्गदर्शक शिबिर आयोजित किये। सहकारी बँको कें कर्मचारियो को बैंक के कामकाज की पूर्ण जानकारी होने के लिये मान्यता प्राप्त नायबर की (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिग एज्यूकेशन एण्ड रिसर्च) स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से बैंक के ग्राहकों की समस्याओं को हल करने का उचित मार्गदर्शन दिया जाता है।

सेवा निवृत्ति के बाद भी समाजसेवा करने के अपने उद्देश्य से ये कर्मचारी पीछे नहीं हटे। उन्होंने बारह वर्ष पूर्व सभी स्तर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिये एक संगठन बनाया जिसका नाम था ‘बैंक ऑफ महाराष्ट्र रिटायर्ड एम्प्लॉइज आर्गनेशन’की स्थापना की जब इसकी स्थापना हुई तब इस संगठन का उद्देश्य तब इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को हल करना ही था।

हर शनिवार को सुबह 11 बजे बैठक, होती थी। कामकाज की शुरुवात प्रार्थना से होती थी और चर्चा प्रारंभ की जाती थी। शुरु में 10 से 15 निवृत्त कर्मचारी आते थे। धीरे-धीरे यह संख्या 100 तक पहुंच गयी। बैठक किसी भी एजेंडे पर कार्य नहीं करती सभी अपने अनुभव एक दूसरे के साथ बांटते है। और उस पर चर्चा करते हैं। इसके साथ ही विविध विषयों के विशेषज्ञों के आरोग्य और सामाजिक विषयों पर मार्गदर्शन शिबिर आयोजित किये जाते हैं।

सेवानिवृत्त लोगों को मिलनेवाले लाभ, निवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं का निवारण, बैंक के व्यवस्थापन अधिकारियो के साथ मिलकर सेवानिवृत्त लोगों के प्रश्नों का हल निकालते हैं। इन्ही प्रयत्नों से संगठन ने सेवानिवृत्त लोगों के अस्पताल के खर्चों का वहन करने के लिये पूंजी एकत्र की। सेवानिवृत्तों की जमापूंजी पर अधिक ब्याज दर, बैंक के पहचान पत्र, हॉलिडे होम्स में घूट दिलवायी इसी प्रकार पेशन और महंगाई भत्ते से संबंधित त्रुटियों को दूर करने के लिये संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय मे भी गुहार लगायी है। इससे सेवानिवृत्तों को काफी लाभ हुआ है।

इस संगठन का दायरा सेवानिवृत्त लोगों और उनकी समस्याओं तक ही सीमित नहीं है। समाज के अशिक्षित, दुर्बल, असंघटित और वंचित के लोगों की सेवा करने की भावना से 6-7 वर्ष पूर्व बाळासाहेब फडणवीस ने कार्यकर्ताओं से आव्हाहन किया था कि समाजसेवा करने वाले संगठनों को अधिक आर्थिक मदद करनी चाहिये। यमगरवाडी में कार्य करने वाली गिरीष प्रभुणे की सेवाभावी संस्था (जो कि भटके अनाथ बच्चों के लिये कार्य करती है) को एक लाख रुपयों से सहायता की। सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह करनेवाले इस उपक्रम को ‘सामाजिक कृतज्ञता निधी’ नाम दिया। पहले ही साल इस उपक्रम को काफी अच्छा रिस्पाँस मिला और अब प्रतिवर्ष इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। सभासदों ने अन्य सेवाभावी संस्थाओं से भी मांग की है कि वे भी इसका लाभ उठायें। इसवर्ष यह रकम 5 लाख 70 हजार हो गई है। इसका वितरण अलग-अलग संस्थाओं को किया गया। अब तक पिछले 5-6 सालों में 30 संस्थाओं को 15 लाख से अधिक निधी दी गई है। सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में दुर्बल घटको के लिये काम करने वाली संस्थाओं को मदद की जाती है। संगठन के सदस्य इस प्रकार की संस्थाओं का स्वयं पता लगाते हैं और पदाधिकारियों तक चुनाव हेतु पहुंचाते है। सामाजिक कृतज्ञता निधी को प्रतिवर्ष अच्छा रिस्पान्स मिल रहा है।
अपने उपक्रमशिल योजना में संगठन ने एक कदम और बढ़ाया है। ‘शहर के वेस्ट का बेस्ट उपयोग’ नामक योजना पिछले साल से लागू की जा रही है। समाज में होने वाले विभिन्न शादियों समारोहों में लोगों को साडिया, शर्ट पीस, ड्रेस मटीरियल मिलते है। पतले ही कई कपडे होने के कारण इनका क्या किया जाये सभी को यह प्रश्न सताता है। वनवासी और गरीबों को इसकी बहुत आवश्यकता है। संगठन ने एक उपक्रम चलाया है कि यहां कोई भी उपयोग की हुई वस्तु नहीं देगा। इस योजना को अपेक्षा से अधिक प्रतिक्रियासिल रहा है। संस्था के पास अभी तक 130 शर्ट पीस, 25 पँट पीस, 15 साडियां, 30 सूट पीस और 35 शालें जमा हो चुकी हैं। संगठन के कार्यकर्ताओं ने रायगढ़ जिले के आश्रमों और शालाओं का ये वस्तुएं दी। 30 शर्ट पीस और 35 शाले गडचिरोली के कालापलनी टोला के विद्यार्थियों को भेंट दी।

इस संगठन में अब 2,300 से अधिक सदस्य हैं। सेवानिवृत्त लोगों की समस्याओं से संबंधित, और संगठन, के कार्यों से संबंधित एक वृत्त प्रत्येक तिमाही को भेजा जाता है। संगठन सेवानिवृत्त लोगों के लिये कार्य कर रहा है ऐसा संदेश सभी को मिलने से लोग अधिक प्रतिक्रिया देते हैं। नये सेवानिवृत्त कर्मचारी को इस प्रकार के संगठन में शामिल होने से एक संबल मिलता है कि उसके साथ कई लोग हैं। जो अपने कार्य की सुखद यादें लिये हैं और अपने जीवन के उत्तरार्ध में उनके साथ होंगे। इनकी इसी भावना के कारण संगठन समाज में सक्रिय होता जा रहा है।

श्री. एस. के. तथा बालासाहेब फडणवीस इस संगठन के अध्यक्ष हैं और एस. के. भिडे, कार्याध्यक्ष हैं। ये दो संगठन के संस्थापक भी हैं। देवेन्द्र सोमण संगठन के महासचिव हैं।

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