इस वजह से भक्त नहीं देख पायेंगे राम मंदिर का निर्माण कार्य!


राम मंदिर को लेकर पूरे देश में एक अलग ही राम नाम की लहर देखने को मिल रही है। राम भक्त मंदिर को लेकर आतुर हुए है कि कब मंदिर बन जाए और उसके दर्शन हो सकें और इसका उदाहरण मंदिर के लिए हो रहे दान से ही लगाया जा सकता है। लोग बिना किसी दबाव के राम मंदिर के नाम पर दान कर रहे है। राम मंदिर के लिए लोगों ने अपनी हैसियत से ज्यादा दान किया है और यही कारण है कि राम मंदिर के लिए 1100 करोड़ का आंकड़ा पकड़ा गया था जबकि यह 2500 करोड़ को पार कर गया। इससे पहला इतना दान किसी मंदिर के लिए नहीं दिया गया था। आयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर राम भक्तों ने घर घर जाकर सभी से समर्पण राशि ली। इस अभियान में करीब 9 लाख कार्यकर्ताओ ने 1 लाख 75 हजार की टोली बनायी और सभी से राम मंदिर के लिए सहयोग लिया। इस समर्पण अभियान में खास बात यह भी रही कि मुस्लिम समुदाय के भी कुछ लोगों ने राम मंदिर के नाम पर अपना सहयोग दिया।  

 
 
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से जानकारी दी गयी है कि मंदिर की नींव की खुदाई का काम और मिट्टी हटाने का काम करीब आधे से अधिक पूरा हो चुका है। अगर इसी गति से काम आगे बढ़ा तो अप्रैल महीने तक नींव की भराई का काम शुरु हो जायेगा। मंदिर के नींव की कुल गहराई 15 मीटर है जिसे कुल 44 परत में अलग अलग भरा जायेगा। नींव को पत्थर, सीमेंट, मोरंग और माइक्रो सीलिंग से तैयार किया जायेगा और उसे जमीन की सहत तक लाया जायेगा जिसके बाद फिर उपर का कार्य प्रारंभ होगा।  
 
 
मंदिर निर्माण के दौरान कोई भी राम भक्त मंदिर निर्माण कार्य को नहीं देख सकता है हालांकि जब से मंदिर का निर्माण कार्य शुरु हुआ है तब से अयोध्या पहुंचने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है लेकिन इस समय अयोध्या में राम भक्त सिर्फ प्रभु श्रीराम के दर्शन कर सकते है उन्हे मंदिर निर्माण को देखने का अवसर प्राप्त नहीं होगा। मंदिर निर्माण कर रहे अधिकारियों ने यह आशंका व्यक्त की है कि अगर निर्माण क्षेत्र में श्रद्दालु आयेंगे तो इससे काम के दौरान बाधा उत्पन्न हो सकती है और किसी भी दुर्घटना को नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए निर्माण क्षेत्र में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी गयी है।
 
 
राम मंदिर में लगने वाले पत्थरों की नक्काशी का काम तो बहुत पहले से ही चल रहा है जिससे करीब 40 प्रतिशत तक नक्काशी का काम पूरा हो चुका है लेकिन अभी बाकी बचे पत्थरों पर नक्काशी का काम बाकी है। ट्रस्ट की तरफ से जानकारी दी गयी कि सन 2006 में सरकार की तरफ से पत्थरों की नक्काशी का काम रोक दिया गया था जिससे यह अधूरे रह गये लेकिन इन सालों में विज्ञान नें बहुत तरक्की कर ली है और पत्थरों को तरासने की बड़ी बड़ी मशीने तैयार कर ली गयी है जिससे अब पत्थरों की नक्काशी का बाकी काम मशीनों द्वारा किया जायेगा। 
 
 
जिस प्रभु श्री राम के नाम से पत्थर भी समुद्र में तैरता है उसकी महिमा कितनी अपार है। राम निर्माण का कार्य शुरु नहीं हुआ कि उसका विस्तार भी बढ़ना शुरु हो गया है। मंदिर की महिमा तो पूरे विश्व में फैल चुकी है लेकिन इसकी जमीन भी अब फैलने लगी है। जब मंदिर का निर्माण कार्य शुरु हुआ तो मंदिर 70 एकड़ में बनना तय था लेकिन मात्र कुछ महीनें में ही मंदिर का क्षेत्रफल बढ़ कर 107 एकड़ तक पहुंच गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से करीब एक करोड़ रुपये में मंदिर के लिए पहला भूखंड खरीदा गया। 
 
 
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से अभी और भी जमीन खरीदने का प्रयास किया जा रहा है जिससे राम मंदिर का विस्तार किया जा सके और यहां मंदिर के साथ साथ प्रभु श्री राम के जीवन से जुड़े पुस्तकालय, संग्रहालय और झांकियों का निर्माण किया जा सके। यह सभी को भलिभांति पता है कि यह मंदिर कई वर्षों तक रहने वाला है जिससे मंदिर निर्माण में किसी भी बात को अनदेखा नहीं किया जा रहा है। हमारी आने वाली पीढियों के लिए यह मंदिर एक मिशाल के तौर पर होगी। राम मंदिर करीब 3 साल में तैयार हो जायेगा। 
 
 
    
 
 

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