Twitter की मनमानी पर लगी रोक, अब हर पोस्ट के लिए ट्विटर होगा जिम्मेदार

सरकार और ट्विटर के बीच की लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है जिसके बाद सरकार ने ट्विटर की मनमानी पर रोक लगा दी। ट्विटर पर आजादी के नाम पर लगातार सरकार और धर्म के खिलाफ पोस्ट बढ़ते जा रहे थे। विवादित और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली विडियो को भी ट्विटर पर जोर शोर से फैलाया जाता है जिससे साम्प्रदायिक तनाव बढ़ जाता है। केंद्र सरकार पिछले काफी समय से ट्विटर को इन सब पर रोक लगाने की हिदायत दी थी लेकिन ट्विटर की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही थी। ट्विटर लगातार सरकार के फैसलों की अनदेखी कर रहा था जिसके बाद सरकार ने ट्विटर से उसकी कानूनी सुरक्षा को वापस ले लिया। 
 
केंद्र सरकार ने ट्विटर पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 79 के तहत मिली कानूनी सुरक्षा के अधिकार को वापस ले लिया जिसके बाद अब ट्विटर मध्यस्थ का मंच नहीं रहा। ट्विटर पर अगर कोई भड़काऊ भाषण या आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसके लिए ट्विटर खुद जिम्मेदार होगा और कानूनी नियमों के तहत ट्विटर पर कार्रवाई हो सकेगी। अभी तक कानूनी सुरक्षा के चलते ट्विटर इससे लगातार बचता था और ट्विटर उपयोगकर्ता देश और सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करते थे। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद ट्विटर के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहला एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर लिया गया है। 
 
ट्विटर ने सरकार के फैसले के बाद बयान जारी कर कहा कि ट्विटर इंडिया सरकार के नियमों का पालन करने की कोशिश करेगा। सरकार की तरफ से सोशल मीडिया को लेकर कुछ कड़े नियम तय किये गये थे जिसका पालन सभी कर रहे हैं लेकिन ट्विटर अभी तक उसका पालन नहीं कर रहा था। ट्विटर लंबे समय से नये आईटी नियमों का पालन करने में आनाकानी कर रहा था। ट्विटर की तरफ से कहा गया था कि सरकार द्वारा बनाये गये कानून में बोलने की आजादी (Freedom of speech) को बाधित किया गया है जिससे लोग अपनी बात खुल कर नहीं रख सकेंगे जिसके बाद सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया था कि यह कानून है और इसे मानना ही होगा।  
 
पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने तमाम परिवर्तन किए है जिससे उन लोगों की परेशानी बढ़ गयी जो गलत तरीकों से पैसा कमा रहे थे और देश को बर्बाद कर रहे थे ऐसे में लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ विरोध शुरु कर दिया था। राष्ट्र के खिलाफ हो रही बयानबाजी के बाद सरकार ने ऐसे लोगों पर नकेल कसने के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए जिसके बाद ज्यादातर सोशल साइट्स ने इसे स्वीकार कर लिया लेकिन ट्विटर ने इसे मानने में देरी की जिसके बाद सरकार की तरफ से कड़ा कदम उठाना पड़ा। 
सरकार और ट्विटर के बीच विवाद की शुरुआत
सरकार और ट्विटर के बीच विवाद किसान विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ जब किसानों ने गलत वीडियो वायरल कर हिंसा भड़काने की कोशिश की, सरकार की तरफ से ट्विटर को कुछ अकाउंट की जानकारी दी गयी और उसे बंद करने के लिए कहा गया। ट्विटर ने इस पर जरूरी कार्रवाई नहीं की और सरकार की अपील को अनदेखा कर दिया। सरकार ने कुछ विवादित और आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के अकाउंट्स की जानकारी ट्विटर को सौंपी और  उन्हे ब्लॉक करने के लिए कहा, ट्विटर ने कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक तो किया लेकिन कुछ समय बाद उन्हे फिर से चालू कर दिया। ट्विटर की तरफ से कहा गया कि हम किसी के बोलने की आजादी पर रोक नहीं लगा सकते है जिसके बाद केंद्र सरकार ने आई नियमों में परिवर्तन किया और 25 फरवरी को नये नियमों को लागू कर दिया। जिसके बाद ट्विटर ने कोर्ट का रुख किया लेकिन वहां से भी उसे मुंह की खानी पड़ी और अंत में केंद्र सरकार के नियमों को मानना उसकी मजबूरी हो गयी। 

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