Top 10 Ayurvedic Doctor In Mumbai

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Are You Looking for Ayurvedic Doctors In Mumbai? Don't Worry Hindi Vivek will help you out to find the best Ayurvedic Doctors In Mumbai. Ayurveda is a system of medicine that has its historical roots in the valleys and plateaus of the Indian subcontinent. With its origin and development mostly…

प्रगति की मिसाल भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग

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भीलवाड़ा जिला काफी समय से पानी की कमी के चलते डार्क जोन में रहा है। अत: यहां नए प्रोसेस की अनुमति प्रशासन द्वारा नहीं दी जा सकती। इसलिए कपड़ा फिनिश करवाने के लिए यहां के उद्यमियों को बालोतरा भेजना पड़ता है परंतु पिछले दो-तीन वर्षों में कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी दूर हुई है, परंतु इसका तहसील के अनुसार पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। जिससे नए प्रोसेस हाउस की अनुमति मिल सके।

आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु वस्त्र मंत्रालय कटिबद्ध

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भारत सरकार समेत 16 राज्यों ने एक छत के नीचे चार लाख लोगों को कुशल बनाने का संकल्प लिया है। वस्त्र से जुड़े जिन क्षेत्रों में लोगों को कुशल बनाया जाएगा उनमें तैयार परिधान, बुने हुए कपड़े, धातु हस्तकला, हथकरघा, हस्तकला और कालीन शामिल हैं। वस्त्र उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि नए भारत में हम यह सुनिश्चित करें कि अजीविका की इच्छा रखने वाला हर नागरिक कुशल और दक्ष हो।

प्रगति की ओर अग्रसर मर्दा ग्रुप

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मर्दा बंधुओं ने अरविंद ब्राण्ड धोती के व्यवसाय पर अपना ध्यान केंद्रित किया और उसके लिये खूब मेहनत की। रणनीतिक और तकनीकी रुपसे परिश्रम कर उन्होंने अपने व्यापार को पुरे भारतवर्ष में फैलाया। कुछ ही समय में धोती किंग के रुप में विख्यात हुए। उस समय धोती बहुत ही लोकप्रिय वस्त्र हुआ करता था, जिसे भारत के ह्रदय को छुने वाला वस्त्र भी माना जाता था।

भारत के वस्त्रोद्योग का भविष्य

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कोविड-19 की स्थिति में फेस मास्क और पीपीई कवरऑल जैसे बुनियादी उत्पादों के लिए भारत को स्थानीय मांगों को पूरा करने में संघर्ष करना पड़ा। अन्य देश जैसे वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जो तकनीकी वस्त्रों के लिए ज्यादा जाने नहीं जाते हैं, इन मेडिकल डिस्पोजबल्स की आपूर्ति करके बड़ी मात्रा में यूएसडी राजस्व पैदा कर रहे हैं। निर्यात प्रतिबंधों में हालिया बदलाव के साथ, भारत ने भारी संख्या में पीपीई किट का निर्यात करना शुरू कर दिया है।

भारतीय वस्त्र उद्योग और निवेश के अवसर

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भारतीय निर्मित वस्त्र और हस्तशिल्प कई देशों को निर्यात किए जाते हैं। निर्यात के लिए अमेरिका प्राथमिक बाजार है, लेकिन देशों की कुल संख्या 100 तक है। निर्यात में 41% हिस्सेदारी के साथ रेडीमेड वस्त्र सबसे बड़ा खंड है। कपड़ा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने पिछले साल की तुलना में 7% की वृद्धि के साथ 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कपड़ा निर्यात किया।

कपड़ा उद्योग जैसा नहीं है दूसरा कोई उद्योग- महेश पाटोदिया एम.डी., पाटोदिया विविंग मिल्स प्रा. लि.

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केंद्र सरकार और राज्य सरकार की जो योजना है वैसी योजनाएं पहले कभी नहीं बनी। इतनी बढ़िया योजनाएं सरकार ला रही है मगर उसे अमल में लाने में अड़चन आ रही है। सरकार ने अनेक प्रकार की सहुलियते देकर अपना काम कर दिया है। उद्योग-व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, इलेक्ट्रिसिटी, निर्यात में सुविधाएं, ब्याज दर में कमी आदि सरकार की तरफ से ठोस पहल की गई है लेकिन सरकारी बाबूओं की ओर से बहुत तकलीफ है, इसका समाधान होना चाहिए।

भारतीय कपड़ा बाजार देशी से ग्लोबल

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भारत में आज भी जब कोई किसी दूसरे राज्य में पर्यटन के लिए जाता है तो उस यात्रा के स्मरण के रूप में वहां का कोई विशिष्ट व्यंजन और विशिष्ट कपड़ा जरूर लाता है। आप कश्मीर जाकर पश्मीना शॉल लिए बिना वापस नहीं आ सकते। इसलिए पर्यटन स्थलों पर भी बाजारों को विशिष्ट पद्धति से बसाया जाने लगा।

विश्व बाजार में उभरता भारतीय वस्त्र उद्योग

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सकारात्मक संकेत यह है कि मौजूदा सरकार वस्त्रोद्योग क्षेत्र में ढांचागत सुधार कर इसे फिर से पटरी पर लाकर तेज गति देने की दिशा में प्रयास कर रही है। ’मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के माध्यम से भारत को निर्माण तथा निर्यात का हब बनाने का अभियान चल ही रहा है।

वस्त्र कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

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वस्त्र मंत्रालय समय-समय पर वस्त्र कामगारों को लाभान्वित करने वाली योजनाओं की निगरानी करता रहता है। कामगार और उनके लिए बनाई गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की लगातार बेहतरी मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्र सरकार ने वस्त्र उद्योग से हर क्षेत्र में ऐसी योजनाएं शुरू की हैं। 

भारतीय परंपरा में वस्त्र वैशिष्ट्य

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भारतीय परिवेश और परंपरा में वस्त्रों के रंग और पहनावे की विभिन्न शैलियां ही नहीं है अपितु वस्त्रों के धागे, वह किस तंतु से निर्मित हैं, और किस अवस्था में किस ऋतु में कौन से धागे या तंतु के कपड़े पहने हैं यह भी एक महत्वपूर्ण विषय है। जैसे गर्मी के समय में रेशमी वस्त्रों को धारण नहीं किया जाता। कपास से निर्मित वस्त्रों और ऊनी वस्त्रों को प्रयोग में नहीं लाते, वहीं सर्दियों में नेट के वस्त्र नहीं पहने जा सकते।

भारतीय वस्त्र परंपरा में औद्योगिक हस्तक्षेप

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यह हमारा अज्ञान एवं भ्रम है कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पश्चिम अग्रणी देशों में आते हैं, जबकि हकीकत यह थी कि हम पश्चिम में खासतौर से ब्रिटेन से बहुत आगे थे। जब ब्रिटेन हमारे कपड़ा उद्योग पर अतिक्रमण कर रहा था, तब हमारे यहां 2400 और 2500 काउंट के महीन धागे बनाने में जुलाहे निपुण थे, केवल एक ग्रेन में 29 गज लंबे धागे हमारे कारीगर बना लिया करते थे।

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