बाटला हाउस एनकाउंटर फैसले के बाद क्या ममता बनर्जी राजनीति से लेंगी संन्यास?

13 सितंबर 2008 को दिल्ली बम कांड सभी को याद होगा। इंडियन मुजाहिद्दीन की तरफ से यह आतंकी हमला किया गया था जिसमें करीब 30 लोगों की जान चली गयी थी और सैकड़ों लोग घायल हो गये थे हालांकि यह बातें तो सभी को पता है और याद भी होगी लेकिन अब इस घटना से जुड़ी कुछ राजनीतिक बातें भी याद दिला देते है कि आखिर कैसे कुछ नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया था, कुछ ने राजनीति छोड़ने की बात तक कह दी थी और कुछ ने तो आतंकियों के मरने पर रोने का नाटक भी किया था। बाटला हाउस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है और अब आरोपी को फांसी से कोई नहीं बचा सकता है।

दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर के 6 दिन बाद यानी 19 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली की सीरियल ब्लास्ट मामले के आतंकी दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में किसी एक मकान में छिपे हुए है। गुप्त सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने योजनाबद्ध तरीके से उस मकान को घेर लिया जिसके बाद दोनों तरफ से गोलीबारी होने लगी। इस एनकाउंटर में दो आतंकी मारे गये जबकि एक आतंकी आरिज खान भागने में सफल हो गया। वही दिल्ली के पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गये। इस घटना के करीब 10 साल बाद 2018 में पुलिस ने आरिज खान को नेपाल सीमा के करीब से गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद से यह केस अदालत में चल रहा था। दिल्ली की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए आरिज खान को 11 लाख रुपये जुर्माना और फांसी की सजा सुनायी है। जुर्माने के 10 लाख रुपये शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के परिवार को दिये जायेंगे। 
 
 
देश के कुछ राजनीतिक दलों बाटला हाउस एनकाउंटर को लेकर पुलिस पर सवाल खड़ा किया और मारे गये आतंकियों को बेकसूर बताया हालांकि सच्चाई से तो वह भी वाकिफ रहे होंगे लेकिन वोट बैंक की राजनीति जो ना करा दे। बाटला हाउस पर कांग्रेस सहित तमाम दलों ने जमकर रोटी सेकी, 
 
*कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने एक रैली में कहा कि ‘मैने एनकाउंटर की फोटो देखी थी पुलिस ने एक लड़के के सिर में गोली मारी थी जबकि एनकाउंटर में ऐसा निशाना लगाना मुश्किल है’ 
*कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तो अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए यहां तक कह दिया कि ‘एनकाउंटर में मारे गये लड़कों की फोटो देख सोनिया गांधी रोने लगी थी, हम उन बेकसूरों को इंसाफ दिलाने में नाकाम रहे’
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले है और ममता बनर्जी राज्य की जनता से तमाम वादे कर रही है लेकिन बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़ा एक वादा उनके लिए मुसीबत बन सकता है। बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद ममता बनर्जी ने इसे फर्जी बताया था और सभी से कहा था कि अगर यह एनकाउंटर सही साबित होता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगी। उधर कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी यह सवाल पूछ रही है कि क्या ममता दीदी चुनाव से पहले संन्यास ले लेंगी? बाटला हाउस मामले में अल्पसंख्यक वोटों को लुभाने में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी, सपा और बसपा ने भी जमकर अपनी अपनी रोटी सेंकी थी और बाटला हाउस मामले को पूरी तरह से फर्जी और गलत बताया था। अब इस राजनीति से सभी पार्टियों को कितना फायदा हुआ यह तो किसी को भी नहीं पता लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद इससे सभी नेताओं को नुकसान जरुर होने वाला है।
 
 
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यह का कि आरोपी आरिज खान इस हमले में शामिल था और एनकाउंटर के समय यह भागने में सफल रहा। कोर्ट ने यह माना कि आतंकी आरिज खान देश और समाज दोनों के लिए खतरा है इसलिए इसे मौत की सजा सुनाई जाती है। आरोपी आरिज खान को आईपीसी की धारा 186, 333, 302, 353, 307 और 174A के दोषी करार दिया गया है। घटना से शामिल एक और आरोपी शहजाद अहमद को सन 2013 में ही सजा सुनाई गयी थी जबकि दो आरोपी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद को एनकाउंटर में ही मार गिराया गया था। 
बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में जिस तरह से कुछ राजनीतिक दलों ने इसका भरपूर राजनीतिक इस्तेमाल किया वह देश और देश की जनता के साथ एक धोका था। वोट के लिए जनता से वादे किए जा सकते है और उन्हें पूरा करने का प्रयास करना चाहिए लेकिन किसी एक समाज के लिए पूरे देश को गुमराह करना कहां तक ठीक है ? आखिर बाटला हाउस एनकाउंटर को गलत साबित करने के पीछे इन राजनीतिक दलों की मंशा क्या थी ? मुस्लिम आतंकियों को सही साबित करने के लिए आखिर 30 से अधिक मृतकों को क्यों दरकिनार किया गया? क्या आम जनता की मौत का किसी को कोई गम नहीं था? ऐसे तमाम सवाल है जो कोर्ट के फैसले के बाद लोग कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों से पूछ सकते है।   

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  1. Anonymous

    काँग्रेस हरामखोर पार्टी है.

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