आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु वस्त्र मंत्रालय कटिबद्ध

भारत सरकार समेत 16 राज्यों ने एक छत के नीचे चार लाख लोगों को कुशल बनाने का संकल्प लिया है। वस्त्र से जुड़े जिन क्षेत्रों में लोगों को कुशल बनाया जाएगा उनमें तैयार परिधान, बुने हुए कपड़े, धातु हस्तकला, हथकरघा, हस्तकला और कालीन शामिल हैं। वस्त्र उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि नए भारत में हम यह सुनिश्चित करें कि अजीविका की इच्छा रखने वाला हर नागरिक कुशल और दक्ष हो।

भारत का कपड़ा क्षेत्र सबसे पुराने उद्योगों में से एक है, जो कई शताब्दियों से स्थापित है। जितना विविध हमारा देश है, उतने ही विविध हमारे पहनावे हैं, जिसमें एक छोर पर लघु उद्योग में हाथ से बने हुए कपड़ों का क्षेत्र हैं, और दूसरे छोर पर फैशनेबल, परिष्कृत,  कपडों का क्षेत्र है। इतनी विविधता दुनिया में कहीं भी देखने को नहीं मिलेगी। भारत में, प्रत्येक राज्य के पास अपना अनूठा कपड़ा है, कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर क्षेत्र में अपनी स्वयं की हथकरघा तकनीक है जो कई अद्वितीय कपड़े बुनने के लिए उपयोग की जाती है। उत्पादन की एक प्रक्रिया के आधार पर उत्पादित कपड़े की विभिन्न श्रेणियों में मिल सेक्टर, पावर लूम और हैंडलूम शामिल हैं।  हथकरघा उद्योग के विभिन्न केंद्रों में सबसे पुराने थ्रो-शटल लूम से लेकर सेमी-आटोमैटिक और ऑटोमैटिक हैंडलूम तक विभिन्न प्रकार के हथकरघों का उपयोग किया जाता है।

पूरी दुनिया में भारत एकमात्र ऐसी जगह है जो विभिन्न बाजार क्षेत्रों के लिए उपयुक्त उत्पादों की एक विस्तृत विविधता का उत्पादन करने की क्षमता रखता है। भारत में पावर लूम, होजरी और बुनाई क्षेत्र कपड़ा क्षेत्र में सबसे बड़ा घटक है। उसके अलावा, वस्त्र उद्योग का कृषि (कपास जैसे कच्चे माल के लिए) और वस्त्रों के मामले में देश की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के साथ निकटता का संबंध अन्य उद्योगों की तुलना में इसे अद्वितीय बनाता है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि कपड़ा क्षेत्र ’आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण है, और सरकार विशेष रूप से कौशल उन्नयन, वित्तीय सहायता और नवीनतम प्रौद्योगिकी के साथ क्षेत्र को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

भारत में कपड़ा और परिधान उद्योग देश का दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदान करने वाला क्षेत्र है (कृषि उद्योग के बाद), जो कि संबद्ध उद्योगों में 4.5 करोड़ लोगों को (जिस में 35.22 लाख हथकरघा श्रमिक हैं) और 6 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है।

बाजार का आकार

वित्त वर्ष 2019 में भारत के कपड़ा उद्योग ने उद्योग के उत्पादन में सात प्रतिशत का योगदान दिया। इसने भारत की जीडीपी(GDP) में दो प्रतिशत का योगदान दिया और वित्त वर्ष 2019 में भारत की निर्यात आय में इस क्षेत्र का योगदान 15 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2019 में घरेलू कपड़ा और परिधान का बाजार अनुमानित 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

कपड़ा क्षेत्र में कपास, मानव निर्मित फाइबर, जूट, सेरीकल्चर शामिल हैं और रेशम, ऊन और उनके उत्पाद और हथकरघा और हस्तशिल्प, भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत वैश्विक जूट उत्पादन में पहले स्थान पर है और वैश्विक कपड़ा और परिधान बाजार में 63 प्रतिशत हिस्सा है। भारत वैश्विक कपड़ा निर्माण में दूसरे और रेशम और कपास उत्पादन में भी दूसरे स्थान पर है।

विदेशी निवेश

उभरते देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भारत की सबसे उदार और पारदर्शी नीतियां हैं। कपड़ा क्षेत्र में FDI(एफडीआई) के लिए भारत एक आशाजनक गंतव्य है। स्वचालित मार्ग के तहत कपड़ा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश की अनुमति है। स्वचालित मार्ग के तहत अनुमत क्षेत्रों में FDI को भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किसी पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में, पिछले कुछ वर्षों में, कपड़ा क्षेत्र में निवेश में तेजी देखी गई है। इस उद्योग ने (रंगे और मुद्रित सहित) मार्च 2020 तक 3.44 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश FDI को आकर्षित किया।

सरकारी पहल और उपलब्धियां

पिछले वर्षों में वस्त्र उद्योग की उपलब्धियों की एक झलक:

तकनीकी टेक्सटाइल्स

स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति के साथ-साथ भारत सरकार ने कपड़ा क्षेत्र के लिए कई निर्यात प्रोत्साहन नीतियां बनाई हैं।

टेक्निकल टेक्सटाइल्स भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र  है, जिसका उपयोग कृषि, सड़क, रेलवे ट्रैक, स्पोर्ट्सवियर, हेल्थ से लेकर बुलेट प्रूफ जैकेट, फायर प्रूफ जैकेट, हाई एल्टीट्यूड गियर और स्पेस एप्लिकेशन के लिए किया जाता है।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में देश को तकनीकी टेक्सटाइल्स में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थान देने के लिए 1480 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ एक राष्ट्रीय तकनीकी कपड़ा मिशन की स्थापना के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। इस मिशन की वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक चार साल की कार्यान्वयन अवधि होगी। मोदी सरकार के सही समय पर इस क्षेत्र के महत्व को समझने से और इस सेक्टर को प्रोत्साहन देने से राष्ट्र को बहुत लाभ होगा।

राष्ट्रीय कपड़ा नीति

राष्ट्रीय कपड़ा नीति (NTP) वर्ष 2000 में तैयार की गई थी। नवीनतम रुझानों के अनुरूप नीति को फिर से तैयार करने की आवश्यकता को देखते हुए, वस्त्र मंत्रालय ने सभी पहलुओं का अध्ययन किया और एक मसौदा और रणनीति प्रस्तुत की है। इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार को बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जा रही है। नई कपड़ा नीति तैयार करने के लिए राज्य सरकारों के सुझावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

जूट कपड़ा उद्योग

जूट कपड़ा उद्योग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह भारत के पूर्वी क्षेत्र में (विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में) प्रमुख उद्योगों में से एक है। यह लगभग 4 मिलियन कृषक परिवारों को आधार देता है। लगभग 2.6 लाख औद्योगिक श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करने और तृतीयक क्षेत्र और संबद्ध गतिविधियों में अन्य 1.4 लाख व्यक्तियों को आजीविका प्रदान करता है।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का मानना है कि घरेलू बाजार के लिए जूट की आवश्यकता में आत्मनिर्भर बनने के अलावा, अगला लक्ष्य जूट और इसके उत्पादों में देश की निर्यात क्षमता को मजबूत करना है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के लिए, जल निकायों के अस्तर, सड़क निर्माण और संरचनाओं के निर्माण में जूट के उपयोग को बढ़ाने की अपार संभावना थी।

देश के इतिहास में पहली बार, कपड़ा मंत्रालय ने कहा है कि वह देश में कच्चे जूट के उत्पादन और उत्पादकता में सुधार के लिए जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से किसानों को प्रमाणित जूट बीज उपलब्ध कराएगा। यह कदम देश में कच्चे जूट के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के महत्व को बल देगा, और उच्च क्वालिटी की उपज को अतिरिक्त मूल्य प्रदान करके प्रधान मंत्री के ’आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगा।

निर्यात संवर्धन (एक्सपोर्ट प्रमोशन)

सितंबर 2019 में, प्री-जीएसटी की अवधि की तुलना में कपड़ा निर्यात में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक्सपोर्ट्स फॉर इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने कपड़ा उद्योग के दो उपक्षेत्रों, तैयार कपडे और मेड टू आर्डर मर्चेंडाइज को प्रोत्साहन देने के लिए दरों में संशोधन किया है। इसके साथ-साथ, सरकार ने 2018-2020 के दौरान निर्यात को बढ़ावा देने, एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने और 80,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित करने के लिए US 31 बिलियन के विशेष पैकेज की घोषणा की। अगस्त 2018 तक, इस स्कीम ने 25,345 करोड़ रुपये और 57.28 बिलियन मूल्य के अतिरिक्त निवेश उत्पन्न किए।

भारत सरकार ने 2022 तक 35 लाख लोगों के लिए रोज़गार सृजित करने और 95,000 करोड़ के निवेश को सक्षम बनाने के लिए अनुमानित प्रौद्योगिकी उन्नति निधि योजना सहित कई उपाय किए हैं।

एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम

कपड़ा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए, कपड़ा मंत्रालय ने एक नया एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम तैयार किया है। यह कार्यक्रम 2017-18 से 2019-20 तक 112 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ प्रमुख ऊन उत्पादक राज्यों में केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। कार्यक्रम को सभी हितधारकों की आवश्यकताओं को शामिल करके ऊन क्षेत्र के विकास के लिए डिज़ाइन किया गया है। जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए प्रधान मंत्री डेवलपमेन्ट प्रोग्राम के अनुसार, वस्त्र मंत्रालय ने पश्मीना ऊन के संवर्धन के लिए कुल वित्तीय 50 करोड़ के आवंटन के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए एक पुनर्निर्माण योजना को मंजूरी दी है। एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम ऊन उत्पादकों से लेकर अंतिम उपयोगकर्ताओं तक ऊन क्षेत्र की पूरी श्रृंखला को सहायता प्रदान करेगा।

माय हैंडलूम एप

7 अगस्त, 2020 को, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर, ’माई हैंडलूम पोर्टल’ का शुभारंभ किया गया। पोर्टल हथकरघा उद्योग से संबंधित सभी सूचनाओं और योजनाओं के लिए एक एकल मंच है। इस पोर्टल को केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा लॉन्च किया गया। यह पोर्टल बुनकरों और हथकरघा उत्पादकों, दोनों के लिए एक वन स्टॉप प्लेटफॉर्म है।

पोर्टल का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत बुनकरों और संगठनों / हथकरघा मालिकों को जानकारी प्राप्त करने, योजनाओं के लिए नामांकन और उनकी उपज के लिए एक मंच प्रदान करना है।

सभी सूचनाओं और नामांकन के लिए केवल एक ’साइन-इन’ के साथ प्लेटफॉर्म का उपयोग करना आसान है। यह देश में कार्यरत सभी हथकरघा योजनाओं के बारे में आधिकारिक जानकारी प्रदान करेगा। आवेदक अपने आवेदनों की वास्तविक स्थिति को अत्यंत पारदर्शिता के साथ ट्रैक कर सकते हैं। पोर्टल उपज का विपणन करने का अवसर भी प्रदान करेगा। इस पोर्टल को ई-ऑफिस और डीबीटी पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इस एप से आने वाले समय में भारतीय हथकरघा और कपड़ा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और विकास होगा।

कौशल विकास

भारत सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2017-18 से 1,300 करोड़ के परिव्यय के साथ ’वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना’ नामक एक नई कौशल विकास योजना को मंजूरी दी। अगस्त 2019 तक देश के 16 राज्यों ने इस योजना के तहत लगभग चार लाख श्रमिकों को सक्षम करने के लिए कपड़ा मंत्रालय के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत सरकार समेत 16 राज्यों ने एक छत के नीचे चार लाख लोगों को कुशल बनाने का संकल्प लिया है। वस्त्र से जुड़े जिन क्षेत्रों में लोगों को कुशल बनाया जाएगा उनमें तैयार परिधान, बुने हुए कपड़े, धातु हस्तकला, हथकरघा, हस्तकला और कालीन शामिल हैं।

वस्त्र उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि नए भारत में हम यह सुनिश्चित करें कि अजीविका की इच्छा रखने वाला हर नागरिक कुशल और दक्ष हो। एक और खुशी की बात यह है कि वस्त्र क्षेत्र में काम करने वालों में 75 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुद्रा योजना में भी 70 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। वस्त्र मंत्रालय ने राज्यों के प्रतिनिधियों को महिलाओं के लिए जिलेवार सिलाई अवसर पर गौर करने का सुझाव भी दिया है। वस्त्र उद्योग में 16 लाख कुशल कामगारों की कमी है। समर्थ योजना के तहत अगले तीन साल में 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (TUFS)

मौजूदा संशोधित, पुनर्निर्मित TUFS के स्थान पर एक संशोधित योजना शुरू करने के केंद्र सरकार के फैसले ने कपड़ा उद्योग को खुश कर दिया है। नई योजना के तहत, दो व्यापक श्रेणियां होंगी – परिधान और तकनीकी वस्त्र, जहां पूंजी निवेश पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

उद्योग क्षेत्र के लोग मानते हैं कि इस योजना से कपड़ा इकाइयों का वित्तीय बोझ कम होगा और क्षेत्र में उच्च निवेश को बढ़ावा मिलेगा। नई योजना विशेष रूप से परिधान उद्योग को प्रोत्साहित करके रोजगार सृजन और निर्यात को लक्षित करती है। यह विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार प्रदान करने और वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगा।

इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क योजना

सरकार इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क के लिए योजना लागू कर रही है, जिसमें भारत सरकार परियोजना लागत का 40% तक अनुदान देने के साथ कपड़ा इकाइयों की स्थापना के लिए विश्व स्तरीय संरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए सहायता प्रदान करती है। कपड़ा मंत्रालय द्वारा SITP के तहत कुल 59 टेक्सटाइल पार्क स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 22 टेक्सटाइल पार्क पूरे हो चुके हैं और बाकी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।

COVID19: पीपीई किट और एन95 मास्क

लॉकडाउन के पहले शून्य पीपीई किट बनाने वाला भारत आज रिकॉर्ड समय में पीपीई के अग्रणी निर्माताओं में से एक है। इसका अधिकतम श्रेय कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को जाता है। अपनी कड़ी मेहनत से हमारे देश को दुनिया में पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनाने के लिए उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जी जान से काम किया है।

सरकार द्वारा इस वर्ष मार्च में शून्य निर्माताओं से, पीपीई किटों के 1,100 से अधिक स्वदेशी निर्माताओं को आज तक विकसित किया गया है और उनमें से अधिकांश MSME क्षेत्र से हैं। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, COVID-19 के लिए पीपीई कवर की क्षमता और उत्पादन मई 2020 के मध्य में प्रति दिन 5 लाख के शिखर को छू गया।

13 सितंबर को, सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य पेशेवरों के उपयोग के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की खरीद शाखा, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को कुल 1.42 करोड़ पीपीई किटों की आपूर्ति की गई है।

इसी तरह, एन -95 मास्क के घरेलू निर्माताओं को लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रोत्साहित किया गया था और परिणामस्वरूप, 13 सितंबर को एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को कुल 2.46 करोड़ एन-95 मास्क की आपूर्ति की गई है।

28 जुलाई से 24 अगस्त तक, पीपीई कवरलैस के निर्यात को प्रति माह 50 लाख तक सीमित मात्रा प्रतिबंध के तहत अनुमति दी गई थी।

भविष्य

भारतीय कपड़ा उद्योग का भविष्य मजबूत घरेलू खपत के साथ-साथ निर्यात की मांग से भरा हुआ है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वस्त्र मंत्री स्मृति ईरानी ने कपड़ा उत्पादन, निर्यात और रोजगार पैदा करने की दृष्टि से जोर दिया है, जिससे युवाओं के लिए  रोजगार के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की परियोजनाएं – स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, मेक इन इंडिया, शून्य दोष-शून्य प्रभाव (पर्यावरण पर) और आदर्श ग्राम पर वस्त्र मंत्रालय का पूरा ध्यान केंद्रित है। निश्चित रूप से भविष्य में भारत के वस्त्र क्षेत्र को अत्यंत लाभ मिलेगा और आने वाले दिनों में यह क्षेत्र ’आत्मनिर्भर भारत’ बनाने में एक बड़ा योगदान देगा।

 

 

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  1. vinod kumar

    1) HHEC आवासीय कालोनी मे आबंटन की क्या प्रक्रिया है ?

    2) क्या HHEC को अपने निगम के कर्मचारियों के अलावा भी क्या किसी अन्य किसी व्यक्ति को भी HHEC आवासीय कालोनी मे मकान आवंटित किया गया है?

    3) HHEC कालोनी से सेवानिवृत्त या सेवा समाप्ति होने के उपरान्त वहां रह रहे कर्मचारियों या उनके परिवार के सदस्यों को किस प्रक्रिया के अनुसार मकान खाली कराया जाता है. और कितना समय दिया जाता है?

    4)HHEC मे अस्थाई कर्मचारियों (आउटसोर्स) को पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी ऐक्ट 1972 के अनुसार पात्र अस्थाई (आउटसोर्स) कर्मचारियों और payment of बोनस ऐक्ट 1965 के अनुसार उनको ग्रेच्युटी और बोनस किन किन पात्र अस्थाई कर्मचारियों (आउटसोर्स) को अभी तक दिया गया है?

    5) HHEC मे सन 2000 से 2019 तक किन किन अस्थाई (आउटसोर्स) कर्मचारियों को निगम मे नियमित किया गया है और किस आधार पर किया गया है ?

    6) अस्थाई (आउटसोर्स) कर्मचारियों की नियुक्तियां कितने वर्ष बाद कर दी जाती है?

    07) HHEC कालोनी मे किसी नियमित कर्मचारियों के अलावा अन्य व्यक्ति को मकान आबंटन किया गया है तो क्या उनसे कोई मासिक किराया भी लिया जाता है. यदि हाँ तो कितना किराया लिया जाता है?

    08)आपके निगम मे कितने मॅनेजमेंट ट्रेनी कितने कितने वर्ष से अभी कार्यरत है और प्रशिक्षण वर्ष पूर्ण करने के बाद निगम मे कितने मॅनेजमेंट ट्रेनी नियमित कर दिए गए है?

    09)क्या मॅनेजमेंट ट्रेनी को बोनस और ग्रेच्युटी उनकी सेवा समाप्ति के बाद दी जाती है. यदि हा तो किन किन मॅनेजमेंट ट्रेनी को दी गई है?

    10)पिछले 20 वर्ष के दौरान अस्थाई (आउटसोर्स) कर्मचारियों को रखने के लिए कितनी एजेंसी को अनुबंधित किया गया है और कितने वर्ष के लिए किया जाता है?

    11) हमारी नियुक्ति आपके संस्थान मे सीधे आपके द्वारा ही हुई है, परन्तु कुछ अन्तराल पे आपने आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से हमारा अनुबंधित अवधी बढ़ायी. इसका मूलभूत कारण क्या था और बाकियों की तरह हमे स्थाई क्यों नहीं किया?

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