ज्यादा गम, कम खुशी अलबिदा-2012

भारत में प्रणव मुखर्जी तथा अमरीका में बराक ओबामा की राष्ट्रपति पद पर ताजपोशी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक, भ्रष्टाचार, काला धन, चर्चित चेहरों का निधन, आतंकी अजमल कसाब को फांसी, महाराष्ट्र मंत्रालय में आग जैसी घटनाओं ने बहुत रूलाया, तो दूसरी ओर अंतरिक्ष में सौवां प्रक्षेपण, मास्टर ब्लास्टर सचिन के सौवें शतक के रूप में साल 2012 सदैव लोगों के मानस पटल पर अंकित रहेगा।

राजधानी दिल्ली में पूरे साल केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाजें बुलंद की जाती रहीं। विपक्ष तो लगातार डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार के खिलाफ आवाजेें बुलंद करता रहा। समाजसेवक अण्णा हजारे तथा बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार को घेरा तो मंहगाई तथा कोयले की दलाली के मसलों पर विपक्ष ने संसद के काम-काज में कई दिनों तक गतिरोध बनाए रखा सद्भावना खेलों में भ्रष्टाचार के मसले पर कांग्रेसी नेता सुरेश कलमाड़ी को जेल की हवा खानी पड़ी।

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के निधन की घटना भी सन् 2012 अपने अंतस्थ में लेकर चला गया। सन् 1997 में देश के प्रधानमंत्री बने इंद्रकुमार गुजराल 11 माह तक देश के प्रधानमंत्री रहे। हरियाणा के गुडगांव के एक संक्रामक बीमारी के कारण उन्हें मेदांता अस्पताल में उपाचारार्थ दाखिल किया गया था, डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे उन्हें बचाने में सफल नहीं हो पाए।
राष्ट्रवादी विचारधारा की अग्रणी संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक के. एस. सुदर्शन के निधन की खबर ने संघ के प्रति आस्था रखने वाले लोगों को नेत्र नम हुए।सुदर्शन सन् 2000 से 2009 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंचालक रहे। सुदर्शन जी का जाना सभी को परेशान कर रहा था।

शांत हुआ मुंबई का शेर

सुदर्शन जी के निधन के कुछ ही दिनों बाद शिवसेना प्रमुख बाल साहब ठाकरे के निधन ने उनके चाहने वालों ने झकझोर कर रखा दिया। बाल साहब ठाकरे जी के प्रति आस्था रखने वालों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि बाल साहब ठाकरे अब उनके बीच नहीं हैं। बाला साहब के निधन की खबर मातोश्री से बाहर आई, उनको चाहने वालों की आंखों से आंसुओं की धाराएं बहने लगी। महात्मा ज्योति बा फुले, भारतरत्न डॉ. भीमराव (बाबा साहब) अांबेडकर, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की महायात्रा के दौरान उनके समर्थकों की जितनी भीड़ उमड़ी थी, कुछ वैसा ही जनसागर बाला साहब की महायात्रा के दौरान उमड़ा था।

कांग्रेस ने खोया कद्दावर नेता

कांग्रेस के लिए भी बीता साल नुकसानदेह ही रहा।आदर्श सोसाइटी घोटाले में कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों का नाम आने से पार्टी की किरकिरी हुई।

इस प्रकरण में तीनों मुख्यमंत्रियों से सीबी आई के समक्ष अपना पक्ष रखना पड़ा। आदर्श सोसाइटी घाटाले में अभी पूछताछ का सिलसिला जारी ही था कि एक पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की तबियत खराब हो गई। कडनी में शिकायत होने के बाद श्री देशमुख को चेन्नई के एक अस्पताल में उपचारार्थ भर्ती कराया गया, जहां लगभग दस दिन के उपचार के बाद उनका निधन हो गया। श्री देशमुख के निधन से कांग्रेस को ऐसी क्षति हुई, जिसे भरा जाना संभव नहीं है।

जुड़वा बच्चियों को मिली नई जिंदगी

मध्यप्रदेश के बैतुल जिले के पाढर मिशन अस्पताल में 11 घंटे के आपरेशन के बाद डॉक्टरों ने माया यादव की दो जुड़वा बेटियों को एक दूसरे से अलग कर उन्हें नई जिंदगी दी। माया यादव ने 2 जुलाई, 2011 को इन जुड़वा बेटियों को जन्म दिया था।

सम्मानित हुए दलाई लामा और आशा भोसले

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को बीते साल महात्मा गांधी पुरस्कार दिया गया, जबकि पार्श्वगायिका आशा भोसले को जीवन गौरव पुरस्कार प्रदान किया गया। हरियाणा के जिंदू जिले का बुल्ला देवी गांव के व्यसनमुक्ति के चालीस वर्ष पूरे हुए।इसी क्रम में महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने गुटखे तथा पान मसाले पर प्रतिबंध लगाकर मिसाल कायम की। दिल्ली स्थित जी.बी. पंत अस्पताल में ओजोन गैस से रीढ़ की हड्डी का इलाज शुरु किया गया।6जनवरी को न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर राहुल गुप्ता ने इस तकनीक से कई मरीजों का इलाज कर उन्हें रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात दिलाया।

सिनेमा  तथा संगीत जगत ने खोये खास चेहरे

सिनेमा तथा संगीत जगत के लिए भी 2012 काल बनकर आया। साल 2012 ने सदी के पहले महानायक राजेश खन्ना, फिल्म वक्त में जोहरा जबा का किरदार अदा करने वाली अचला सचदेव, रामायण धारावाहिक में हनुमान के किरदार को साकार करने वाले रुस्तम-ए -हिंद दारासिंह, प्रेम पर आधारित फिल्मों के निर्माता यश चोपड़ा, फिल्म शोले में रहीम चाचा का किरदार निभाने वाले ए.के. हंगल, प्रख्यात सितारवादक रविशंकर तथा नाटककार दिनेश ठाकुर को नए साल का सूर्य नहीं देखने दिया।

हास्य व्यंग्य के महान कलाकार जसपाल भट्टी की मौत भी बीते साल की दुखद यादों में शुमार रही। भारतीय फिल्म जगत में खलनायक की सशक्त भूमिका अदा करने वाले 92 वर्षीय प्राण, शुत्रघ्न सिन्हा, अभिनेत्री लीजा रे तथा मनीषा कोईराला के लिए साल 2012 परेशानी का सबब देने वाला ही साबित हुआ, इन्हें उपचार के लिए काफी दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा।

भारतीय क्रिकेट टीम के उदीयमान खिलाड़ी युवराज सिंह कैंसर से परेशान रहे, पर उन्होंने कैंसर को मात देकर फिर क्रिकेट खेलना शुरु कर दिया। साल का पूर्वांंध उनके लिए अच्छा नहीं रहा, जबकि उत्तरार्ध में वे फिट होकर क्रिकेट के मैदान में फिर से चौके-छक्के लगाने के लिए उतरने लगे।

धवल क्रांति के पुरोधा वर्गिस कुरियन के लिए भी बीता साल उनके जीवन का अंतिम साल ही साबित हुआ। ईसाई मूल ने इस नागरिक ने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर गुजरात के आणंद में अमूल दूध फैक्टरी का शुभारंभ किया।

अंतरिक्ष तथा खेलों की दृष्टि से बीता साल भारत की सफलता देने वाला रहा। इसरो ने इस साल अपना सौवीं उड़ान अंतरिक्ष में रवाना की। इसके अतिरिक्त भुवनेश्वर के चांदीपुर में कई यानों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।भारतीय मूल की सुनिता विलियम्स की ऊंची उड़ान को भी बीते साल की सफलताओं में गिना जा सकता है।174 दिनों तक सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में रहीं।

नासा के खगोलविदों ने 27 जनवरी को केपनर टेलिस्कोप से 11 सौर मंडलों में फैले 26 नए ग्रहों का पता लगाया।चांद पर जाने वाले पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग को बीते साल हमने खोया तो जापान की 73 वर्षीया महिला ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह करने में कामयाबी प्राप्त की।

बेटियां बनीं कबड्डी की विश्वविजेता

भारत ने पदक तलिका में अपना स्थान पाने में सफलता अर्जित की।इसके अलावा पटना में आयोजित की गई पहली महिला विश्वकप कबड्डी स्पर्धा में चैंपियन बनकर देश का गौरव बढ़ाया।सायना नेहवाल ने थाईलैंड ओपन का खिताब जीतकर खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान नवाब पटौदी के निधन से खेल जगत भी शोक में डूबा।भारतीय ओलंपिक संघ समेत कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगाने से खेल जगत को मायूस भी होना पड़ा।

महाराष्ट्र मंत्रालय में आग

बीते साल ने महाराष्ट्र मंत्रालय आग की कालिक से ऐसा काला किया कि उसे साल खत्म होने तक पूर्व रूप नहीं दिया जा सका। शॉट सर्किट से अचानक लगी आग ने दूध जैसे सफेद मंत्रालय की खूबसूसरती को बर्बाद कर दिया।अचानक लगी इस आग से सभी मंत्री तथा मंत्रालय में काम करने वाले कर्मचारी घबरा गए।जान बचाने के लिए कुछ कर्मचरियों ने मंत्रालय से नीचे छलांग दी और मंत्रियों ने लिफ्त का इंतजार न कर सीढ़ियों से नीचे उतरना ही बेहतर समझा।इस अग्निकांड में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर खाक हो गए।

असम तथा म्यनमार के मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आजाद मैदान में रजा अकादमी के बैनर तले आयोजित की गई रैली के दौरान हुई हिंसा के कारण मुंबई में तनावपूर्ण स्थिति निर्माण हुई। उपद्रवियों ने वहां बनाए गए अमर-जवान स्मारक को क्षतिग्रस्त कर दिया।इतना ही नहीं यहां तैनात महिला पुलिस कर्मियों के साथ भी उपद्रवियों ने बदसलुकी की।बीते साल हुई इस घटना को आने वाले कई सालों तक याद रखा जाएगा। यह घटना एक कलंक के रूप में सदैव याद की जाती रहेगी।

सूली पर लटकाया गया कसाब

मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को आतंकवादी घटना को अंजाम देने वाले एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल कसाब को पुणे के यरवड़ा जेल में फांसी पर लटका दिया गया। बगैर किसी पूर्व जानकारी के कसाब को फांसी दिए जाने पर लोेगों को आश्चर्य तो हुआ पर लेकिन देर से ही सही सरकार की ओर से कसाब को सूली पर लटकाने का हर ओर से स्वागत किया गया। केंद्र सरकार पर लगातार शिवसेना की ओर दबाव डाला जा रहा था कि अजमल कसाब को जल्दी से जल्दी फांसी पर लटकाया जाए।

शिवसेना ने राष्ट्रपति पद पर प्रणव मुखर्जी को समर्थन देते समय यही कहा था कि अजफल गुरु तथा अजमल कसाब को जल्द से जल्द फांसी दी जाए। देर से ही सही सरकार ने कसाब को सूली पर लटका दिया, पर अभी अफजल गुरु को फांसी पर लटकाया जाना शेष है।

जिस तरह से अफजल गुरु को फांसी पर लटकाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है, उससे यही लगता है कि साल-2013 अजफल गुरु के जीवन का अंतिम साल होगा। 1990 में आत्मघाती हमले के दौरान मारे गए पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह की फांसी पर उपमुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल तथा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल (अब कार्यकाल समाप्त) के बीच हुई बातचीत के बाद रोक लगा दी गई। तीस साल के पाकिस्तान की जेल में कैद सुरजीत सिंह रिहा होकर अपने वतन लौटा तो उसके घर वालों के चेहरे खिल गए।
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