हवन और यज्ञ के वैज्ञानिक लाभ से कहीं आप भी तो अनजान नहीं!

यज्ञ कुंड से निकलता धुआ बाकी सभी धुएं से बिल्कुल अलग होता है यह प्रदूषण नहीं फैलाता बल्कि यह प्रदूषण को खत्म करता है। यज्ञ कुंड से निकले वाले धुएं से ना सिर्फ वातावरण पवित्र होता है बल्कि आत्मा और शरीर भी शुद्ध होता है शायद यही कारण था कि हमारे ऋषि मुनि हमेशा यज्ञ करते रहते थे। वर्तमान में फैली महामारी भी यज्ञों के क्षीण होने का कारण है। अगर वर्तमान में भी यज्ञ और हवन कम नहीं हुआ होता तो शायद ऐसे वायरस पृथ्वी पर जन्म ही नहीं लिए होते।

हिन्दू धर्म में यज्ञ कई हजार सालों से चला आ रहा है और इसके फायदों को वैज्ञानिकों ने भी माना है। ऋग्वेद में भी यज्ञ का वर्णन किया गया है। यज्ञ से वातावरण, घर, सेहत और शरीर सभी को लाभ मिलता है। आप में से कई लोगों ने तो यज्ञ करवाया भी होगा या उसमें शामिल जरूर हुए होंगे। यज्ञ के दौरान आप ने सकारात्मक शक्तियों को महसूस किया होगा, मन से भी आप ने खुद को अच्छा महसूस किया होगा लेकिन पूजा या यज्ञ को तभी करें जब आप उसके लिए पूरे मन से तैयार हों इसका उपयोग समाज को दिखाने के लिए कभी ना करें।

यज्ञ और हवन में अंतर
यज्ञ और हवन दोनों एक ही प्रकार के होते है लेकिन समय के अनुसार इसका अपना अपना महत्व है। पूजा के बाद अग्नि में दी जाने वाली आहुति को हवन कहा जाता है जबकि किसी विशेष कार्य से या फिर देवताओं को देने वाली आहुति को यज्ञ कहा जाता है। जीवन में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों, मूल्यवान पौष्टिक द्रव्यों सहित तमाम चीजों को अग्निकुंड में डाला जाता है और इसके माध्यम से संसार के कल्याण की कामना की जाती है।

हवन करने के वैज्ञानिक लाभ

  •  हवन में आम की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। आम की लकड़ियां जब जलती है तो उससे परफार्मिक एल्डिहाइड गैस उत्पन्न होती है जो वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया को मार देती है और वातावरण को शुद्ध बनाती है।
  • हवन का सीधा मतलब धर्म से है हालांकि यह अलग बात है कि धर्म के इस कार्य में वैज्ञानिक लाभ भी छिपे है। एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि अगर आधे घंटे तक हवन किया जाए तो उसके धुएं से आस-पास के टाइफाइड जैसे बैक्टीरिया भी मर जाते है।
  • हवन के दौरान जो लोग आस पास होते है या फिर हवन करते है उन्हें मस्तिष्क, फेफड़ों और श्वास संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। हवन के धुएं से श्वांस संबंधी सभी रोग खत्म हो जाते है।
  • हवन के धुएं से करीब 94 प्रतिशत विषैले जीवाणुओं का नाश होता है।
  • हवन के दौरान उच्चारण होने वाले मंत्र से ध्वनि प्रदूषण खत्म होता है और शरीर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।

हवन सामग्री
आम की लकड़ी, चावल, घी, जौ, तिल, अगर, तगर, नागर, मोथा, बालछड़, छाड़छबीला, कपूर कचरी, भोजपत्र आदि.

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